“नक्सलियों के अंधकार पर सैनिकों की विजय – ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट का पराक्रम”
3. “CRPF, DRG और कोबरा के जवानों ने लिखा स्वर्णिम अध्याय”
4. “शौर्य का शिखर: ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट ने देश को दिया नया आत्मविश्वास
दिल्ली न्यूज इंडिया आजतक, संपादक राम प्रकाश वत्स
कर्रेगुट्टालु पहाडी पर संपन्न हुआ अपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ भारतीय सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और पराक्रम का जीवंत प्रतीक है। यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि उस जज़्बे और समर्पण की गाथा है जिसने देश को नक्सलवाद के खिलाफ एक नया आत्मविश्वास दिया।इस अभियान में CRPF, छत्तीसगढ़ पुलिस, DRG और कोबरा बटालियन के वीर जवानों ने असाधारण शौर्य का प्रदर्शन किया। तपती गर्मी, ऊँचाई की कठिनाई और हर कदम पर छिपे
IED के खतरों के बावजूद जवानों ने हिम्मत नहीं हारी। दुर्गम कर्रेगुट्टालु पहाड़ी पर बने नक्सलियों के ठिकाने, हथियारों के जखीरे और सप्लाई चेन को ध्वस्त कर उन्होंने साबित कर दिया कि भारतीय सुरक्षा बल किसी भी चुनौती को मात देने में सक्षम हैं।‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ को अब तक का सबसे बड़ा नक्सलविरोधी अभियान माना जा रहा है।
जिस साहस के साथ जवानों ने इस मिशन को अंजाम दिया, वह नक्सलविरोधी संघर्ष के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने स्वयं वीर जवानों से मिलकर उन्हें सम्मानित किया और कहा कि यह पराक्रम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।नक्सलियों ने वर्षों तक विकास को रोककर गरीब और आदिवासी जनता के अधिकारों को कुचला था। लेकिन इस ऑपरेशन ने उस अंधेरे पर निर्णायक प्रहार किया।
पशुपतिनाथ से लेकर तिरुपति तक फैले साढ़े छह करोड़ लोगों के जीवन में अब एक नया सूर्योदय दिखाई दे रहा है। स्कूल, अस्पताल और विकास की धारा अब निर्भय होकर इन इलाकों में प्रवाहित हो सकेगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त कर दिया जाएगा। वीर जवानों का बलिदान और साहस इस लक्ष्य की आधारशिला है। सचमुच, ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ केवल एक सैन्य विजय नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों की शौर्यगाथा है, जो देशवासियों के हृदयों में सदैव गूंजती रहेगी।

