
(1 ) मानसून की तबाही का जमीनी आकलन करने कांगड़ा पहुंची केंद्रीय टीम
शाहपुर की बोह घाटी में आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण, राहत और पुनर्वास कार्यों की भी ली जानकारी
कांगड़ा। मानसून सीजन के दौरान हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने से हुए नुकसान का जमीनी आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम कांगड़ा पहुंची। छह सदस्यीय दल ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले में हुए नुकसान, राहत, बहाली और पुनर्वास कार्यों की विस्तृत जानकारी ली।
केंद्रीय टीम का नेतृत्व गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु ने किया। टीम में जल शक्ति मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, वित्त मंत्रालय तथा इसरो के अधिकारी शामिल रहे। टीम के सदस्यों ने विभिन्न विभागों से सड़क, पेयजल, बिजली, मकान, कृषि, पशुपालन और शिक्षा क्षेत्र में हुए नुकसान से संबंधित जानकारी प्राप्त की।
गगल हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने केंद्रीय दल का स्वागत किया। इसके बाद अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई, जिसमें मानसून के दौरान हुए नुकसान और प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत एवं बहाली कार्यों की स्थिति से टीम को अवगत करवाया गया।
बोह घाटी में भी पहुंची टीम
केंद्रीय दल ने शाहपुर क्षेत्र की बोह घाटी का भी निरीक्षण किया। बोह घाटी में मानसून के दौरान बादल फटने और अचानक आई बाढ़ से व्यापक नुकसान हुआ था। टीम ने प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर आपदा से हुए नुकसान की स्थिति को मौके पर देखा और अधिकारियों से राहत तथा पुनर्वास संबंधी जानकारी ली।
केंद्रीय टीम का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब हिमाचल प्रदेश सरकार ने मानसून से हुए भारी नुकसान के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता की मांग की है। राज्य में मानसून से हुए कुल नुकसान का आंकड़ा 3,200 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।
टीम के जमीनी निरीक्षण और संबंधित विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर आपदा से हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा रहा है। इसके बाद राहत, पुनर्स्थापना और पुनर्वास के लिए आवश्यक सहायता के संबंध में आगे की प्रक्रिया तय होने की उम्मीद है।
(2 ) नगर निगम शिमला में बंदरों और कुत्तों के मुद्दे पर बवाल, मेयर की सख्त चेतावनी के खिलाफ नागरिकों का प्रदर्शन
शिमला:नगर निगम (MC) शिमला की हालिया सदन बैठक में बंदरों और आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर जमकर हंगामा हुआ। एक ओर जहां पार्षदों ने शहर में बढ़ती बेसहारा पशुओं की समस्या पर चिंता जताई, वहीं दूसरी ओर पशु प्रेमियों और आम नागरिकों ने नगर निगम मुख्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना देकर अपनी मांगों को बुलंद किया।
नगर निगम और मेयर का रुख
सदन की बैठक में आवारा कुत्तों के काटने और बंदरों के आतंक की बढ़ती शिकायतों पर चर्चा हुई। मामले को शांत करने और शहर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए मेयर ने कड़ा रुख अपनाया है:
निर्धारित फीडिंग पॉइंट्स: मेयर ने स्पष्ट किया कि शहर में पशुओं को भोजन देने के लिए विशेष स्थान (फीडिंग पॉइंट्स) तय किए गए हैं।
कार्रवाई की चेतावनी: निर्धारित स्थानों के बाहर सार्वजनिक जगहों पर पशुओं को खाना खिलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि इससे गंदगी फैलती है और आम जनता को असुविधा होती है।नियमों का सख्ती से पालन: निगम प्रशासन का जोर इस बात पर है कि नियमों को लागू करके ही आवारा पशुओं की अव्यवस्था पर काबू पाया जा सकता है।
पशु प्रेमियों और नागरिकों की मांगें
सदन के बाहर धरने पर बैठे नागरिकों और एनिमल राइट्स कार्यकर्ताओं ने निगम के रुख पर नाराजगी व्यक्त की। उनका तर्क है कि केवल दंडात्मक कार्रवाई से इस जटिल समस्या का समाधान संभव नहीं है:वैज्ञानिक और मानवीय प्रबंधन: प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि बंदरों और कुत्तों की समस्या का समाधान ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ (ABC) नियमों के तहत नसबंदी, बड़े पैमाने पर टीकाकरण और व्यवस्थित पशु प्रबंधन से किया जाए।
