नूरपुर से विनय महाजन-नूरपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के बौड़ नूरपुर आश्रम में साप्ताहिक आध्यात्मिक सत्संग कार्यक्रम श्रद्धा एवं उल्लास के साथ आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में संत-महापुरुषों की अमूल्य वाणी के माध्यम से गुरु की महिमा एवं आध्यात्मिक जीवन में गुरु की सर्वोच्च भूमिका पर प्रकाश डाला गया।कार्यक्रम का शुभारंभ संत सहजो बाई जी की पावन वाणी “हरि तजूं गुरु ना विसारूं” के भावपूर्ण गायन महात्मा अश्विनी जी द्वारा किया गया, इस पंक्ति के माध्यम से संत महात्माओं ने गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा एवं समर्पण का संदेश दिया है।

भजन गायन के पश्चात दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी हरिशानंद जी ने आध्यात्मिक प्रवचनों की अमृत वर्षा करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं को गुरु महिमा के वास्तविक स्वरूप से परिचित करवाया।स्वामी जी ने कहा कि भारतीय अध्यात्म में गुरु को सर्वोच्च स्थान प्रदान किया गया है। संत-महापुरुषों ने गुरु की महिमा का गुणगान करते हुए स्पष्ट किया है कि गुरु केवल सांसारिक शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि शिष्य के जीवन को अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाने वाली दिव्य सत्ता है। गुरु ही शिष्य के जीवन में आध्यात्मिक प्रकाश का संचार कर उसे उसके वास्तविक लक्ष्य से परिचित करवाते हैं।उन्होंने संत सहजो बाई जी की वाणी का भाव स्पष्ट करते हुए कहा कि एक सच्चे शिष्य के जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरि होता है।

संसार में मनुष्य अनेक रिश्ते-नाते बनाता है और अनेक प्रकार के सहारे खोजता है, लेकिन आध्यात्मिक मार्ग पर उसे सही दिशा प्रदान करने वाला पूर्ण गुरु ही होता है। गुरु की कृपा से ही जीव परमात्मा के वास्तविक स्वरूप को जानने और अनुभव करने की दिशा में अग्रसर होता है।स्वामी जी ने कहा कि आज मनुष्य बाहरी सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, लेकिन आंतरिक शांति से दूर होता जा रहा है। इसका वास्तविक समाधान केवल बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति में निहित है। जब मनुष्य को पूर्ण गुरु की कृपा से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति होती है, तभी उसके जीवन में वास्तविक आध्यात्मिक परिवर्तन आता है।उन्होंने कहा कि गुरु सत्ता शिष्य के जीवन का कल्याण करते हुए उसे अज्ञानता, अहंकार एवं विकारों से ऊपर उठने की प्रेरणा देती है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को गुरु के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण रखते हुए उनके बताए आध्यात्मिक मार्ग पर चलना चाहिए।
कार्यक्रम में भजन-कीर्तन एवं आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं ने आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त की। उपस्थित संगत ने गुरु महिमा के संदेश को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का वातावरण पूर्णतः भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

