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मंत्री जगत सिंह नेगी के चंबा पहुंचने पर भाजपा का विरोध, काले झंडे और ‘गो बैक’ के नारों से गरमाई सियासत

RamParkash Vats
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मंत्री जगत सिंह नेगी के चंबा पहुंचते ही भाजपा का विरोध, काले झंडों के साथ ‘गो बैक’ के नारे; स्वास्थ्य और बसों के मुद्दे पर सरकार को घेरा

मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत और परिवहन व्यवस्था पर भाजपा के सवाल, मंत्री के दौरे में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी उठे प्रशासनिक सवाल

चंबा। प्रदेश सरकार के मंत्री जगत सिंह नेगी के चंबा प्रवास के दौरान भाजपा नेता जय सिंह और उनके समर्थकों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जाने से जिला मुख्यालय की राजनीति गरमा गई। प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे दिखाते हुए ‘गो बैक’ के नारे लगाए और प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। जय सिंह ने सरकार पर चंबा की जनता की मांगों और समस्याओं की अनदेखी करने तथा किए गए वादों को पूरा नहीं करने के आरोप लगाए।

चंबा में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भाजपा पहले से सरकार पर सवाल उठाती रही है। हाल में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जय सिंह ने मेडिकल कॉलेज चंबा की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन किया था। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में हुई मौतों से संबंधित जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी।

इलेक्ट्रिक बसों के बाद डीजल बसों पर सवालविरोध प्रदर्शन के दौरान एचआरटीसी बसों का मुद्दा भी उठाया गया। जय सिंह ने सवाल किया कि चंबा डिपो के लिए घोषित 10 इलेक्ट्रिक बसें तो पहुंच गईं, लेकिन जिन 10 डीजल बसों की घोषणा की गई थी, उनका वास्तविक संचालन और उपलब्धता कहां है।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 19 सितंबर को उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने चंबा डिपो के लिए 10 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई थी। कुछ रिपोर्टों में इसी कार्यक्रम के दौरान 10 डीजल बसों की सौगात दिए जाने का भी उल्लेख है।भाजपा नेता का सवाल है कि यदि डीजल बसें भी चंबा को उपलब्ध कराई गई हैं तो उनकी स्थिति और संचालन के बारे में जनता को स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है।

मेडिकल कॉलेज में बच्ची की मौत बनी बड़ा राजनीतिक मुद्दा

चंबा मेडिकल कॉलेज में डेढ़ वर्षीय बच्ची की उपचार के दौरान मौत के बाद परिजनों की ओर से उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए गए थे। मामले को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने जांच की प्रक्रिया शुरू की थी। बाद में तीन सदस्यीय जांच कमेटी द्वारा रिपोर्ट तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई।जय सिंह इस मामले को लेकर लगातार जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। 22 सितंबर को उनके प्रदर्शन के दौरान भी मेडिकल कॉलेज में हुई मौतों से संबंधित दोनों जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई थी। उन्होंने सरकार को समयबद्ध कार्रवाई का अल्टीमेटम दिए जाने की बात भी कही थी।हालांकि, किसी भी चिकित्सक या अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से दोषी ठहराने से पहले जांच रिपोर्ट और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना आवश्यक होगा। यही कारण है कि इस मामले में राजनीतिक आरोपों और जांच के तथ्यात्मक निष्कर्षों को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण है।

‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दावे पर विपक्ष का सवाल

भाजपा के विरोध का राजनीतिक संदेश केवल एक मंत्री के दौरे तक सीमित नहीं दिखाई देता। विपक्ष लगातार सरकार के ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दावे को प्रशासनिक कामकाज, स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन और स्थानीय विकास के मुद्दों से जोड़कर सवाल उठा रहा है।जय सिंह और उनके समर्थकों की ओर से उठाए गए सवालों में यह भी शामिल है कि यदि किसी विभाग या संस्थान में व्यवस्थागत कमी पहले से सामने आ रही थी, तो उसका समाधान समय रहते क्यों नहीं किया गया। मेडिकल कॉलेज में सामने आए विवाद और परिवहन व्यवस्था से जुड़े सवालों को भाजपा इसी व्यापक प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे से जोड़ रही है।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

मंत्री के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन और काले झंडे दिखाए जाने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। मंत्री के कार्यक्रम की सूचना पहले से प्रशासन के पास रहती है। ऐसे में विरोध प्रदर्शन किस स्थान और किस स्तर तक पहुंचा, प्रदर्शनकारियों को वहां तक पहुंचने से रोकने अथवा नियंत्रित करने के लिए क्या व्यवस्था थी—ये प्रशासनिक स्तर पर उठने वाले सवाल हैं।हालांकि सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई या नहीं, इसका निष्कर्ष संबंधित प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के तथ्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। घटना के बाद राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज होना स्वाभाविक है।

2027 से पहले चंबा में बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव

हिमाचल विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए स्थानीय मुद्दों का राजनीतिक महत्व बढ़ना तय है। स्वास्थ्य सुविधाएं, परिवहन, सरकारी संस्थानों की कार्यप्रणाली, सड़कें, रोजगार और विकास कार्य जैसे मुद्दे आने वाले समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का आधार बन सकते हैं।चंबा में भाजपा का यह विरोध इसी व्यापक राजनीतिक माहौल की एक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष के लिए चुनौती यह होगी कि वह उठाए गए सवालों को तथ्य, दस्तावेज और स्थानीय समस्याओं से जोड़े, जबकि सरकार और प्रशासन के सामने इन आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देने की जिम्मेदारी होगी।फिलहाल जगत सिंह नेगी के चंबा दौरे के दौरान भाजपा के विरोध ने स्थानीय राजनीति को जरूर गरमा दिया है। अब सरकार और संबंधित विभागों की ओर से बसों, मेडिकल कॉलेज की जांच तथा प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े सवालों पर क्या आधिकारिक जवाब आता है, यह इस राजनीतिक विवाद की अगली दिशा तय करेगा।

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