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जैन साध्वी ज्ञान मति माता जी के 92वें वर्ष प्रवेश पर महमूदाबाद से जत्था पहुंचा अयोध्या

RamParkash Vats
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महमूदाबाद, सीतापुर 12/09/2025, राज्य चीफ़ ब्यूरो अनुज कुमारजै


जैन साध्वी गणिनी प्रमुख श्री ज्ञान मति माता जी के 92वें वर्ष प्रवेश के उपलक्ष्य में समाजभर में हर्ष और उत्साह का वातावरण है। शरदपूर्णिमा के अवसर पर इस दिन को स्वर्णिम जयंती के रूप में विशेष रूप से मनाने की योजना बनाई गई है। वर्तमान समय में माता जी अयोध्या धाम रायगंज स्थित बड़ी मूर्ति जैन मंदिर में लंबे समय से तप और योग साधना कर रही हैं। उच्च आयु के बावजूद उनकी तपस्या व साधना से प्रेरित होकर समाजजन उन्हें जीवन पथ का मार्गदर्शक मानते हैं।

ज्ञान मति माता जी का जीवन त्याग, साधना और आत्मसंयम का अनूठा उदाहरण है। वे लंबे समय से स्वास्थ्य लाभ हेतु संघर्षरत हैं, फिर भी उनकी आस्था और साधना में कोई कमी नहीं आई है। समाज के श्रद्धालु उन्हें तप, योग और आत्मबल की प्रतिमूर्ति मानते हैं। श्री जी की असीम अनुकम्पा और लाखों लोगों की मंगलकामना से माता जी की जीवन यात्रा 92वें वर्ष में भी निरंतर आगे बढ़ रही है।

माता जी के दर्शन और उनके स्वास्थ्य की मंगलकामना हेतु महमूदाबाद से विशेष जत्था अयोध्या धाम पहुंचा। यह जत्था सागर जैन और संयम जैन के नेतृत्व में बस द्वारा रवाना हुआ। इस जत्थे में जैन समाज के लगभग 60 श्रद्धालु शामिल रहे, जिनमें समाज अध्यक्ष अनुज जैन सहित वरिष्ठजन और युवा वर्ग के लोग भी सम्मिलित थे। श्रद्धालुओं ने माता जी के सानिध्य में आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

श्रद्धालुओं ने रायगंज स्थित बड़ी मूर्ति जैन मंदिर पहुंचकर भगवान आदिनाथ जी के चरणों में पूजा-अर्चना की और माता जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की। इस अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने सामूहिक भजन और स्तुति का आयोजन भी किया। भक्ति रस से ओतप्रोत यह माहौल उपस्थित जनसमूह के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।

जैन समाज की यह पहल न केवल माता जी के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकजुटता और आध्यात्मिक जागरण का भी संदेश देती है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि माता जी के बताए मार्ग पर चलकर आत्मसंयम, त्याग और अहिंसा के सिद्धांतों को अपने जीवन में आत्मसात करेंगे।

आगामी शरदपूर्णिमा पर होने वाले स्वर्णिम जयंती समारोह को लेकर समाज में उत्साह चरम पर है। इस अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम, प्रवचन और भक्ति सभाओं का आयोजन किया जाएगा। जैन समाज के लोग मानते हैं कि माता जी का आशीर्वाद और मार्गदर्शन उनके जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता रहेगा।


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