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संपादकीय: हिमाचल की शांति पर बढ़ते अपराधों की छाया — अब निर्णायक कदमों का समय

RamParkash Vats
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संपादक राम प्रकाश वत्स Mob:-88947-23376

यदि इन आंकड़ों की तुलना वर्ष 2024 से की जाए तो तस्वीर और भयावह दिखाई देती है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में 948 मामले दर्ज हुए थे। यानी सिर्फ एक वर्ष में ही अपराधों में 12% से अधिक की वृद्धि हुई है। बलात्कार के मामलों में 21.12%, छेड़छाड़ में 9.09%, अपहरण में 13.10%, और महिलाओं के प्रति क्रूरता में 18% की वृद्धि हुई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इव-टीजिंग के मामलों में 52.44% की भारी उछाल दर्ज की गई है।

जिला स्तर पर यदि देखा जाए तो शिमला जिला इस वर्ष भी सबसे आगे है, जहाँ 33 बलात्कार के मामले दर्ज हुए हैं। चंबा और मंडी में 29-29, कुल्लू में 22, सिरमौर में 21, कांगड़ा में 18, सोलन में 17, और बीबीएन क्षेत्र में 14 मामले दर्ज हुए हैं। छोटे जिलों जैसे हमीरपुर, ऊना, देहरा, नूरपुर, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में भी अपराधों का सिलसिला थमा नहीं है।

यह तथ्य हमें यह सोचने पर विवश करते हैं कि आखिर वह हिमाचल, जो कभी महिला सुरक्षा के मामले में उदाहरण माना जाता था, आज इस स्थिति में कैसे पहुँच गया? समाजशास्त्रियों का मानना है कि तेजी से बदलता सामाजिक ढांचा, डिजिटल युग की गलत प्रवृत्तियाँ, और मादक पदार्थों का बढ़ता चलन इस गिरावट के प्रमुख कारणों में से हैं। अनेक मामलों में यह भी पाया गया है कि अपराधी पीड़िता के परिचित ही होते हैं — रिश्तेदार, दोस्त, या कार्यस्थल के सहयोगी। कई बार अपराध ब्लैकमेलिंग के रूप में तब्दील हो जाते हैं, जहाँ निजी तस्वीरों और वीडियोज़ का दुरुपयोग किया जाता है।

राज्य पुलिस विभाग ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया है। अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है, और मामलों को संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी के साथ निपटाया जा रहा है। साथ ही, स्कूलों, कॉलेजों और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि जनता को अपराधों की रोकथाम और कानून की जानकारी दी जा सके। यह पहल स्वागतयोग्य है, परंतु यह भी उतना ही आवश्यक है कि इन प्रयासों के साथ न्यायिक प्रक्रिया में तेजी और दोषियों को सख्त सजा सुनिश्चित की जाए।

यदि हम आज नहीं चेते, तो वह हिमाचल जिसकी पहचान शांति, संस्कृति और सादगी रही है, एक भयभीत समाज में बदल सकता है। अब समय है कि सरकार, न्याय व्यवस्था और समाज — तीनों एक साथ खड़े होकर यह सुनिश्चित करें कि हर बेटी निडर होकर जी सके, पढ़ सके और अपने सपनों को साकार कर सके।

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