शिमला,01/09/2025,राज्य चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल :हिमाचल प्रदेश को औपचारिक रूप से आपदा प्रभावित राज्य घोषित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को विधानसभा में यह ऐलान किया। यह निर्णय न केवल वर्तमान आपदा से जूझते प्रदेश के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि भविष्य में पुनर्निर्माण और विकास की दिशा भी तय करेगा।
भारी नुकसान, लेकिन हौसला बरकरार
लगातार बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने प्रदेश के कई जिलों—चम्बा, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, मंडी, शिमला, कांगड़ा और हमीरपुर—को गहरी चोट दी है। अब तक 320 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और लगभग तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की क्षति का अनुमान है। यह नुकसान केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक और भावनात्मक भी है। फिर भी हिमाचल की जनता अपने साहस और एकजुटता से मिसाल पेश कर रही है।
सीएम का राष्ट्रीय संदेश
मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि यह संकट केवल हिमाचल का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र का है। उन्होंने कहा—“पहाड़ केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि जीवन और सुरक्षा के स्तंभ हैं। ग्लोबल वार्मिंग का सबसे ज्यादा असर पहाड़ी राज्यों पर पड़ता है। समय रहते जागरूकता और कार्रवाई हमारी सबसे बड़ी ज़रूरत है।”सीएम ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि अंधाधुंध निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने जैसे ठोस कदम उठाए जाएँ। यह संदेश हिमाचल को बचाने के साथ-साथ अन्य पहाड़ी राज्यों के लिए भी चेतावनी है।
जनता और प्रशासन की भूमिका
इस आपदा में हिमाचल की जनता ने साहस और सहयोग की अनोखी मिसाल पेश की है। कर्मचारी, पुलिस और प्रशासनिक अमला दिन-रात राहत और बचाव कार्यों में जुटा है। कठिन परिस्थितियों में भी हर कोई प्रदेश को संभालने और फिर से खड़ा करने की जिम्मेदारी निभा रहा है।
हिमाचल के लिए आगे का रास्ता
हिमाचल प्रदेश को आपदा प्रभावित घोषित किए जाने से केंद्र और अन्य राज्यों से सहयोग के रास्ते खुलेंगे। राहत और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन और वित्तीय मदद अब और सशक्त रूप में उपलब्ध हो सकेगी।यह निर्णय हिमाचल के भविष्य की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है। यह केवल पुनर्निर्माण का अवसर नहीं, बल्कि सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन की ओर नया अध्याय भी है।

