शिमला, 20 अक्तूबर 2025/ स्टेट चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश के लिए आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन की संभावनाएँ खुलने जा रही हैं। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) और राज्य सरकार के बीच 13 हजार मेगावाट क्षमता वाले हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लगाने के लिए एमओयू का प्रारूप तैयार हो चुका है। यह केवल एक तकनीकी करार नहीं, बल्कि हिमाचल की आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।
इस परियोजना के तहत कांगड़ा जिले के पौंग बांध (2800 मेगावाट) और भाखड़ा (1500 मेगावाट) को आधुनिक तकनीक से पुनः विकसित किया जाएगा। अनुमानित 65 हजार करोड़ रुपये की यह योजना प्रदेश के युवाओं के लिए रोज़गार, उद्योगों के लिए सस्ती बिजली और राज्य सरकार के लिए स्थायी राजस्व का स्रोत बनेगी।
हालाँकि, ऊर्जा नीति की मौजूदा रॉयल्टी शर्तें (12 से 30%) इस परियोजना की राह में चुनौती बन सकती हैं। यहाँ राज्य सरकार को संतुलित नीति अपनाने की आवश्यकता होगी—ऐसी जो निवेशकों को आकर्षित करे, पर राज्य के हिस्से का न्यायसंगत लाभ भी सुनिश्चित रखे।यदि 31 अक्तूबर की बैठक में अंतिम सहमति बन जाती है, तो हिमाचल देश का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर उत्पादक राज्य बनकर उभर सकता है।
यह परियोजना न केवल हिमालय की नदियों की शक्ति को उपयोग में लाएगी, बल्कि “हरित ऊर्जा” के क्षेत्र में हिमाचल को राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदान करेगी।यह पहल हिमाचल को “ऊर्जा निर्यातक राज्य” के रूप में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकती है।

