1 हिमाचल में कैबिनेट विस्तार पर दिल्ली में मंथन, हाईकमान से मिले सीएम सुक्खू; फेरबदल की चर्चाओं ने बढ़ाई सियासी हलचल
शिमला, 30 सितंबर 2026। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में लंबे समय से चर्चा में चल रहे मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रमुख नेताओं से मुलाकात की। मुख्यमंत्री के साथ दो कैबिनेट मंत्री और कुल्लू सदर के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर के दिल्ली पहुंचने से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाओं को और बल मिला है।
रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इससे पहले मुख्यमंत्री कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी शामिल हुए। हालांकि, इन बैठकों के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।मंत्रिमंडल विस्तार में कुल्लू सदर के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का नाम लगातार चर्चा में है। मुख्यमंत्री के साथ उनका दिल्ली जाना भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी ओर, पार्टी के भीतर क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन को लेकर भी चर्चा की खबरें हैं। कुछ रिपोर्टों में पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल के नाम का भी उल्लेख किया गया है।
संभावित फेरबदल को लेकर एक मौजूदा मंत्री को मंत्रिमंडल से हटाने और नए चेहरों को शामिल करने जैसी चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में हैं। लेकिन अभी तक किसी मंत्री को हटाने या किसी नए मंत्री की नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, 26 सितंबर को हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने कहा था कि मुख्यमंत्री की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार का औपचारिक प्रस्ताव अभी उन्हें नहीं मिला है।ऐसे में 30 सितंबर को स्थिति यह है कि **कैबिनेट विस्तार और संभावित विभागीय फेरबदल को लेकर कांग्रेस नेतृत्व के स्तर पर विचार-विमर्श की खबरें हैं, लेकिन अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।**आने वाले दिनों में हाईकमान और मुख्यमंत्री के बीच बातचीत के बाद तस्वीर स्पष्ट होने की संभावना है।
2 कांगड़ा में मानसून की तबाही का केंद्रीय आकलन, 340 करोड़ से ज्यादा नुकसान; राहत मानकों में बदलाव की मांग
धर्मशाला, 30 सितंबर 2026। हिमाचल प्रदेश में इस मानसून भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का जमीनी आकलन करने पहुंची अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने कांगड़ा जिले के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु के नेतृत्व में टीम ने शाहपुर की बोह घाटी, सुधेड़ और धर्मशाला-मैक्लोडगंज मार्ग के खड़ा डंडा क्षेत्र में नुकसान का जायजा लिया। टीम ने स्थानीय प्रशासन और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी अधिकारियों से ली।
जिला प्रशासन की ओर से केंद्रीय दल को बताया गया कि मानसूनी आपदा के दौरान कांगड़ा में 15 लोगों की मौत और 76 पशुधन के नुकसान की सूचना है। नूरपुर, देहरा और पालमपुर सर्किल में करीब 854 किलोमीटर सड़कें प्रभावित हुई हैं, जिनसे लगभग 269.77 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है। इसके अलावा 428 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुईं और इनका नुकसान करीब 64.06 करोड़ रुपये बताया गया है। इनमें से 330 योजनाओं को अस्थायी रूप से बहाल किए जाने की जानकारी दी गई।केंद्रीय टीम ने बोह घाटी में 21 जुलाई को भारी बारिश से प्रभावित घड़गूं गांव का भी निरीक्षण किया। प्रशासन के अनुसार यहां 22 परिवारों के 95 लोग प्रभावित हुए थे, जिन्हें तत्काल राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया था। अधिकारियों ने केंद्रीय दल को राहत, पुनर्वास और पुनर्स्थापन कार्यों की प्रगति से भी अवगत करवाया।
इस दौरान जिला प्रशासन ने केंद्र से आपदा राहत के मौजूदा मानकों में बदलाव की मांग रखी। प्रशासन के अनुसार प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर आपदा प्रभावित परिवारों के लिए राहत राशि में वृद्धि की है और केंद्रीय सहायता के नियमों में संशोधन से प्रभावित क्षेत्रों को अधिक आर्थिक मदद मिल सकती है। केंद्रीय दल ने बताया कि राहत मानकों में संशोधन की प्रक्रिया केंद्र स्तर पर चल रही है और हिमाचल से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा।केंद्रीय दल के आकलन के बाद तैयार रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इसी के आधार पर केंद्र से मिलने वाली संभावित राहत और पुनर्वास सहायता को लेकर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
3 चंबा सीमा से सटे कठुआ में CISF कैंप में फायरिंग, असिस्टेंट कमांडेंट समेत चार जवानों की मौत
