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पौंग बांध का जलस्तर बढ़ा, आउटफ्लो 55 हजार क्यूसेक तक बढ़ेगाखतरे का निशान 1390 फीट से 3 फीट ऊपर, इनफ्लो 89,314 क्यूसेक, आउटफ्लो नियंत्रित

RamParkash Vats
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कांगडा 15/09/2025 चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल

पौंग बांध का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। रविवार शाम 5 बजे जलस्तर 1391.90 फीट और इनफ्लो 1,32,755 क्यूसेक दर्ज किया गया था। सोमवार सुबह 7 बजे यह 1392.51 फीट और 72,452 क्यूसेक, दोपहर 12 बजे 1392.87 फीट और 1,25,091 क्यूसेक, जबकि दोपहर 2 बजे 1393.05 फीट और 1,10,026 क्यूसेक तक पहुँच गया। खतरे का निशान 1390 फीट है। जो की खतरे के निशान से तीन फिट से भी ऊपर है

आउटफ्लो में बदलाव – बांध से पानी का नियंत्रित प्रबंधन

बीबीएमबी के अनुसार रविवार को बांध का आउटफ्लो 49,855 क्यूसेक था। सोमवार दोपहर 4 बजे नवीनतम आंकड़ों के अनुसार जलस्तर 1393.16 फीट, इनफ्लो 89,314 क्यूसेक और आउटफ्लो 51,652 क्यूसेक दर्ज हुआ। प्रशासन ने बताया कि आउटफ्लो को नियंत्रित रखते हुए बांध से पानी धीरे-धीरे छोड़ा जा रहा है और सोमवार दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक इसे 55,000 क्यूसेक तक बढ़ाया जाएगा।

उपायुक्त हेमराज बैरवा कहा – सुरक्षा और राहत पर प्रशासन की पूरी निगरानी

उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने बताया कि फिलहाल बांध से औसतन 40,000 क्यूसेक पानी ही स्पिलवे के माध्यम से छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों पर जमा सिल्ट को जेसीबी से हटाया जा रहा है और प्रभावित घरों का आंकलन कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। मवेशियों के चारे की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। हेमराज बैरवा ने जोर देकर कहा कि प्रशासन सतर्क है और जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा।

फतेहपुर, इंदौरा और निचले मंड क्षेत्र के दर्जनों गाँव प्रभावित हैं। खेतों में खड़ी मक्की और धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं, कई घरों में पानी घुसने से परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के लगातार होने और बांध का जलस्तर बढ़ने से उनका जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। रास्ते, सड़के और खेत सब पानी में डूबे हुए हैं। लोगों की चिंता यह भी है कि अगर बारिश तेज हुई तो उनके घर और मवेशी, दोनों के लिए स्थिति और गंभीर हो सकती है। मौसम विभाग ने 25 सितम्बर के बाद मौसम साफ रहने का अनुमान जताया है, लेकिन फिलहाल ग्रामीण भय में जी रहे हैं और प्रशासन की सतर्कता पर पूरी निगरानी बनाए हुए हैं।

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