शिमला, न्यूज़ इंडिया आजतक राज्य चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने 229 सरकारी स्कूलों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम प्रदेश के छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले लगभग एक साल से इस विषय पर मंथन चल रहा था, लेकिन औपचारिकताओं के अभाव में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। मंगलवार को शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा हुई। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को सभी जरूरी दस्तावेज और मानक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। अभी यह संभावित सूची है, जिसमें आंशिक बदलाव हो सकता है।
किन जिलों के कितने स्कूल शामिल:-इस सूची में सबसे अधिक कांगड़ा जिले के 41 स्कूल शामिल हैं। इसके बाद शिमला में 34, मंडी में 29, हमीरपुर में 19, सिरमौर में 17, चंबा में 16, सोलन व ऊना में 15-15, कुल्लू और किन्नौर में 12-12, बिलासपुर में 11 और लाहुल-स्पीति में 8 स्कूल प्रस्तावित किए गए हैं।
मंडी जिले के प्रमुख स्कूल:-मंडी जिला शिक्षा हब कहलाता है और यहां से बड़ी संख्या में स्कूल सीबीएसई से जोड़े जाएंगे। इनमें प्रमुख हैं—पीएम रावमापा कन्या जोगिंद्रनगर, रावमापा छात्र सुंदरनगर, बलद्वाड़ा, मंडी, बालीचौकी, बालू, गडागुशैणी, गागल, गुम्मा, हराबाग, करसोग, कटौला, कोट तुंगल, स्यांज, संधोल, सरोआ, थुनाग, धर्मपुर, गोहर, कोटली, पनारसा, पांगणा, रिवालसर, सरकाघाट, सुंदरनगर छात्रा, मंडी कन्या, जंजैहली और कन्रू जोगिंद्रनगर।
बिलासपुर जिले की सूची:-बिलासपुर से जिन स्कूलों को चुना गया है, उनमें शामिल हैं—पीएम श्री जीएसएसएस भराड़ी, घुमारवीं (गर्ल्स), झंडूत्ता, तलाई, जुखाला, कंदरौर, कोठीपुरा, नम्होल, बिलासपुर (गर्ल्स), बरमाणा और बिलासपुर (ब्वायज)।
चंबा जिले के स्कूल:-चंबा जिले से जिन स्कूलों का चयन हुआ है, उनमें शिक्षा खंड गैहरा का जीएसएस लिल्ह, मैहला का जीएसएसएस मैहला, सुंडला तेलका (सालूई), तीसा स्कूल, पीएम श्री राजकीय छात्र विद्यालय चंबा, पांगी का जीएसएसएस सुराल, किलाड़, चुवाड़ी का रायपुर स्कूल, हरदासपुर का रंडोह, सलूणी, हिमगिरी, बेघेईगढ़ व कीड़ी जैसे स्कूल शामिल हैं।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इन स्कूलों के सीबीएसई से जुड़ने के बाद विद्यार्थियों को न केवल बेहतर पाठ्यक्रम और संसाधन मिलेंगे, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए भी मजबूत आधार मिलेगा। यह कदम प्रदेश सरकार की नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

