नूरपुर हुई भवानी पठानियां की बैठक की समीक्षा :-लेखक राज्य चीफ ब्यूरो विजय समयाल
योजना, विकास और 20-सूत्रीय कार्यक्रम की समीक्षा में विधायक भवानी सिंह पठानिया ने अधिकारियों से लंबित कार्यों की स्थिति पूछी, बाधाओं का तत्काल समाधान करने और जनहित की योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।
नूरपुर में विकास की समीक्षा या सियासी संदेश? लंबित कामों पर अधिकारियों को दो टूक निर्देश
बैठक में विकास योजनाओं की जमीनी प्रगति पर जोर, विभागीय समन्वय मजबूत करने के निर्देश; राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही समीक्षा में अब सवाल यह कि आदेशों के बाद लंबित कार्य कितनी तेजी से धरातल पर उतरते हैं।
नूरपुर, 1 अक्तूबर:-नूरपुर में उपमंडल स्तरीय योजना, विकास एवं 20-सूत्रीय कार्यक्रम की समीक्षा बैठक महज विभागीय औपचारिकता तक सीमित नहीं रही। बैठक में लंबित विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं की प्रगति और विभागीय समन्वय को लेकर राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं फतेहपुर विधायक भवानी सिंह पठानिया ने अधिकारियों से जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दिया। बैठक में पूर्व विधायक अजय महाजन की मौजूदगी ने भी क्षेत्रीय राजनीतिक संदर्भ को महत्वपूर्ण बना दिया।बैठक का मुख्य फोकस यही रहा कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की फाइलें दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका लाभ निर्धारित समय में आम जनता तक पहुंचे। पठानिया ने अधिकारियों से विभिन्न विभागों के लंबित कार्यों की स्थिति, उनमें आ रही बाधाओं और योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए और अनावश्यक देरी से बचा जाए।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो हिमाचल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले विकास कार्यों की गति और सरकार की योजनाओं का जमीन पर असर महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर होने वाली विकास समीक्षा बैठकों का महत्व केवल प्रशासनिक नहीं रहता। जनप्रतिनिधियों के लिए यह मौका भी होता है कि वे अपने क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की स्थिति को अधिकारियों के सामने रखें और जनता से जुड़े मुद्दों पर प्रशासनिक मशीनरी की जवाबदेही तय करने का प्रयास करें।पठानिया ने बैठक में भूमि, बजट, तकनीकी स्वीकृति, विभागीय अनुमति या अन्य कारणों से अटके कार्यों के समाधान के लिए संबंधित विभागों में आपसी समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसी एक विभाग की प्रक्रिया दूसरे विभाग के काम में अनावश्यक बाधा न बने। उन्होंने अधिकारियों से विकास कार्यों की नियमित निगरानी करने और गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय में काम पूरा करवाने को कहा।
20-सूत्रीय कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान विभिन्न विभागों ने अपनी योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी। पात्र लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करना भी बैठक के प्रमुख बिंदुओं में शामिल रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासनिक स्तर पर अब केवल योजनाओं की स्वीकृति और बजट आवंटन के बजाय उनके वास्तविक क्रियान्वयन पर भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत महसूस की जा रही है।बैठक में पठानिया का यह कहना कि समीक्षा का उद्देश्य केवल प्रगति की जानकारी लेना नहीं, बल्कि योजनाओं का वास्तविक लाभ धरातल पर पहुंचाना है, राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। विकास के मुद्दे हिमाचल की राजनीति में हमेशा प्रमुख रहे हैं और स्थानीय स्तर पर सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य सीधे जनता के अनुभव से जुड़े होते हैं। इसलिए लंबित कार्यों की स्थिति और उनके पूरा होने की गति आने वाले समय में जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कसौटी बन सकती है।
हालांकि बैठक में किसी राजनीतिक दल पर प्रत्यक्ष आरोप-प्रत्यारोप नहीं हुआ, लेकिन विकास कार्यों को समयबद्ध पूरा करने के निर्देशों के बीच यह सवाल जरूर महत्वपूर्ण है कि जिन कार्यों को लंबित बताया जा रहा है, वे कब तक पूरे होंगे और उनके परिणाम जमीन पर कितनी तेजी से दिखाई देंगे। प्रशासनिक समीक्षा का वास्तविक असर तभी माना जाएगा जब बैठक में उठे मुद्दों पर आगे ठोस कार्रवाई हो और लोगों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिले।बैठक में एसपी नूरपुर इल्मा अफरोज, एसडीएम अरुण शर्मा, खनन अधिकारी सुरेश कुमार, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बलविंद्र सिंह, सहायक अभियंता उमेंद्र सिंह, जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता आनंद बलौरिया, विद्युत बोर्ड के अधिशासी अभियंता विकास ठाकुर तथा आरओ जगजीत चावला सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।अब नजर इस बात पर रहेगी कि बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद नूरपुर उपमंडल में लंबित विकास कार्यों की रफ्तार कितनी बढ़ती है और सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने में प्रशासन कितना सफल रहता है। यही समीक्षा बैठक के प्रशासनिक निर्देशों को धरातल पर परखने का अगला चरण होगा।

