भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद पत्रकार वार्ता में बोले अकिल बख्शी—मातृ-शिशु अस्पताल और रोगी कल्याण समिति की दोनों मांगें मानी गईं

नूरपुर। नूरपुर सिविल नागरिक अस्पताल परिसर में लंबे समय से बंद पड़े मातृ-शिशु अस्पताल को शुरू करने तथा रोगी कल्याण समिति में इसे शामिल किए जाने की मांग को लेकर पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अकिल बख्शी की छह दिन से जारी भूख हड़ताल प्रशासन के साथ सहमति बनने के बाद बीती रात समाप्त हो गई। प्रशासन से समय लेने के बाद अस्पताल परिसर छोड़ने से पूर्व अकिल बख्शी ने पत्रकार वार्ता को संबोधित किया।
अकिल बख्शी ने कहा कि उनकी आंदोलन की दोनों प्रमुख मांगों को सरकार और प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि मातृ-शिशु अस्पताल को शुरू करवाना उनकी प्राथमिकता रही है और इसी उद्देश्य से उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया। रोगी कल्याण समिति में शामिल किए जाने की मांग को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके पीछे किसी प्रकार का व्यक्तिगत या आर्थिक लाभ लेना उद्देश्य नहीं है, बल्कि अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना और उपलब्ध संसाधनों का जनहित में प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।
पत्रकार वार्ता के दौरान अकिल बख्शी ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नारे और प्रयासों की सराहना की। हालांकि उन्होंने कहा कि नूरपुर में व्यवस्था परिवर्तन की तस्वीर अभी पूरी तरह दिखाई नहीं दे रही है और यहां कई स्तरों पर कमियां मौजूद हैं, जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का लाभ आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचना चाहिए।
उन्होंने मौजूदा विधायक और पूर्व विधायक की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता की समस्याओं को उठाना और उनका समाधान करवाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नूरपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था और लंबे समय से लंबित जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से काम किया जाएगा।अकिल बख्शी ने छह दिन चले आंदोलन के दौरान सहयोग देने वाले मीडिया कर्मियों, स्थानीय लोगों और सामाजिक संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनसहयोग ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

