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इंदौरा में पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मान समारोह से सियासी संदेश, सरकार ने विकास और हिमाचल के अधिकारों को बनाया मुद्दा

RamParkash Vats
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हिमाचल के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार ने मजबूती से लड़ी लड़ाई: अनुराग शर्मा

नूरपुर विकास खंड इंदौरा की 58 ग्राम पंचायतों के नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण एवं सम्मान समारोह ने शनिवार को विकास के साथ-साथ क्षेत्र की राजनीति को भी नई चर्चा दे दी। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा मुख्यातिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि पूर्व विधायक सतपाल रायजादा और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव यशवंत खन्ना विशेष रूप से उपस्थित रहे। इंदौरा के विधायक मलेंद्र राजन ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में भाग लिया। बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच सरकार की योजनाओं, ग्रामीण विकास और हिमाचल के अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो पंचायत प्रतिनिधियों का यह मंच इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश की राजनीति में ग्रामीण मतदाता और पंचायत स्तर का संगठन चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के सम्मान और प्रशिक्षण के बहाने सरकार की उपलब्धियों को गांव-गांव तक पहुंचाने का संदेश भी सामने आया। कार्यक्रम में सत्ता पक्ष की ओर से ‘व्यवस्था परिवर्तन’ को सरकार की कार्यशैली का आधार बताते हुए यह तर्क रखा गया कि पिछले करीब तीन वर्ष नौ माह के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों के लिए योजनाएं लागू की गई हैं। अनाथ बच्चों, विधवा महिलाओं, एकल महिलाओं, किसानों, बागवानों और युवाओं से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार की सामाजिक एवं ग्रामीण नीतियों को रेखांकित किया गया।

राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने अपने संबोधन में प्रदेश सरकार की आर्थिक और विकास संबंधी उपलब्धियों को प्रमुख राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने रखा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाना है और इसके लिए प्रदेश के संसाधनों तथा अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार, 16वें वित्त आयोग द्वारा वर्ष 1952 से प्रदेश को मिल रही आरडीजी राशि को बंद किए जाने के बावजूद सरकार ने वित्तीय चुनौतियों के बीच प्रदेश को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। उन्होंने कड़छम-वांगतू परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल का मुफ्त बिजली हिस्सा 12 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हुआ है, जिससे प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की बात कही गई। इसी तरह वाइल्डफ्लावर हॉल मामले में कानूनी लड़ाई के परिणामस्वरूप प्रदेश के खजाने में लगभग 450 करोड़ रुपये आने और भविष्य में करीब 20 करोड़ रुपये वार्षिक आय होने का दावा किया गया। किशाऊ बांध परियोजना से भी प्रदेश को लगभग 600 करोड़ रुपये सालाना आय की संभावना का उल्लेख किया गया। राजनीतिक रूप से इन आंकड़ों का इस्तेमाल सरकार की उस नीति को स्थापित करने के लिए किया गया जिसमें प्रदेश के प्राकृतिक एवं आर्थिक संसाधनों पर राज्य के अधिकार को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है। वहीं भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से लंबित करीब 7,200 करोड़ रुपये, चंडीगढ़ में हिमाचल के 7.19 प्रतिशत हिस्से, शानन परियोजना, बीबीएमबी परियोजनाओं और वाटर सेस जैसे मुद्दों का जिक्र कर यह संकेत दिया गया कि आने वाले समय में ‘हिमाचल के अधिकार’ प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बने रह सकते हैं।

कार्यक्रम में आर्थिक विकास के आंकड़ों को भी सरकार की राजनीतिक उपलब्धियों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। अनुराग शर्मा ने कहा कि वर्ष 2022-23 में हिमाचल की प्रति व्यक्ति आय 2 लाख 14 हजार 952 रुपये थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2 लाख 83 हजार 626 रुपये हो गई है। उन्होंने वर्ष 2032 तक हिमाचल को देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने का लक्ष्य सामने रखा। हालांकि इन आंकड़ों और दावों का वास्तविक मूल्यांकन करते समय सरकारी आंकड़ों, बजट दस्तावेजों तथा स्वतंत्र आर्थिक आकलनों को भी साथ देखना महत्वपूर्ण होगा। कार्यक्रम में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया और पंचायत प्रतिनिधियों को सरकार तथा आम जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया। राजनीतिक रूप से पंचायत स्तर पर यह संदेश महत्वपूर्ण है क्योंकि गांवों में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, सड़क, पेयजल, बिजली, सिंचाई, रोजगार और अन्य स्थानीय विकास कार्य सीधे मतदाताओं के अनुभव को प्रभावित करते हैं। ऐसे में नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को सरकार की योजनाओं की जानकारी देना केवल प्रशासनिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे सरकार की नीतियों को जमीनी स्तर पर प्रचारित और लागू करने की राजनीतिक क्षमता भी मजबूत हो सकती है। समारोह में कांग्रेस से जुड़े नेताओं की मौजूदगी ने भी कार्यक्रम को राजनीतिक संदर्भ प्रदान किया। पूर्व विधायक सतपाल रायजादा, प्रदेश कांग्रेस महासचिव यशवंत खन्ना और इंदौरा विधायक मलेंद्र राजन की उपस्थिति से यह संकेत गया कि पार्टी संगठन पंचायत स्तर पर अपनी पकड़ और संवाद को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय है।

इंदौरा की राजनीति के लिहाज से यह कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंचायत स्तर के नए प्रतिनिधि आने वाले वर्षों में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाले प्रमुख चेहरे होंगे। विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की प्राथमिकता, सरकारी योजनाओं का लाभ, पंचायतों को मिलने वाली धनराशि और स्थानीय समस्याओं के समाधान जैसे मुद्दे सीधे तौर पर जनता के बीच राजनीतिक चर्चा का आधार बनते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों को विकास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण भागीदार बताना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से अहम है। कार्यक्रम में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने प्रशासन तथा पंचायत संस्थाओं के बीच समन्वय का संदेश भी दिया। एएसपी धर्म चंद वर्मा, एसडीएम डॉ. सुरेंद्र ठाकुर, खंड विकास अधिकारी सुदर्शन सिंह, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष दविंद्र मनकोटिया, प्रधान जर्म सिंह ठाकुर, भोपाल कटोच, सुनीता कटोच, विजय कुमार और विजेंद्र पठानिया सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कुल मिलाकर इंदौरा का यह आयोजन पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण और सम्मान से आगे बढ़कर सरकार की विकास नीति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, हिमाचल के अधिकारों और आर्थिक आत्मनिर्भरता को जनता के बीच रखने का मंच बना। आने वाले समय में इन मुद्दों का स्थानीय राजनीति पर कितना प्रभाव पड़ता है, यह पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के क्रियान्वयन और जनता के अनुभव पर निर्भर करेगा। फिलहाल कार्यक्रम के जरिए सत्ता पक्ष ने ग्रामीण प्रतिनिधियों को अपने विकास एजेंडे से जोड़ने और हिमाचल के आर्थिक अधिकारों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रखने का स्पष्ट संदेश दिया है।य महाजन

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