चंबा/डलहौजी, 30 सितंबर 2026। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की सीमा से सटे जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बसोहली क्षेत्र में मंगलवार शाम CISF कैंप में हुई फायरिंग की घटना से सनसनी फैल गई। सेवा-II जलविद्युत परियोजना की सुरक्षा में तैनात एक हेड कांस्टेबल पर अपने ही साथियों पर सर्विस राइफल से गोली चलाने का आरोप है। घटना में असिस्टेंट कमांडेंट समेत चार CISF कर्मियों की मौत हो गई।प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना मंगलवार शाम करीब सात बजे माश्का स्थित सेवा-II पावर प्रोजेक्ट में हुई। मृतकों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल संजीव कुमार और कांस्टेबल मोहम्मद रफीक के रूप में हुई है। गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल चारों कर्मियों को घटनास्थल से हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के खैरी स्थित एनएचपीसी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस के अनुसार आरोपी हेड कांस्टेबल अवदेश कुमार को हिरासत में लिया गया है और उसकी सर्विस राइफल भी कब्जे में ली गई है। शुरुआती जांच में जवानों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी की जानकारी सामने आई है, हालांकि फायरिंग के वास्तविक कारण और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। CISF मुख्यालय ने मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं।घटना के बाद CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने बुधवार को घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। जम्मू-कश्मीर पुलिस, CISF और फोरेंसिक टीमों ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए। चूंकि घटनास्थल हिमाचल सीमा के बेहद नजदीक है और घायलों को उपचार के लिए चंबा लाया गया था, इसलिए मामले में हिमाचल पुलिस की टीम भी जांच प्रक्रिया में शामिल रही।
महत्वपूर्ण तथ्य: घटना चंबा जिले में नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बसोहली क्षेत्र में हुई है। चंबा का संबंध घटनास्थल की सीमा निकटता और घायलों को खैरी अस्पताल लाए जाने से है।
4 हिमाचल में कैबिनेट विस्तार को लेकर दिल्ली में मंथन, सुक्खू की हाईकमान से मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल
शिमला, 30 सितंबर 2026। हिमाचल प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर कांग्रेस के भीतर गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू मंगलवार को नई दिल्ली पहुंचे और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रमुख नेताओं से मुलाकात की। मुख्यमंत्री के अलावा दो कैबिनेट मंत्री भी दिल्ली में रहे। मुख्यमंत्री के साथ कुल्लू सदर के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर की मौजूदगी ने मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं को और हवा दी है।
रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री सुक्खू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इसके साथ ही मुख्यमंत्री कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी शामिल हुए। हालांकि, इन मुलाकातों के बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।मंत्रिमंडल विस्तार में सुंदर सिंह ठाकुर के नाम की चर्चा पहले से चल रही है। वहीं कांग्रेस के भीतर सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के संतुलन को लेकर भी विचार-विमर्श की खबरें हैं। कुछ रिपोर्टों में पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल के नाम का भी उल्लेख किया गया है। इसी बीच संभावित फेरबदल को लेकर एक मौजूदा मंत्री को हटाने और एक से अधिक नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने की चर्चाएं भी सामने आई हैं। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम की एक अहम कड़ी 26 सितंबर को सामने आई थी, जब हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने कहा था कि मुख्यमंत्री की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार का औपचारिक प्रस्ताव अभी उनके पास नहीं आया है। उन्होंने कहा था कि प्रस्ताव मिलने के बाद उसे हाईकमान के समक्ष रखा जाएगा।सितंबर की शुरुआत में भी कांग्रेस नेतृत्व ने मंत्रियों की कार्यप्रणाली और विभागीय प्रदर्शन से जुड़ी रिपोर्ट मांगी थी। ऐसे में अब 30 सितंबर तक रिपोर्ट और दिल्ली में हुई बैठकों के बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की संभावना है। फिलहाल किस मंत्री को हटाया जाएगा, किसे शामिल किया जाएगा या विभागों में क्या बदलाव होगा—इस पर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।दिल्ली में मुख्यमंत्री सुक्खू की हाईकमान से मुलाकात ने हिमाचल कांग्रेस में कैबिनेट विस्तार और संभावित फेरबदल की चर्चाओं को तेज जरूर किया है, लेकिन अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
5 चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया पर जगत सिंह नेगी के सवाल, नौतोड़ से कैबिनेट विस्तार तक कई मुद्दों पर बोले
शिमला, 30 सितंबर 2026। हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बुधवार को शिमला में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार और भाजपा पर चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। नेगी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव कर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित किया है। यह उनका राजनीतिक आरोप है; मौजूदा कानून के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता वाली चयन समिति की सिफारिश पर होती है।
नेगी ने कहा कि पहले कांग्रेस पर राजनीतिक नियुक्तियां करने के आरोप लगाए जाते थे, लेकिन अब केंद्र की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलावों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी 2023 के कानून ने 1991 के कानून को प्रतिस्थापित किया था और चयन समिति की संरचना निर्धारित की है।मीडिया से बातचीत में नेगी ने कांग्रेस के भीतर ‘स्लीपर सेल’ और ‘जयचंद’ संबंधी अपनी पूर्व टिप्पणी पर भी सफाई दी। इसके अलावा उन्होंने हिमाचल में लंबे समय से लंबित नौतोड़ भूमि अधिकार के मामलों का मुद्दा उठाया। अगस्त में नेगी ने राज्यपाल से लंबित नौतोड़ मामलों पर जल्द निर्णय का आग्रह किया था। उस समय उन्होंने करीब 20 हजार मामले लंबित होने की बात कही थी।
