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एनएसएस शिविर में नशे के दुष्प्रभावों और टीबी मुक्त भारत अभियान पर किया जागरूक

RamParkash Vats
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घाड़ जरोट स्कूल में स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सुभाष चंद ने विद्यार्थियों को दी स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी

घाड़ जरोट। खंड चिकित्सा अधिकारी नगरोटा सूरियां डॉ. अमन दुआ के आदेशानुसार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला घाड़ जरोट में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) शिविर के तीसरे दिन स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल के प्रधानाचार्य सुभाष चंद ने की, जबकि खंड स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सुभाष चंद ने रिसोर्स पर्सन के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एनएसएस युवाओं में सेवा भावना, भाईचारे, आपसी मेल-मिलाप और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके माध्यम से विद्यार्थी समुदाय की आवश्यकताओं को समझने, नेतृत्व कौशल विकसित करने और सामाजिक समस्याओं के समाधान में योगदान देने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करें और लोगों को जागरूक करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

स्वास्थ्य पर्यवेक्षक ने अपने संबोधन में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और इसके दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, गुटखा, खैनी, भांग, शराब, अफीम, चिट्टा, नशीली दवाइयों और नशीले इंजेक्शनों का सेवन व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है। तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से मुंह, फेफड़ों तथा अन्य अंगों के कैंसर सहित हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को कोटपा अधिनियम, 2003 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान, शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री तथा नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर कानूनी प्रतिबंध और दंड के प्रावधान हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षण संस्थान को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। विद्यार्थियों से आग्रह किया गया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें।

कार्यक्रम के दौरान टीबी मुक्त भारत अभियान के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। सुभाष चंद ने बताया कि शाम के समय बुखार आना, लगातार खांसी रहना, बलगम में खून आना, वजन कम होना, छाती में दर्द और अत्यधिक थकावट जैसे लक्षण क्षय रोग (टीबी) के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए स्वास्थ्य संस्थान में जांच करवानी चाहिए। उन्होंने बताया कि चिकित्सकीय सलाह के अनुसार बलगम की जांच, छाती का एक्स-रे और उपलब्ध आधुनिक जांच विधियों के माध्यम से टीबी की पहचान की जा सकती है। समय पर रोग का पता चलने और चिकित्सकीय निर्देशों के अनुसार दवा का पूरा कोर्स करने से इस बीमारी का उपचार संभव है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और उपचार की दवाइयां निःशुल्क उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को एचआईवी-एड्स, प्राथमिक उपचार, व्यक्तिगत स्वच्छता, मानसिक स्वास्थ्य, संतुलित पोषण और एनीमिया से बचाव के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

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