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लेक्ट्रेट परिसर में बंदरों का आतंक, विकास कार्यों की रफ्तार पर ब्रेक

RamParkash Vats
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सीतापुर/10/04/2026/राज्य चीफ ब्यूरो अनुज कुमार जैन

नपद मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में बंदरों का बढ़ता आतंक अब विकास कार्यों के लिए भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बंदरों की लगातार शरारतों से न केवल आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है, बल्कि लाखों रुपये की लागत से चल रहे निर्माण कार्यों की रफ्तार और गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।

लेक्ट्रेट के पास चल रहे बाउंड्री वॉल के सौंदर्यीकरण कार्य में बंदर लगातार बाधा बन रहे हैं। कभी निर्माण सामग्री को इधर-उधर बिखेर देना तो कभी ताजा किए गए कार्य को उखाड़ देना, इन हरकतों से मजदूरों और ठेकेदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते काम की गति भी धीमी पड़ गई है।
कलेक्ट्रेट आने-जाने वाले लोगों के लिए भी बंदर आफत बने हुए हैं। आए दिन झपट्टा मारकर लोगों के हाथों से सामान छीन लेना, वाहनों की डिग्गी खोलकर सामान निकाल ले जाना जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। इससे परिसर में आने वाले लोगों में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों की बढ़ती संख्या और उनके आक्रामक व्यवहार के कारण समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। लोगों में बढ़ते रोष के बीच अब जिला प्रशासन के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इस समस्या के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
दि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो इसका असर केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम जनजीवन भी प्रभावित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि कलेक्ट्रेट परिसर में बंदरों के इस आतंक पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन कब और किस तरह सख्त कदम उठाता है।

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