व्यावहारिक फीडिंग जोन: पशु प्रेमियों का कहना है कि नगर निगम को पर्याप्त और सुलभ फीडिंग पॉइंट्स बनाने चाहिए ताकि जानवरों को भूखा न रहना पड़े।
संवाद से समाधान: नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि कोई भी सख्त कदम उठाने या जुर्माना लगाने से पहले स्थानीय निवासियों, पशु कल्याण संगठनों और विशेषज्ञों के साथ बैठक कर एक व्यावहारिक रास्ता निकाला जाए।
शहर की वर्तमान स्थिति
स्थानीय लोगों के अनुसार, शिमला के कई आवासीय क्षेत्रों और बाजारों में बंदरों के हमले तथा आवारा कुत्तों के झुंड से लोग परेशान हैं। हालांकि, नागरिक समाज का मानना है कि जानवरों के प्रति क्रूरता या अचानक भोजन बंद कर देने से वे और अधिक आक्रामक हो सकते हैं। फिलहाल, नगर निगम प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के बीच इस मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है।
(3) चिंतपूर्णी (हिमाचल प्रदेश): प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री चिंतपूर्णी मंदिर का जल्द ही₹206 करोड़ की लागत से भव्य और आधुनिक रूप में कायाकल्प होने जा रहा है। तै
चिंतपूर्णी (हिमाचल प्रदेश): प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री चिंतपूर्णी मंदिर का जल्द ही भव्य और आधुनिक रूप में कायाकल्प होने जा रहा है। ₹206 करोड़ की लागत से तैयार इस महत्वाकांक्षी पुनर्विकास परियोजना (Redevelopment Project) की सभी प्रशासनिक व तकनीकी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। आने वाले नवरात्र के अवसर पर इस योजना का शिलान्यास कर निर्माण कार्य आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया कि मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यह मास्टर प्लान तैयार किया गया है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं एवं सुविधाएं
प्रसाद योजना के तहत विकास: मंदिर क्षेत्र का सौंदर्यीकरण और अवसंरचना विकास केंद्र सरकार की ‘प्रसाद’ (PRASHAD) योजना तथा राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है।
सुगम दर्शन मार्ग व कतार प्रबंधन: श्रद्धालुओं को घंटों धूप व बारिश में न खड़ा होना पड़े, इसके लिए आधुनिक क्यू कॉम्प्लेक्स (Queue Complex) और वातानुकूलित वेटिंग हॉल का निर्माण होगा।
लिफ्ट और एस्केलेटर: बुजुर्गों, दिव्यांगों और बच्चों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर और पार्किंग क्षेत्र के बीच लिफ्ट एवं एस्केलेटर लगाए जाएंगे।
मल्टी-लेवल पार्किंग: चिंतपूर्णी में ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए विशाल मल्टी-लेवल पार्किंग का निर्माण किया जाएगा।
सुरक्षा एवं सीसीटीवी निगरानी: संपूर्ण मंदिर न्यास क्षेत्र को आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों, हाई-टेक सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम से लैस किया जाएगा।उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य के दौरान श्रद्धालुओं की दैनिक पूजा-अर्चना और दर्शन में किसी भी प्रकार की बाधा न आए। कार्य तय समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाएगा।
(4) 26 सितंबर से पुराना कांगड़ा डाकघर बंद होने के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया। जनता ने डाक सेवाएं बहाल करने या क्षेत्र में उपडाकघर खोलने की मांग उठाई।
पुराना कांगड़ा डाकघर बंद होने पर भड़का जनाक्रोश, सड़क पर उतरे लोग
डाकघर बंद, सेवाएं समेला शिफ्ट; लोगों की चेतावनी—मांग नहीं मानी तो हाईवे करेंगे जाम