कैबिनेट विस्तार को लेकर पूछे गए सवाल पर भी नेगी ने अपनी बात रखी। वहीं प्रदेश में मानसून से हुए नुकसान और प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने का मुद्दा भी चर्चा में रहा। इससे पहले नेगी अधिकारियों को आपदा प्रभावित परिवारों को विशेष राहत पैकेज के तहत सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दे चुके हैं।कुल मिलाकर, 30 सितंबर को नेगी की प्रेस वार्ता में चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया, कांग्रेस संगठन से जुड़े उनके बयान, नौतोड़ भूमि, संभावित कैबिनेट विस्तार और मानसूनी आपदा राहत जैसे कई राजनीतिक एवं प्रशासनिक मुद्दे प्र
6 नूरपुर पुलिस का नशे के आर्थिक नेटवर्क पर प्रहार, 1.01 करोड़ की तीन संपत्तियां फ्रीज
नूरपुर, 30 सितंबर 2026। नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए नूरपुर जिला पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत 1 करोड़ 1 लाख 55 हजार 718 रुपये मूल्य की तीन संपत्तियों पर फ्रीजिंग की कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई वर्ष 2017 में दर्ज एफआईआर नंबर 152 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 68एफ(1) और 68ई के प्रावधानों के तहत की गई है। कार्रवाई का उद्देश्य नशे के कारोबार से जुड़े संभावित आर्थिक नेटवर्क और धन के प्रवाह की जांच करना है।पुलिस के अनुसार कार्रवाई छन्नी, तहसील इंदौरा निवासी दलवीरो और उसके परिवार से जुड़ी संपत्तियों के खिलाफ की गई। इनमें दलवीरो और परिवार की करीब 61.96 लाख रुपये मूल्य की कोठी, उसके बेटे मिथुन उर्फ छप्पर की करीब 32.60 लाख रुपये मूल्य की कोठी, फर्नीचर और घरेलू सामान तथा बेटी घरो देवी के नाम दर्ज करीब 6.98 लाख रुपये मूल्य की कार शामिल है। तीनों संपत्तियों का कुल मूल्य 1,01,55,718 रुपये आंका गया है।पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दलवीरो के खिलाफ पांच तथा उसके बेटे मिथुन उर्फ छप्पर के खिलाफ 14 एनडीपीएस मामले दर्ज हैं। दलवीरो को 1 अप्रैल 2025 को अदालत ने दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। मौजूदा कार्रवाई में पुलिस ने राजस्व रिकॉर्ड, आयकर संबंधी जानकारी, वाहन पंजीकरण और संपत्ति मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की है।
नूरपुर पुलिस अब केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहती। जांच में मनी ट्रेल, बैंक लेन-देन, संपत्ति अर्जन के स्रोत तथा परिजनों और सहयोगियों के नाम पर मौजूद संपत्तियों की कड़ियों को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस का कहना है कि नशे के कारोबार से जुड़े आर्थिक ढांचे पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।यह कार्रवाई नूरपुर पुलिस द्वारा नशा तस्करी के आर्थिक नेटवर्क पर की जा रही व्यापक कार्रवाई की कड़ी है। सितंबर में पुलिस ने एक अन्य मामले में 3.32 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को भी फ्रीज किया था।
7 सिरमौर में नशे के खिलाफ अभियान तेज, 20 रेड फ्लैग पंचायतों में सक्रिय होंगी नशा निवारण समितियां
नाहन, 30 सितंबर 2026। जिला सिरमौर में नशे के खिलाफ प्रशासन ने पंचायत स्तर तक निगरानी और जागरूकता व्यवस्था मजबूत करने का फैसला लिया है। उपायुक्त कार्यालय नाहन में जिला स्तरीय नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन (एनकॉर्ड) समिति की 28वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एकता काप्टा ने की। इसमें नशा तस्करी के खिलाफ प्रवर्तन अभियान, एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई और पंचायत स्तर पर नशा निवारण समितियों की स्थिति की समीक्षा की गई।बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक सिरमौर जिले में एनडीपीएस अधिनियम के तहत 122 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। एडीएम ने अधिकारियों को नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने तथा प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रशासन ने जिले की 20 रेड फ्लैग पंचायतों में नशा निवारण समितियों को अपडेट कर सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं। इन समितियों के माध्यम से पंचायत स्तर पर नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान और निगरानी गतिविधियों को मजबूत किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग को इन पंचायतों में स्वास्थ्य शिविरों की संख्या बढ़ाने तथा नशे से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों को उपचार, परामर्श और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा ड्रग एवं आबकारी विभाग को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित और मासिक निरीक्षण करने को कहा गया। स्कूलों में चल रहे नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए नियमित कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए। beठक में एडीएम ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। प्रवर्तन के साथ जागरूकता, उपचार, परामर्श और पुनर्वास को भी समान महत्व देना जरूरी है। बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिरमौर नरेंद्र कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे
8 सिरमौर में नशे पर शिकंजा, 20 रेड फ्लैग पंचायतों में सक्रिय होंगी नशा निवारण समितियां
