कुंस्सल में गूंजा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उल्लास, स्वामी विज्ञानानंद बोले—धर्म की स्थापना के लिए हुआ भगवान का अवतार
श्री हरि कथा के चौथे दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, प्रेम, सेवा, सत्य और सदाचार को जीवन में अपनाने का दिया संदेश

नूरपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से स्थानीय कुंस्सल में आयोजित पांच दिवसीय श्री हरि कथा के चौथे दिन मंदिर प्रांगण में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के दिव्य प्रसंग का आनंद लिया।

कथा के दौरान दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं कथा व्यास स्वामी विज्ञानानंद जी ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतार तथा उनके दिव्य जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म और अन्याय पर न्याय की विजय का दिव्य संदेश देने वाला पर्व है।
स्वामी विज्ञानानंद ने कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म, अत्याचार और अन्याय बढ़ता है, तब धर्म की पुनः स्थापना के लिए भगवान का अवतार होता है। भगवान श्रीकृष्ण का अवतार भी अत्याचार के अंत और धर्म की स्थापना के उद्देश्य से हुआ। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन मानवता को प्रेम, करुणा, सत्य, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कथा के माध्यम से श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और उनके जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के प्रत्येक चरण में मानव कल्याण का संदेश दिया। कंस के अत्याचार से लेकर गोकुलवासियों की रक्षा और आगे चलकर धर्म की स्थापना तक उनके जीवन का प्रत्येक प्रसंग संघर्ष के बीच सत्य और धर्म के साथ खड़े रहने की प्रेरणा देता है।
स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में मानसिक शांति और आध्यात्मिक मूल्यों से दूर होता जा रहा है। ऐसे समय में भगवान श्रीकृष्ण का जीवन मनुष्य को कर्म, भक्ति और ज्ञान के संतुलन का मार्ग दिखाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें तथा प्रेम, सेवा, सदाचार और मानव कल्याण की भावना के साथ जीवन व्यतीत करें।श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

