शिमला/ 09/10/2025/ चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने 09 अक्टूबर 2025 को शिमला से जारी बयान में कहा कि एचपीपीसीएल के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत के मामले में सुक्खू सरकार की भूमिका संदेह से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सीबीआई जांच को प्रभावित करने के लिए हर संभव हथकंडा अपना रही है। ठाकुर ने कहा कि यह देश का पहला मामला है, जब किसी चीफ इंजीनियर की मौत की जांच में सरकार सहयोग करने के बजाय जांच प्रक्रिया में बाधा डाल रही है। न्यायालय के आदेशों के बावजूद सरकार द्वारा जांच में दखल देना लोकतंत्र और कानून की मूल भावना के खिलाफ है।
सवाल उठते हैं संरक्षण और लापरवाही पर जयराम ठाकुर ने कहा कि विमल नेगी की मौत में किन अधिकारियों की गर्दन फंस रही है, यह सवाल अब हर ओर गूंज रहा है। मुख्यमंत्री और उनके संरक्षण में काम करने वाले अधिकारी नियमों की धज्जियां उड़ाकर जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। प्रदेशवासियों की नजरें सीधे मुख्यमंत्री और उनके अधीनस्थ अधिकारियों पर हैं। ठाकुर ने कहा कि पहले जहां दाल में काला था, अब पूरी दाल ही काली नजर आ रही है। सरकार का बेसब्री से मामले को दबाने और बार-बार झूठ बोलने का रवैया इस बात की पुष्टि करता है कि इसमें सरकार की भी भागीदारी है।
पेन ड्राइव फॉर्मेट और पुलिस की भूमिका नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सीबीआई की जांच के दौरान कुछ अधिकारियों ने नियमों का उल्लंघन कर पेन ड्राइव फॉर्मेट कर दिया, जो विमल नेगी के पास मौजूद सबसे अहम सबूत था। इस मामले में एक पुलिसकर्मी जेल में है। यह साबित करता है कि प्रदेश की पुलिस स्वयं जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाने की स्थिति में नहीं है। ठाकुर ने कहा कि विमल नेगी की मौत से जुड़े कई राज पुलिस ने अपने आकाओं को बचाने के लिए दफन कर दिए, जिनकी सच्चाई अब न्यायालय और सीबीआई के सामने उजागर हो रही है।
न्यायपालिका और मुख्यमंत्री के वादे:जयराम ठाकुर ने याद दिलाया कि जब विमल नेगी का शव मिला, तब उनके परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में आश्वासन दिया कि जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। इसके बावजूद, नियमों और प्रक्रियाओं की धज्जियां उड़ाकर जांच में बाधा डाली गई। न्यायालय ने जब सरकार और शिमला पुलिस के रवैये को देखा, तो सीबीआई जांच का आदेश दिया और स्पष्ट निर्देश दिए कि हिमाचल से जुड़े अधिकारी इस जांच में शामिल नहीं होंगे। ठाकुर ने कहा कि यह आश्वासन झूठा साबित हुआ और सरकार ने जांच में सहयोग देने की बजाय अड़चनें उत्पन्न कीं।
आरोपों का जाल और जिम्मेदारी: नेता: प्रतिपक्ष ने कहा कि विमल नेगी की मौत में साजिश के तार बहुत गहरे हैं और यह मामला उच्च पदों से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने आरोपियों को न तो दंडित किया और न ही महत्वपूर्ण पदों से हटा पाया। वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी और नियमों की अनदेखी ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है। ठाकुर ने कहा कि जिन अधिकारियों ने नियम और कानून की अवहेलना की, उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरकार की यह लापरवाही पूरे प्रदेश के न्याय और प्रशासनिक ढांचे को संकट में डाल रही है।
सीबीआई जांच और जेल की संभावना :जयराम ठाकुर ने कहा कि जिस तरह से कुछ अधिकारी सीबीआई जांच में हस्तक्षेप कर रहे हैं, उससे लगता है कि जेल की राह कई लोगों के लिए तय है। जांच अधिकारियों द्वारा पेन ड्राइव फॉर्मेट करने जैसे गंभीर मामलों से स्पष्ट है कि जांच पर दबाव डाला गया। प्रदेश पुलिस ने खुद इस घटना की स्वीकारोक्ति की है। ठाकुर ने कहा कि यह सिर्फ एक उदाहरण है और विमल नेगी की मौत में कई गहरे और उच्च स्तरीय राज दफन किए गए हैं।
जवाबदेही :नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी दी कि इस मामले में संपूर्ण सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों को कानूनी कार्रवाई के तहत दंडित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक सत्ता का अहंकार और झूठ के सहारे सरकार ने अपने संरक्षण में काम करने वाले अधिकारियों की रक्षा की है। ठाकुर ने जोर देकर कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर प्रदेश में जो व्यवस्था पतन का दौर चल रहा है, उसे समाप्त करना आवश्यक है। विमल नेगी की मौत के मामले में सभी गहराई से जुड़े तार उजागर होने चाहिए और उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों को न्याय के कटघरे में खड़ा होना चाहिए।