नाहन, 30 सितंबर 2026। सिरमौर जिले में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को पंचायत स्तर तक मजबूत करने की तैयारी की गई है। उपायुक्त कार्यालय नाहन में जिला स्तरीय नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन (एनकॉर्ड) समिति की 28वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एकता काप्टा ने की। इसमें नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई, पंचायत स्तर की निगरानी, एनडीपीएस मामलों और विभिन्न विभागों के प्रयासों की समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि 2026 में अब तक सिरमौर जिले में एनडीपीएस अधिनियम के तहत 122 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। अधिकारियों को नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने तथा प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ कार्रवाई को केवल पुलिस और प्रवर्तन एजेंसियों तक सीमित रखने के बजाय पंचायत स्तर पर भी निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी।एडीएम ने जिला पंचायत कार्यालय को जिले की 20 रेड फ्लैग पंचायतों में नशा निवारण समितियों को अपडेट कर सक्रिय करने के निर्देश दिए। इन समितियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग को रेड फ्लैग पंचायतों में स्वास्थ्य शिविरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए। नशे से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों को उपचार, परामर्श तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशासन ने माना कि नशे की समस्या से निपटने में जागरूकता, उपचार, परामर्श और पुनर्वास भी प्रवर्तन कार्रवाई जितने ही महत्वपूर्ण हैं।इसके अलावा ड्रग एवं आबकारी विभाग को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित और मासिक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए। विद्यालयों में चल रहे नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रमों की भी समीक्षा हुई और विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लगातार जागरूक करने को कहा गया। बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिरमौर नरेंद्र कुमार समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
प्रशासन का फोकस अब प्रवर्तन के साथ पंचायतों की भागीदारी, जागरूकता और उपचार व्यवस्था को जोड़कर नशे के खिलाफ अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर है।
9 हिमाचल में कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज, दिल्ली में हाईकमान से मिले सुक्खू; फेरबदल की अटकलों से सियासी हलचल
शिमला, 30 सितंबर 2026। हिमाचल प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू मंगलवार को नई दिल्ली पहुंचे और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। मुख्यमंत्री के अलावा दो कैबिनेट मंत्रियों के भी दिल्ली पहुंचने से मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर चल रही चर्चाओं को और बल मिला है। हालांकि, किस मंत्री को हटाया जाएगा या किस नए चेहरे को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा, इसकी अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री सुक्खू कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी शामिल हुए। उनके दिल्ली दौरे के दौरान पार्टी नेतृत्व के साथ प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन और सरकार के कामकाज से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की बात सामने आई है। इस बीच शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के भी दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व से मिलने की खबर है। कुल्लू सदर के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर की मुख्यमंत्री के साथ दिल्ली मौजूदगी को भी मंत्रिमंडल विस्तार के संदर्भ में देखा जा रहा है।
एक पद पहले से खाली, नए चेहरे को लेकर चर्चा
हिमाचल मंत्रिमंडल में फिलहाल एक पद रिक्त है। मुख्यमंत्री सुक्खू पहले यह कह चुके हैं कि सरकार के चार साल पूरे होने से पहले इस रिक्त पद को भरे जाने की उम्मीद है। 26 सितंबर को हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने कहा था कि मुख्यमंत्री की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उनके पास उस समय तक कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया था। उन्होंने कहा था कि प्रस्ताव मिलने के बाद उसे पार्टी हाईकमान के समक्ष विचार के लिए रखा जाएगा।सितंबर की शुरुआत से ही मंत्रिमंडल में संभावित विस्तार और फेरबदल को लेकर अटकलें चल रही हैं। कुछ रिपोर्टों में दो मौजूदा मंत्रियों को हटाए जाने और नए चेहरों को जगह दिए जाने की संभावना का उल्लेख किया गया है। हालांकि ये राजनीतिक चर्चाएं और मीडिया रिपोर्टें हैं, आधिकारिक निर्णय नहीं। इसी तरह मंत्रियों के विभागों में बदलाव की संभावना की भी चर्चा है।
2027 से पहले संगठन और सरकार पर फोकस
हिमाचल में अगले विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में कांग्रेस संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर तैयारियों को लेकर सक्रिय है। पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल ने हाल में संगठन में अनुशासन, ब्लॉक और जिला कांग्रेस समितियों की सक्रियता तथा पार्टी कार्यक्रमों को लेकर भी नेताओं को निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उधर, मुख्यमंत्री सुक्खू ने 25 सितंबर को कहा था कि मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल 11 दिसंबर से पहले होने की संभावना है। इससे पहले 11 सितंबर को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक भी संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच स्थगित कर दी गई थी। रिपोर्टों में कहा गया था कि पार्टी नेतृत्व मंत्रियों के प्रदर्शन की रिपोर्ट और बदलाव से जुड़े प्रस्तावों पर विचार कर रहा था।फिलहाल दिल्ली में मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेतृत्व के बीच हुई बैठकों के बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अगला कदम हाईकमान के फैसले पर निर्भर रहेगा। किसी मंत्री की विदाई, नए चेहरे की एंट्री अथवा विभागों के पुनर्वितरण को लेकर अंतिम स्थिति आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए मौजूदा समय में सामने आ रही नामों और फेरबदल की चर्चाओं को आधिकारिक निर्णय के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
