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घार पंचायत में नशे के खिलाफ जनभागीदारी को मिला बल

RamParkash Vats
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“नशा मुक्त नूरपुर, चिट्टा मुक्त नूरपुर” अभियान की 9वीं कड़ी में ग्रामीणों से सीधा संवाद

नशा मुक्त नूरपुर, चिट्टा मुक्त नूरपुर” अभियान अब पंचायत स्तर पर लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। 20 सितंबर 2026 से शुरू हुए 60 दिवसीय अभियान के तहत घार पंचायत में अभियान की 9वीं कड़ी आयोजित की गई। इस दौरान अभियान से जुड़े लोगों ने पंचायतवासियों के साथ खुले माहौल में संवाद करते हुए नशे की समस्या, इसके बढ़ते प्रभाव और युवाओं को इससे दूर रखने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की

अभियान के दौरान ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर पर नशे से जुड़ी अपनी चिंताएं, अनुभव और सुझाव साझा किए। चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार, पंचायत और समाज को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। अभियान का उद्देश्य लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ नशे के खिलाफ सामूहिक जनभागीदारी को मजबूत करना है।

कार्यक्रम में पंचायत उपप्रधान अवतार सिंह डडवाल, पूर्व प्रधान कमल सिंह (गोला), मनोहर लाल और यकूब खान सहित स्थानीय लोगों ने सहभागिता की। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कहा कि नशे के खिलाफ चल रही मुहिम को गांव-गांव तक पहुंचाने और इसे निरंतर जारी रखने की जरूरत है। लोगों की भागीदारी को इस अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना गया।

आईडिया ऑफ भारत फाउंडेशन के अध्यक्ष राहुल शर्मा ने कहा कि अभियान की सबसे बड़ी ताकत आम लोगों की भागीदारी है। उन्होंने कहा कि जब पंचायत स्तर पर लोग स्वयं आगे आकर नशे के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो जागरूकता को व्यापक जनसमर्थन मिलता है और सकारात्मक सामाजिक बदलाव की दिशा मजबूत होती है।

राहुल शर्मा ने बताया कि अभियान के आगामी चरणों में युवाओं के साथ सीधे संवाद, खेलकूद और अन्य सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि “नशा मुक्त नूरपुर, चिट्टा मुक्त नूरपुर” केवल एक अभियान नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ समाज की सामूहिक भागीदारी और जिम्मेदारी का संकल्प है।

घार पंचायत में आयोजित कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन तक सीमित नहीं रह सकती। परिवार, पंचायत, सामाजिक संगठन और आम नागरिक जब एक मंच पर आकर जागरूकता की पहल करते हैं, तो अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलती है।

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