शिमला, 25/08/2025, राज्य चीफ़ ब्यूरो विजय समयाल
सुधीर शर्मा का सीधा निशाना यह है कि मुख्यमंत्री और कांग्रेस सरकार झूठ बोलकर जनता को भ्रमित कर रही है और सदन को गुमराह करने का काम कर रही है।
यह मामला स्पष्ट रूप से भाजपा बनाम कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई के तौर पर सामने आ रहा है, खासकर रोजगार और गारंटियों के वादों को लेकर। विधायक सुधीर शर्मा ने जिस तरह से विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस भेजा है, उसे भाजपा कांग्रेस सरकार की झूठी घोषणाओं और गुमराह करने वाले बयानों के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है।
भाजपा का हमलाभाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार बार-बार विधानसभा और जनता से झूठे वादे कर रही है। उदाहरण के लिए–हर बजट सत्र में रोजगार के आंकड़े अलग-अलग दिए गए (कभी 34 हजार, कभी 25 हजार, तो कभी 23 हजार)।आदर्श स्वास्थ्य संस्थान की घोषणा बार-बार हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर एक भी संस्था खड़ी नहीं हुई।पेट-स्कैन मशीन लगाने की घोषणा हर बजट में की गई, लेकिन आज तक ये सुविधा प्रदेश को नहीं मिली।आपदा राहत राशि और मुआवजा वितरण के आंकड़े भी अस्पष्ट और विरोधाभासी बताए जा रहे हैं।
सुधीर शर्मा का सीधा निशाना यह है कि मुख्यमंत्री और कांग्रेस सरकार झूठ बोलकर जनता को भ्रमित कर रही है और सदन को गुमराह करने का काम कर रही है।कांग्रेस सरकार की स्थितिकांग्रेस का दावा है कि राज्य की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद सरकार लगातार रोजगार देने और राहत पहुंचाने की कोशिश कर रही है।मुख्यमंत्री सुक्खू और उनकी टीम यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा मुद्दों से हटकर सिर्फ प्रचार और राजनीतिक प्रपंच कर रही है।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने भी बयान देते हुए संकेत दिया कि यदि आरोप बेबुनियाद पाए गए तो विधायक के खिलाफ संविधान और नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है। यानी कांग्रेस सरकार अपनी स्थिति बचाने की रणनीति अपना रही है।राजनीतिक मायनेभाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस को जवाबदेही के कठघरे में खड़ा करना चाहती है, ताकि जनता में यह संदेश जाए कि वर्तमान सरकार केवल घोषणाबाजी तक सीमित है।कांग्रेस इसे भाजपा का राजनीतिक स्टंट बताकर, जनता के बीच रोजगार और राहत कार्यों की अपनी उपलब्धियों का हवाला देने की तैयारी करेगी।
आने वाले समय में यह मामला कांग्रेस सरकार के लिए मुश्किल खड़ा कर सकता है, क्योंकि यदि आंकड़ों की सच्चाई पर सवाल उठते रहे तो जनता के विश्वास पर आंच आ सकती है।। कुल मिलाकर यह विवाद आने वाले महीनों में भाजपा के लिए कांग्रेस पर हमला करने का बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है, खासकर रोजगार और जनता से किए गए वादों को लेकर।