10 ऊना के 201 स्कूलों में आपदा प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण, छह महीने चलेगा अभियान
ऊना, 30 सितंबर 2026। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में विद्यार्थियों और शिक्षकों को आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत आगामी छह महीनों में जिले के 201 सरकारी और निजी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में स्कूल आपदा तैयारी एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य स्कूल स्तर पर आपदा के समय सुरक्षित तरीके से प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित करना है।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं उपायुक्त जतिन लाल के अनुसार पहले चरण में जिले के सभी 201 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों को कार्यक्रम में शामिल किया गया है। इनमें 141 सरकारी और 60 निजी स्कूल हैं। प्रशिक्षित टीमें प्रत्येक माह स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों और शिक्षकों को विभिन्न आपदाओं से बचाव के व्यावहारिक तरीके बताएंगी।
प्रशिक्षण में विशेष रूप से भूकंप के दौरान ‘ड्रॉप, कवर एंड होल्ड’ अभ्यास, अग्नि सुरक्षा, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन प्रतिक्रिया से जुड़े जरूरी कौशल सिखाए जाएंगे। विद्यार्थियों को परिवार की आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने और आपात स्थिति में उपयोगी फैमिली इमरजेंसी किट के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नियमित मॉक ड्रिल रहेगा। इसका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि आपदा के दौरान घबराहट से बचते हुए सुरक्षित निकासी, प्राथमिक सहायता और तत्काल प्रतिक्रिया जैसे व्यावहारिक कदमों का अभ्यास करवाना है। स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की उपयोगिता को भी इस प्रक्रिया के दौरान परखा जा सकेगा।
प्रशासन की ओर से बताया गया है कि स्कूल आपदा तैयारी कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को भी आपात स्थिति में अपनी जिम्मेदारी समझने और दूसरों की सहायता करने का प्रशिक्षण मिलेगा। हिमाचल जैसे भूकंप, भारी बारिश और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की आशंका वाले क्षेत्र में स्कूलों की आपदा तैयारियों को मजबूत करना प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि छह महीने के इस अभियान के बाद ऊना के स्कूलों में आपदा से निपटने की बुनियादी समझ और व्यावहारिक क्षमता को मजबूत किया जा सके। 201 स्कूलों को शामिल किए जाने से यह अभियान जिले के बड़े हिस्से तक पहुंचेगा और विद्यार्थियों के साथ उनके परिवारों तक भी आपदा सुरक्षा संबंधी जानकारी पहुंचने की संभावना है।
11 ऊना क्षेत्रीय अस्पताल में सीने में दर्द से पहुंचे युवक की मौत, परिजनों ने इलाज में देरी का लगाया आरोप
ऊना, 30 सितंबर 2026। क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में बुधवार सुबह सीने में दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे एक युवक की अचानक मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ पर उपचार में कथित देरी का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मृतक की पहचान सुनेहरा निवासी हरपाल सिंह के रूप में हुई है।
परिजनों के अनुसार हरपाल सिंह सीने में दर्द की शिकायत के बाद खुद चलकर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड तक पहुंचा था। उनका आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद उसने अपनी परेशानी चिकित्सकों और स्टाफ को बताई तथा तत्काल उपचार की मांग की, लेकिन उसे कथित तौर पर इंतजार करने के लिए कहा गया। परिजनों का दावा है कि वह करीब दो घंटे तक उपचार की प्रतीक्षा करता रहा।
परिजनों के मुताबिक इसी दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह अस्पताल परिसर में गिर पड़ा। कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। युवक की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों और साथ आए लोगों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। परिजनों का कहना था कि यदि समय रहते उपचार मिलता तो संभवतः स्थिति अलग हो सकती थी।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी अस्पताल पहुंची और स्थिति को संभाला। फिलहाल परिजनों की ओर से लगाए गए इलाज में देरी और कथित लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों में अस्पताल प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक पक्ष भी सामने नहीं आया है। इसलिए युवक की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण और उपचार में कथित देरी का उससे संबंध जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
यह मामला सामने आने के बाद क्षेत्रीय अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था और गंभीर लक्षण वाले मरीजों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, किसी चिकित्सकीय निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड का सामने आना जरूरी होगा।
