52 वर्षीय शिवराम पत्नी, बेटा-बहू और दो नन्हे पोते-पोती मलबे में दब गए। अकेले बचे शिवराम और घायल परिजन अब जिंदगीभर इस गम के साथ जीने को मजबूर हैं।
कुल्लू(Shimla) ,10 अगस्त 2025,राज्य चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
चल प्रदेश के कुल्लू जिले के शमारनी गांव में उस समय मातम पसर गया जब बुधवार को एक ही चिता स्थल पर पांच चिताएं एकसाथ जलीं। इनमें दो मासूम बच्चे भी शामिल थे। आठ सितंबर की रात को आए भूस्खलन ने 52 वर्षीय शिवराम का पूरा परिवार लील लिया। उनकी पत्नी, बेटा-बहू और दो नन्हे पोते-पोती मलबे में दब गए। अकेले बचे शिवराम और घायल परिजन अब जिंदगीभर इस गम के साथ जीने को मजबूर हैं।

आधी रात को तबाही, 10 घंटे चला रेस्क्यू
शनिवार देर रात करीब दो बजे पहाड़ से भारी मलबा गिरा जिसने गांव के दो मकानों को निगल लिया। एनडीआरएफ और स्थानीय लोगों ने लगातार 10 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया और शिवराम की पत्नी, बेटा चुनीलाल, बहू अंजू और बच्चों भूपेश (5) व जागृति (7) के शव निकाले। इस दृश्य को देखकर पूरा गांव दहल उठा।
एक साथ उठी पांच अर्थियां
बुधवार सुबह गांव में जब अंतिम संस्कार की तैयारी हुई तो पूरे शमारनी में चीख-पुकार मच गई। बच्चों की अर्थियां सबसे पहले उठीं और श्मशान घाट तक हर आंख नम रही। उसके बाद बाकी परिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार किया गया। एक साथ पांच चिताएं जलते देख लोग फफक-फफक कर रो पड़े।
अकेले रह गए शिवराम
इस आपदा ने परिवार के मुखिया शिवराम को तोड़ कर रख दिया। वे खुद भी घायल हुए हैं, जबकि उनके छोटे भाई और गांव की एक महिला अस्पताल में इलाजरत हैं। परिजनों का कहना है कि अब शिवराम का जीवन पूरी तरह वीरान हो गया है।
पहाड़ की करुण पुकार
हिमाचल की इन त्रासदियों ने साबित कर दिया है कि आपदा केवल जमीन नहीं खिसकाती, बल्कि पूरे-पूरे घर उजाड़ देती है। शमारनी गांव का गम और मंडी की कृष्णा देवी की चीखें इस बात की गवाही दे रही हैं कि पहाड़ आज भी सुरक्षित नहीं हैं और पीड़ित परिवारों को केवल सांत्वना नहीं, बल्कि ठोस सहारा चाहिए।

