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पौंगबांध में क्रूज योजना ठंडे बस्ते में, पर्यटन को मिलेगा शिकारा और पैडलबोट का सहारा

RamParkash Vats
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कांगड़ा के पौंग बांध में बिलासपुर की गोबिंदसागर झील की तर्ज पर क्रूज चलाने का सपना फिलहाल असफल साबित हो रहा है। पर्यटन विकास विभाग के उपनिदेशक विनय धीमान ने स्पष्ट किया है कि क्रूज सेवा शुरू करने के लिए आवश्यक जलक्षेत्र की कमी और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की कड़ाई के कारण क्रूज या मिनी क्रूज सुविधा को साकार नहीं किया जा सकता। इस बाधा के चलते यहां अब केवल शिकारा और पैडल बोट चलाने की अनुमति दी गई है, जो 15 सितंबर से पर्यटकों के लिए उपलब्ध होगी।

पौंग बांध का बड़ा हिस्सा वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में आता है, जहां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी व्यावसायिक गतिविधि पर रोक है। यही नहीं, बांध के आसपास की अधिकतर जमीन भी प्रदेश सरकार के पास नहीं है, बल्कि भाखड़ा बांध प्रबंधन बोर्ड के अधीन है। इससे पर्यटन विभाग के लिए बड़े पैमाने पर क्रूज संचालन की तकनीकी व कानूनी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

हालांकि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बिलासपुर की सफलता को देखते हुए कांगड़ा में भी पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु व्यापक योजना बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन वन संरक्षण नियमों और पर्यावरण सुरक्षा की मजबूती के चलते क्रूज सुविधाओं को प्रारंभिक मंजूरी नहीं मिल पाई। इस कारण विभाग ने पारंपरिक और पर्यावरण के अनुकूल शिकारा एवं पैडल बोट को ही प्राथमिकता दी है, ताकि पर्यटकों को प्रकृति के बीच सुकूनदायक अनुभव मिल सके।

पर्यटन विकास विभाग ने संबंधित कंपनियों के साथ शिकारा संचालन के अनुबंध और औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं और 15 सितंबर से पौंग बांध पर इस सेवा का शुभारंभ किया जाएगा। सरकार इस मामले को उच्च स्तर पर भी उठा रही है, और यदि भविष्य में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की शर्तों के भीतर क्रूज संचालन की अनुमति मिल जाती है तो वहां क्रूज सुविधा भी शुरू की जाएगी।

कुल मिलाकर, पर्यावरण सुरक्षा और कानूनी बाधाओं के कारण पौंग बांध में बहुप्रतीक्षित क्रूज योजना फिलहाल धरातल पर नहीं उतर पाई है। हालांकि, शिकारा और पैडल बोट जैसी पारंपरिक एवं सुरक्षित जलयात्रा विकल्पों के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। इससे न केवल पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इस उदाहरण से साफ है कि पर्यटन एवं पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाना कितना जरूरी है, और इसी संतुलन को ध्यान में रखकर ही योजनाएं बनानी चाहिए। उम्मीद है, समय के साथ तकनीकी सुधार और नियमों में सौम्यता आने पर पौंग बांध में क्रूज जैसी आधुनिक पर्यटन सेवाएं भी देखने को मिलेंगी। तब तक पर्यटकों को शिकारे की सवारी से ही संतोष करना होगा।

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