12 त्योहारी सीजन से पहले ऊना व्यापारियों ने उठाईं मांगें, फेरीवालों से लेकर बाजार की सुरक्षा तक मुद्दे
ऊना, 30 सितंबर 2026। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ऊना के बाजारों में बढ़ने वाली भीड़ और कारोबार को देखते हुए व्यापारियों ने अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रखी हैं। बुधवार को व्यापार मंडल ऊना के प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त उपायुक्त इशांत जसवाल से मुलाकात कर लंबे समय से लंबित मांगों पर चर्चा की। व्यापारियों ने बाहरी राज्यों से आने वाले फेरीवालों पर नियंत्रण, बाजार में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और सीसीटीवी कैमरे लगाने सहित कई मांगें रखीं।
व्यापार मंडल अध्यक्ष प्रिंस राजपूत ने कहा कि बाहरी राज्यों से आने वाले फेरीवालों के कारण स्थानीय दुकानदारों के कारोबार पर असर पड़ रहा है। व्यापारियों के अनुसार गली-मोहल्लों और बाजार क्षेत्रों में कपड़ा, प्लास्टिक, लोहे का सामान, सब्जियां और अन्य वस्तुएं बेचने वाले फेरीवालों की गतिविधियों पर उचित नियंत्रण की जरूरत है। व्यापारियों ने प्रशासन से इस दिशा में प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की।त्योहारी सीजन को देखते हुए व्यापारियों ने दुकानों के बाहर निर्धारित सीमा तक सामान सजाने की अनुमति देने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि त्योहारों के दौरान दुकानें सजने से बाजार में खरीदारी का माहौल बनता है। साथ ही व्यापारियों ने खाद्य सुरक्षा और अन्य विभागों की ओर से होने वाली नमूना जांच की कार्रवाई को लेकर भी दिवाली तक राहत देने की मांग रखी।
प्रतिनिधिमंडल ने बाजार और शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। व्यापारियों ने प्रमुख चौकों और विभिन्न मोहल्लों में प्रशासन द्वारा लगाए गए खंभों पर जल्द सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की। उनका कहना है कि कैमरों से बाजार में निगरानी मजबूत होगी और किसी घटना की स्थिति में जांच में भी सहायता मिल सकती है।
इसके अलावा ऑनलाइन सामान पहुंचाने वाली सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की रात 11 बजे के बाद आवाजाही का मुद्दा भी उठाया गया। व्यापारियों ने देर रात होने वाली आवाजाही पर उचित निगरानी की मांग की।
व्यापार मंडल ने पुराना होशियारपुर मार्ग, पुल वाला बाजार और डीएवी स्कूल क्षेत्र के आसपास खुले नालों की समस्या भी एडीसी के समक्ष रखी। व्यापारियों के अनुसार कई स्थानों पर नालों पर स्लैब नहीं होने से राहगीरों और बच्चों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है। उन्होंने इन स्थानों पर जल्द स्लैब लगाने की मांग की।तिरिक्त उपायुक्त इशांत जसवाल ने व्यापारियों की समस्याओं और मांगों को सुना तथा उचित स्तर पर कार्रवाई का भरोसा दिया। प्रतिनिधिमंडल में चेयरमैन अश्विनी जैतक, अध्यक्ष प्रिंस राजपूत, राजेश पुरी सहित अन्य व्यापारी शामिल रहे।
त्योहारी सीजन से पहले व्यापारियों की मांगों से अब प्रशासन के सामने बाजार व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात और स्थानीय कारोबार से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की चुनौती है।
13 अंब में दुकानदार पर पांच नकाबपोशों का हमला, लोहे की रॉड और हॉकी से पीटा; पुलिस ने दर्ज किया मामला
अंब, ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के अंब थाना क्षेत्र में एक फास्ट फूड दुकानदार पर पांच अज्ञात नकाबपोश लोगों ने कथित रूप से हमला कर दिया। घटना सोमवार रात करीब साढ़े नौ बजे बेहड़ जसवां स्कूल के पास चक्क पुली क्षेत्र में हुई। हमले में दुकानदार भागवत कुमार घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए सिविल अस्पताल अंब ले जाया गया।
पुलिस को दिए बयान के अनुसार, अंदौरा निवासी भागवत कुमार चुरुडू में फास्ट फूड की दुकान चलाते हैं। सोमवार रात दुकान बंद करने के बाद वह स्कूटी से घर लौट रहे थे। उनके पीछे दूसरी स्कूटी पर उनका 14 वर्षीय भांजा प्रिंस भी आ रहा था। बेहड़ जसवां स्कूल के पास एक सफेद रंग की इनोवा कार ने उनकी स्कूटी के आगे रास्ता रोक दिया। इसके बाद कार से करीब पांच मुंह ढके व्यक्ति बाहर निकले और भागवत पर हमला कर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक हमलावरों ने लोहे की रॉड और अन्य हथियारों से दुकानदार के सिर, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर वार किए। भागवत के भांजे ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को घटना की जानकारी दी। लोगों के मौके की ओर आने पर हमलावर सफेद इनोवा में बैठकर अंब की तरफ फरार हो गए। हमले के दौरान आरोपियों के चेहरे ढके होने के कारण पीड़ित उनकी पहचान नहीं कर सका।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम अस्पताल पहुंची और घायल दुकानदार के बयान दर्ज किए। डीएसपी/एसडीपीओ अंब अनिल पटियाल के अनुसार पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस घटनास्थल के आसपास की परिस्थितियों और वारदात में इस्तेमाल वाहन के बारे में जानकारी जुटा रही है।फिलहाल हमले के कारण और आरोपियों की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस इनोवा कार और पांचों संदिग्ध हमलावरों की तलाश में जुटी है। मामले में आगे की कार्रवाई पीड़ित के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
14 ऊना में करतोली-हिमाचल एक्सप्रेस 4 घंटे 24 मिनट देरी से पहुंची, यात्री परेशान
