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भवन निर्माण न रहा आसान, ईंट के दाम चढ़े आसमान मौजूदा सरकार में कांगड़ा चंबा जिला में *

RamParkash Vats
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नूरपुर प्रदेश के कांगड़ा चंबा जिला में भवन निर्माण करना हो या अपना आशियाना बनाने का सपना, अब इसे पूरा करना लोगों के लिए लगातार महंगा होता जा रहा है। भवन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली ईंटों के दाम में पिछले कुछ समय में भारी बढ़ोतरी हुई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार थोड़े समय में ही ईंट की कीमत करीब दोगुनी हो गई है, जिससे निर्माण कार्य का बजट भी प्रभावित हो रहा है।कांगड़ा और चंबा जिलों में ईंट उत्पादन नाममात्र का है। नूरपुर क्षेत्र में भी महज आधा दर्जन के करीब ईंट भट्टे ही संचालित हो रहे हैं। ऐसे में दोनों जिलों की ईंट की मांग मुख्य रूप से पड़ोसी राज्य पंजाब से आने वाली आपूर्ति पर निर्भर है। बताया जाता है कि करीब 90 प्रतिशत ईंट की आपूर्ति पंजाब से ही होती है।वर्तमान में पंजाब के मोगा जिले तथा गुरदासपुर जिले के दीनानगर क्षेत्र में स्थित ईंट भट्टे कांगड़ा और चंबा जिलों में निर्माण कार्यों के लिए ईंट की मांग पूरी कर रहे हैं।

यहां से ट्रकों के माध्यम से ईंटें सीमावर्ती क्षेत्र कंडवाल तक पहुंचाई जाती हैं, जहां विभिन्न स्थानों पर ईंटों के डंप लगाकर इन्हें आगे बेचा जाता है जो काफी सीमा तक अवैध रूप में एक व्यापार बन गया है चाहे प्रदेश में सरकार किसी भी पार्टी की हो लेकिन इनका धंधा नहीं रुकता l ईंटों के दाम में हुई बढ़ोतरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पंजाब के ईंट भट्टों पर अव्वल गुणवत्ता की ईंट का भाव करीब 9 हजार रुपये प्रति हजार ईंट तक पहुंच गया है। कुछ समय पहले यही भाव करीब 5 से 6 हजार रुपये प्रति हजार ईंट बताया जा रहा था।

वहीं कंडवाल क्षेत्र में बने डंपों पर उच्च गुणवत्ता की ईंट के दाम 11 हजार रुपये प्रति हजार से अधिक तथा मध्यम गुणवत्ता की ईंट के दाम 7 से 8 हजार रुपये प्रति हजार तक पहुंच गए हैं।स्थानीय क्षेत्रवासियों का कहना है कि कांगड़ा और चंबा जिलों में ईंट उत्पादन की कमी का लाभ पंजाब के ईंट उत्पादक उठा रहे हैं। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन होने से लोगों को दूर-दराज से आने वाली महंगी ईंटों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।वहीं ईंट उत्पादकों का कहना है कि ईंट के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, मजदूरी, ईंधन और परिवहन सहित अन्य खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसी कारण ईंट के दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी है।कुल मिलाकर ईंट के लगातार बढ़ते दामों ने आम लोगों के लिए नए मकान का निर्माण पहले की अपेक्षा कहीं अधिक महंगा और कठिन बना दिया है

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