अगर मंजिल तक पहुंचने का सच्चा जज्बा दिल में हो, तो कोई भी मुश्किल इंसान का रास्ता रोक नहीं सकती। जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मजबूत इरादे और निरंतर मेहनत के सामने हर बाधा छोटी पड़ जाती है। सफलता उन्हीं लोगों के कदम चूमती है, जो असफलताओं से घबराते नहीं, बल्कि हर ठोकर से सीख लेकर आगे बढ़ते हैं। इसलिए कहा गया है—“खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से पूछे, बता तेरी रज़ा क्या है।” अपने सपनों पर विश्वास रखिए, मेहनत को अपना साथी बनाइए और लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहिए। मंजिल अवश्य मिलेगी।

संगड़ाह क्षेत्र के भुजोंड गांव की बेटी हिमांशी ने अपनी मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर शिक्षक बनने का सपना साकार किया है। हिमांशी पुत्री स्वर्गीय मुल्तान सिंह ने बीते कल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कल्होग, जिला सोलन में TGT आर्ट्स के पद पर ज्वाइन कर अपना कार्यभार संभाल लिया है। वह कल्होग स्कूल के अधीन आने वाले राजकीय मिडल स्कूल बैनू में अपनी सेवाएं देंगी।
हिमांशी की सफलता की कहानी संघर्ष और हौसले की मिसाल है। जब वह महज चार वर्ष की थीं, तभी एक सड़क हादसे में उनके पिता स्वर्गीय मुल्तान सिंह का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां सुरेखा देवी ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
मां के संघर्ष और त्याग को अपनी प्रेरणा बनाकर हिमांशी ने पढ़ाई में कड़ी मेहनत की। हाल ही में HPRCA हमीरपुर द्वारा 425 पदों के लिए आयोजित TGT आर्ट्स भर्ती प्रक्रिया में उनका चयन हुआ। चयन के बाद अब उन्होंने शिक्षक के रूप में अपनी सेवाओं की शुरुआत कर दी है।
ज्वाइनिंग के दौरान विद्यालय की प्रधानाचार्य एवं समस्त स्टाफ ने हिमांशी का स्वागत किया और उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। हिमांशी ने कहा कि वह विद्यार्थियों को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ शिक्षा प्रदान करेंगी तथा अपनी मां के वर्षों के संघर्ष और त्याग को सार्थक करने का प्रयास करेंगी।
हिमांशी की इस उपलब्धि से भुजोंड गांव सहित पूरे संगड़ाह क्षेत्र में खुशी की लहर है। क्षेत्रवासियों ने हिमांशी और उनके परिवार को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