ऊना। करतोली-हिमाचल एक्सप्रेस मंगलवार को अपने निर्धारित समय से चार घंटे 24 मिनट की देरी से ऊना रेलवे स्टेशन पहुंची। ट्रेन के लंबे विलंब के कारण यात्रियों को स्टेशन पर काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। कई यात्रियों की आगे की यात्रा भी प्रभावित हुई।
जानकारी के अनुसार ट्रेन के ऊना रेलवे स्टेशन पहुंचने का निर्धारित समय सुबह 7:07 बजे था, लेकिन ट्रेन करीब 11:31 बजे ऊना पहुंची। रिपोर्ट के मुताबिक करतोली रेलवे स्टेशन पर भी ट्रेन निर्धारित समय से चार घंटे 24 मिनट देरी से पहुंची थी।ट्रेन के विलंब से यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगा। स्टेशन पर इंतजार कर रहे यात्रियों को ट्रेन के आने के लिए काफी देर तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। जिन यात्रियों ने आगे की यात्रा के लिए दूसरी ट्रेन, बस या अन्य साधन निर्धारित कर रखे थे, उनकी समय-सारणी भी प्रभावित होने की बात सामने आई है।
यात्रियों ने रेलवे से ट्रेन का संचालन निर्धारित समय के अनुसार सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि लंबी देरी से विशेषकर उन यात्रियों को परेशानी होती है, जिन्हें आगे किसी अन्य माध्यम से यात्रा करनी होती है।रिपोर्ट में ट्रेन के चार घंटे 24 मिनट विलंब से पहुंचने की पुष्टि की गई है, हालांकि देरी के विशिष्ट कारण का उल्लेख नहीं किया गया है। ऐसे में देरी के कारण को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
15 कुटलैहड़ में खैर कटान पर सियासी सवाल, भुट्टो ने उठाई जांच की मांग
ऊना/बंगाणा। कुटलैहड़ के बीहड़ू-डोहक क्षेत्र में कथित खैर कटान का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक दविंद्र कुमार भुट्टो ने मौके पर खैर के पेड़ों के कटान और पहाड़ी की खुदाई को लेकर प्रदेश सरकार तथा संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की विस्तृत जांच और कटे पेड़ों की लकड़ी के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
भुट्टो ने दावा किया कि सड़क निर्माण के लिए सरकारी भूमि पर सीमित क्षेत्र में खुदाई की अनुमति थी, लेकिन मौके पर इससे कहीं अधिक क्षेत्र में पहाड़ी की खुदाई किए जाने की बात सामने आ रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब एक हजार खैर के पेड़ प्रभावित या काटे जाने की जानकारी सामने आई है और पूछा कि इन पेड़ों की लकड़ी कहां गई। हालांकि, यह संख्या अभी जांच के स्तर पर है और इसे आधिकारिक रूप से पुष्टि किया हुआ आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
वहीं, उपलब्ध वन विभाग और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बीहड़ू-लठियाणी सड़क के आसपास निरीक्षण के दौरान करीब 30-31 स्थानों पर खैर के पेड़ जड़ सहित उखड़े हुए और जड़ पटान के गड्ढे पाए गए थे। इस मामले में बंगाणा थाना में दो नामजद ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस और वन विभाग यह जांच कर रहे हैं कि मौके पर मिले पेड़ों का कटान निर्धारित अनुमति के तहत हुआ या नियमों के विपरीत।
मामले में वन विभाग ने संबंधित क्षेत्र में तैनात एक डिप्टी रेंजर और एक फॉरेस्ट गार्ड को निलंबित किया है। डीएफओ ऊना विकल्प यादव के अनुसार जांच पुलिस के साथ मिलकर की जा रही है। जांच में कटे पेड़ों की संख्या, कटान की अनुमति, लकड़ी के परिवहन और निस्तारण समेत अन्य पहलुओं को देखा जा रहा है।
16डीडीयू अस्पताल में हिमकेयर-आयुष्मान सुविधा प्रभावित, करीब दो करोड़ की देनदारी के चलते वेंडरों ने रोकी सप्लाई
शिमला। राजधानी शिमला के दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) जोनल अस्पताल में हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजनाओं के तहत मिलने वाली सुविधाएं फिलहाल प्रभावित हो गई हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार दवा वेंडरों की दोनों योजनाओं से जुड़ी करीब दो करोड़ रुपये की राशि लंबित है। भुगतान नहीं होने के कारण वेंडरों ने अस्पताल को दवाइयां और कुछ जरूरी चिकित्सा सामग्री उपलब्ध करवाना बंद कर दिया है। इसका असर भर्ती मरीजों पर पड़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल में भर्ती कुछ मरीजों को इलाज के दौरान आवश्यक दवाइयां और अन्य सामान बाजार से खरीदना पड़ रहा है। इससे उन परिवारों की परेशानी बढ़ गई है, जो हिमकेयर या आयुष्मान भारत योजना के तहत कैशलेस अथवा कम खर्च में उपचार की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। खासकर ऑपरेशन या लंबे उपचार की जरूरत वाले मरीजों के लिए बाहर से दवाइयां खरीदना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है।
अस्पताल प्रबंधन ने सरकार से मांगा भुगतान
डीडीयू अस्पताल प्रबंधन के अनुसार लंबित भुगतान को लेकर सरकार के साथ कई बार पत्राचार किया गया है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक लोकेंद्र शर्मा ने बताया कि फिलहाल अस्पताल में हिमकेयर और आयुष्मान कार्ड की सुविधा नहीं चल रही है और मरीजों को इसकी जानकारी दी जा रही है। उन्होंने सरकार से जल्द लंबित राशि जारी करने का आग्रह किया है, ताकि वेंडरों को भुगतान हो सके और योजनाओं के तहत सुविधाएं सामान्य रूप से बहाल की जा सकें।
डीडीयू अस्पताल में हड्डी रोग, सर्जरी, गायनी, नेत्र और शिशु रोग सहित विभिन्न विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में दवाइयों और आवश्यक चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति प्रभावित होने का सीधा संबंध मरीजों के उपचार से जुड़ता है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में यह नहीं कहा गया है कि सभी प्रकार का उपचार बंद है; समस्या विशेष रूप से हिमकेयर और आयुष्मान योजनाओं के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं और सामग्री की आपूर्ति से संबंधित बताई गई है।
