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श्री हरि कथा आत्म जाग्रति का दिव्य साधन है:- स्वामी*विज्ञानानंद *

RamParkash Vats
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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा स्थानीय पैलेस में पांच दिवसीय श्री हरि कथा का आयोजन किया गया। जिसके आज प्रथम दिवस संस्थान की ओर से दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं कथा व्यास स्वामी विज्ञानानंद जी ने श्री हरि कथा महात्मय विषय पर अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य बाहरी सुख-सुविधाओं के पीछे भागते हुए मानसिक तनाव, अशांति और दुखों से घिरता जा रहा है। ऐसे समय में भगवान की कथा मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करती है और आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करती है।स्वामी विज्ञानानंद जी ने कहा कि श्री हरि कथा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का दिव्य साधन है। जब मनुष्य श्रद्धा और भक्ति भाव से भगवान की कथा सुनता है, तब उसके अंतर्मन के विकार दूर होने लगते हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है। उन्होंने बताया कि संत-महापुरुषों ने सदैव मानवता को ईश्वर से जोड़ने के लिए कथा एवं सत्संग का माध्यम अपनाया है।

उन्होंने आगे कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और कथा श्रवण ही सबसे सरल एवं श्रेष्ठ साधना है। हरि कथा मनुष्य को धर्म, सत्य, प्रेम और करुणा जैसे मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती है। कथा के माध्यम से व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानकर परमात्मा से जुड़ सकता है। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति में भक्ति एवं आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के दौरान महात्मा अश्वनी और मनप्रीत ने भजन-कीर्तन के द्वारा वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथा के अंत में विश्व शांति, मानव कल्याण एवं समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत होने की प्रार्थना की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ शुभम कुमार, जगदीश चौहान, देसराज, अजवीर कटोच द्वारा ज्योति प्रज्वलित कर किया गया।संस्थान की कांगड़ा शाखा के संयोजक स्वामी हरीशानंद ने बताया कि यह पांच दिवसीय श्री हरि कथा प्रतिदिन आयोजित होगी, जिसमें विभिन्न आध्यात्मिक विषयों पर प्रवचन दिए जाएंगे। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा का लाभ लेने का आग्रह किया।

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