कांगड़ा:पुराना कांगड़ा में डाकघर बंद किए जाने को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध खुलकर सामने आया है। 26 सितंबर से डाकघर की सेवाएं बंद होने के बाद लोगों ने प्रदर्शन कर नारेबाजी की और डाक विभाग के फैसले पर रोष जताया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पुराना कांगड़ा में डाक सेवाएं फिर से शुरू की जाएं, ताकि क्षेत्र के लोगों को छोटी-छोटी डाक संबंधी जरूरतों के लिए दूसरे स्थान पर न जाना पड़े।स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराना कांगड़ा में लंबे समय से डाकघर संचालित होने के कारण आसपास के लोगों को डाक, बचत खाते और अन्य संबंधित सेवाओं की सुविधा स्थानीय स्तर पर मिलती रही है। अब कार्यालय बंद होने के बाद लोगों को करीब चार किलोमीटर दूर समेला उपडाकघर जाना पड़ रहा है। इससे खासकर बुजुर्गों और नियमित रूप से डाकघर की सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों को परेशानी होने की बात कही जा रही है।
डाक विभाग की ओर से पुराना कांगड़ा डाकघर को 26 सितंबर से डिफंक्शन किए जाने की पुष्टि की गई है। विभाग के अनुसार यहां संचालित बचत खातों को समेला उपडाकघर में स्थानांतरित किया गया है। विभागीय व्यवस्था के तहत अब संबंधित उपभोक्ताओं को अपनी बैंकिंग और डाक संबंधी जरूरतों के लिए समेला का रुख करना होगा।वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी कारणवश पूर्ण डाकघर का संचालन संभव नहीं है तो कम से कम उपडाकघर या नॉन-डिलीवरी ब्रांच ऑफिस की व्यवस्था पुराना कांगड़ा में की जानी चाहिए। इससे क्षेत्र के लोगों को बुनियादी डाक सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पुराना कांगड़ा ऐतिहासिक क्षेत्र है और यहां लंबे समय से डाकघर की सुविधा उपलब्ध रही है। ऐसे में अचानक सेवा बंद होने से लोगों में असंतोष है। लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर जनहित में निर्णय लेने की मांग की।स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने जरूरत पड़ने पर हाईवे जाम करने की चेतावनी भी दी है।जानकारी के अनुसार, करीब तीन वर्ष पहले भी पुराना कांगड़ा डाकघर बंद करने का प्रस्ताव सामने आया था, लेकिन स्थानीय विरोध के बाद मामला आगे नहीं बढ़ा था। अब दोबारा डाकघर बंद किए जाने से लोगों ने फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठाई है।डाक विभाग देहरा मंडल के अधीक्षक संजीव शर्मा ने डाकघर के 26 सितंबर से डिफंक्शन किए जाने की पुष्टि की है। अब पूरे मामले में स्थानीय लोगों की निगाहें विभाग और प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं।
(5)नालागढ़ में ग्रेनेड मिलने की सूचना से हड़कंप, पुलिस ने घेरा क्षेत्र; बम निरोधक दस्ते को बुलाने की तैयारी
सोलन/नालागढ़: औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के दयोली गांव में मंगलवार सुबह मकान की दीवार के पास संदिग्ध ग्रेनेड मिलने की सूचना से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और एहतियात के तौर पर घटनास्थल के आसपास का क्षेत्र घेरकर लोगों की आवाजाही रोक दी। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक आसपास के लोगों को भी सुरक्षित दूरी पर किया गया।
सूत्रों के अनुसार, घटना से एक रात पहले गांव में दो परिवारों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों में मारपीट हुई। इस मामले में दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने क्रॉस केस दर्ज किया है। इसके कुछ घंटे बाद एक पक्ष ने अपने घर की दीवार के पास ग्रेनेड जैसी वस्तु पड़े होने की सूचना पुलिस को दी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। संदिग्ध वस्तु की वास्तविक प्रकृति की पुष्टि अभी तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने इसे फिलहाल संदिग्ध ग्रेनेडनुमा वस्तु मानते हुए सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इसे सुरक्षित तरीके से जांचने और निष्क्रिय करने के लिए बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया है।
पुलिस की प्राथमिकता मौके पर सुरक्षा सुनिश्चित करना और संदिग्ध वस्तु को विशेषज्ञों की निगरानी में सुरक्षित तरीके से हटाना है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि यह वस्तु वहां कैसे पहुंची और इसका आपसी विवाद से कोई संबंध है या नहीं। फिलहाल पुलिस ने ग्रेनेड के वास्तविक होने की अंतिम पुष्टि नहीं की है।