फिलहाल मरीजों और तीमारदारों की नजर लंबित भुगतान जारी होने और दोनों स्वास्थ्य योजनाओं की सुविधा दोबारा शुरू होने पर है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी सरकार से शीघ्र राशि जारी करने का आग्रह किया गया है।
17 एचपीयू में पीजी समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 1 अक्तूबर से
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीजी समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया 1 अक्तूबर से शुरू होगी। विश्वविद्यालय ने पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 अक्तूबर 2026 निर्धारित की है। यह प्रक्रिया विश्वविद्यालय के आरएमई पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी।
विश्वविद्यालय के अनुसार पंजीकरण अनिवार्य है। जिन विद्यार्थियों का निर्धारित अवधि में विश्वविद्यालय में पंजीकरण नहीं होगा, वे आगे परीक्षा फार्म नहीं भर सकेंगे। पंजीकरण प्रक्रिया में नियमित विद्यार्थियों के साथ अन्य संबंधित विद्यार्थी भी शामिल होंगे।पंजीकरण के दायरे में एमए, एमकॉम, एमएससी, एमबीए, एमसीए, बीएड, एमएड, एमपीएड, एलएलबी, एलएलएम, एमटीटीएम, एमएचएम, एमटीए, एमटेक, बीलिब एवं एमलिब सहित विभिन्न पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा पीजी डिप्लोमा और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को भी पंजीकरण करवाना होगा। निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा किया जाएगा।
नई आईडी बनाने की जरूरत नहीं
एचपीयू ने विद्यार्थियों को पंजीकरण के लिए नई आईडी बनाने से बचने को कहा है। नियमित विद्यार्थी प्रवेश या परीक्षा फार्म भरते समय मिली एडमिशन आईडी अथवा यूजर आईडी के माध्यम से छात्र लॉगइन कर आरएमई पोर्टल पर पंजीकरण कर सकेंगे। विश्वविद्यालय ने कॉलेजों और विभागों को भी निर्देश दिए हैं कि सभी पात्र विद्यार्थियों का निर्धारित समय में पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।
ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत विद्यार्थियों द्वारा दर्ज की गई जानकारी और दस्तावेजों की संबंधित कॉलेज, विभाग या संस्थान के स्तर पर जांच की जाएगी। एचपीयू की आधिकारिक वेबसाइट पर भी विद्यार्थियों के लिए पंजीकरण, छात्र पोर्टल और परीक्षा संबंधी सेवाओं के लिंक उपलब्ध हैं।ऐसे में एचपीयू से जुड़े विद्यार्थियों के लिए 1 से 30 अक्तूबर के बीच पंजीकरण पूरा करना जरूरी होगा, ताकि आगामी परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।नुसार मंडियों में ओवरपैकिंग को लेकर शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद निरीक्षण अभियान चलाया गया। वहीं एपीएमसी सोलन के सचिव राघव सूद के अनुसार छोटे आकार के सेब वाले कार्टन में अधिक वजन की समस्या अपेक्षाकृत ज्यादा सामने आई, जबकि बेहतर ग्रेड के सेब वाले कुछ कार्टन भी निर्धारित वजन से अधिक पाए गए।
18 सेब की ओवरपैकिंग पर एपीएमसी की कार्रवाई, शिमला-सोलन में 30 आढ़तियों के चालान
शिमला। सेब सीजन के दौरान कार्टन में निर्धारित मात्रा से अधिक सेब भरने के मामलों पर कृषि उपज मंडी समितियों (एपीएमसी) ने कार्रवाई तेज कर दी है। शिमला और सोलन जिलों की विभिन्न मंडियों में निरीक्षण के दौरान करीब 30 कमीशन एजेंटों के चालान किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार कुछ कार्टन में निर्धारित वजन से काफी अधिक सेब पाया गया।
एपीएमसी अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान कई कार्टन का वजन 27 से 28 किलोग्राम तक पाया गया। वहीं सरकार के निर्देशों के मुताबिक यूनिवर्सल एप्पल कार्टन का सामान्य वजन करीब 22 से 23 किलोग्राम रखा गया है। शिकायतें मिलने के बाद मंडी स्तर पर निरीक्षण किए गए और अधिक वजन वाले कार्टन मिलने पर संबंधित कमीशन एजेंटों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की गई।
एपीएमसी शिमला एवं किन्नौर के सचिव रविंद्र शर्मा के अनुसार मंडियों में ओवरपैकिंग को लेकर शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद निरीक्षण अभियान चलाया गया। वहीं एपीएमसी सोलन के सचिव राघव सूद के अनुसार छोटे आकार के सेब वाले कार्टन में अधिक वजन की समस्या अपेक्षाकृत ज्यादा सामने आई, जबकि बेहतर ग्रेड के सेब वाले कुछ कार्टन भी निर्धारित वजन से अधिक पाए गए।
किसान और आढ़ती आमने-सामने
ओवरपैकिंग को लेकर किसानों और कमीशन एजेंटों के बीच भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ किसान आरोप लगाते हैं कि उन पर अधिक सेब भरने का दबाव रहता है, जबकि कमीशन एजेंटों का कहना है कि कुछ उत्पादक पैकेजिंग खर्च कम करने और कम गुणवत्ता वाले सेब को एक ही कार्टन में समायोजित करने के लिए अधिक पैकिंग करते हैं। यह आरोप-प्रत्यारोप बाजार व्यवस्था में ओवरपैकिंग की समस्या को लेकर विवाद का कारण बना हुआ है।
किसान संगठन की ओर से यह सुझाव भी दिया गया है कि केवल मंडियों में औचक निरीक्षण के बजाय ग्रेडिंग और पैकिंग मशीनों की निगरानी को मजबूत किया जाए। उनका तर्क है कि मानकीकृत ग्रेडिंग और पैकिंग से कार्टन के वजन में होने वाले अंतर को कम किया जा सकता है।हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के तहत एपीएमसी को कृषि उपज के बाजार विनियमन और मंडियों में नियमों के अनुपालन की निगरानी की जिम्मेदारी प्राप्त है।फिलहाल ओवरपैकिंग के खिलाफ कार्रवाई से सेब उत्पादकों और आढ़तियों के बीच मानक वजन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एपीएमसी की ओर से निरीक्षण और कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।

