Reading: लेकिन जो बात सबसे अहम और चौंकाने वाली रही—वो यह थी कि वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति उन नोटों को उठाने आगे नहीं आया। बल्कि जिसने जैसे ही हालात समझे, पुलिस को सूचना दी।

लेकिन जो बात सबसे अहम और चौंकाने वाली रही—वो यह थी कि वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति उन नोटों को उठाने आगे नहीं आया। बल्कि जिसने जैसे ही हालात समझे, पुलिस को सूचना दी।

RamParkash Vats
3 Min Read
बिखरे हुए नोट

शिमला के रिज मैदान पर दिल्ली से आए एक व्यक्ति ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास अचानक करीब 19 हजार रुपये नोटों के रूप में हवा में उड़ा दिए।नोट देखने के बावजूद किसी भी राहगीर या पर्यटक ने उन्हें उठाने की लालच नहीं दिखाई, बल्कि पुलिस को सूचित किया।पुलिस ने मौके से नोट इकट्ठा कर उस शख्स को हिरासत में लिया।

शिमला,22/23अगस्त2025 न्यूज़ इंडिया आजतक, सूत्र शिमला का रिज मैदान, हमेशा पर्यटकों की भीड़ और सैरगाहों की रौनक के लिए चर्चा में रहता है। लेकिन शुक्रवार को यहां का नज़ारा कुछ अलग ही था। महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास अचानक करंसी नोटों की बारिश होने लगी। नोट उड़ते ही लोगों की निगाहें आकाश की ओर उठीं, कैमरों ने चालू होते ही इस नजारे को कैद करना शुरू कर दिया।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति पर काबू पाया, सड़क पर गिरे सारे नोट समेटे और उस शख्स को हिरासत में लिया जिसने यह करतूत की थी। बाद में पूछताछ में सामने आया कि दिल्ली से आया यह व्यक्ति दोस्तों के साथ घूमने निकला था और उसने तकरीबन 19 हजार रुपये 50, 100 और 200 के नोटों के रूप में ‘टक्का बेंच’ से महात्मा गांधी प्रतिमा के पास उड़ा दिए।

उसका कहना था कि वह यह पैसे ज़रूरतमंदों की मदद के लिए लेकर आया था। लेकिन जब उसे कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला, तो उसने नोट उड़ाकर ‘दान’ करने का यह तरीका अपना लिया। हैरत की बात यह भी रही कि उसके दोस्तों ने पुलिस को बताया कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है और इस तरह की हरकतें वह समय-समय पर करता रहता है।

पुलिस ने समझाइश देकर उसे उसकी रकम वापस कर दी और आगे ऐसा न करने की हिदायत के साथ मामला समाप्त किया।

यह घटना न केवल शिमला की सैरगाह पर चर्चा का विषय बनी रही, बल्कि यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि क्या यह दान का भाव है या मानसिक सनक? और सबसे महत्वपूर्ण— भीड़ के नैतिक निर्णय का यह उदाहरण, जब किसी ने निजी स्वार्थ में पड़कर नोट नहीं बटोरे, बल्कि सही कदम उठाते हुए पुलिस को खबर दी।

👉 यह घटना एक संकेत है—दान करने के कई रास्ते हैं, लेकिन करंसी को सड़कों पर उड़ा देना न तो मदद है, न ही समाज के लिए लाभकारी।

Share This Article
Leave a comment
error: Content is protected !!