मुख्यमंत्री सुक्खू ने इसे प्रदेश सरकार की बड़ी कानूनी जीत बताया, जयराम ठाकुर ने 125 यूनिट मुफ्त बिजली बहाल करने की उठाई मांग

हिमाचल प्रदेश के लंबे समय से लंबित भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) एरियर मामले में प्रदेश के पक्ष में आए फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी आमने-सामने आ गई हैं।
जहां मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसे प्रदेश सरकार की बड़ी उपलब्धि करार दिया है, वहीं नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े करते हुए आम बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के अनुसार, बीबीएमबी एरियर मामले में हिमाचल के पक्ष में आया फैसला प्रदेश सरकार के लगातार प्रयासों, राजनीतिक इच्छाशक्ति और कानूनी लड़ाई का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने पिछले लगभग चार वर्षों के कार्यकाल में राजनीतिक और कानूनी मोर्चों पर संघर्ष करते हुए प्रदेश के हित में यह चौथी बड़ी जीत हासिल की है। सरकार का मानना है कि इस तरह के फैसले हिमाचल प्रदेश के वित्तीय और आर्थिक हितों को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई को भी नई दिशा देते हैं।

दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के उपलब्धि संबंधी दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार को केवल बड़ी जीत का श्रेय लेने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रदेश के आम नागरिकों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने बिजली उपभोक्ताओं को 24 घंटे सस्ती बिजली उपलब्ध करवाने तथा पूर्व में दी जा रही 125 यूनिट निशुल्क बिजली की सुविधा बहाल करने की मांग उठाई।
इस राजनीतिक टकराव के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बीबीएमबी मामले में हिमाचल के अधिकारों को लेकर मिली कानूनी सफलता का वास्तविक आर्थिक लाभ प्रदेश को किस प्रकार और कब तक मिलेगा।
दरअसल, हिमाचल प्रदेश लंबे समय से अपने जलविद्युत संसाधनों और उनसे जुड़े आर्थिक अधिकारों की हिस्सेदारी का मुद्दा उठाता रहा है। ऐसे में बीबीएमबी एरियर का मामला केवल राजनीतिक श्रेय लेने का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के वित्तीय हितों और भविष्य की आर्थिक मजबूती से भी जुड़ा हुआ है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस इसे अपनी सरकार की उपलब्धि बता रही है, जबकि भाजपा इस सफलता के साथ आम जनता को राहत देने की जवाबदेही भी जोड़ रही है। अब प्रदेश की जनता की नजर इस बात पर रहेगी कि कानूनी जीत के दावों के बीच बिजली उपभोक्ताओं को कितनी राहत मिलती है और हिमाचल के आर्थिक हितों को कितना वास्तविक लाभ पहुंचता है।

