कोटला थाना उद्घाटन के बाद प्रोटोकॉल छोड़ बुजुर्ग से आत्मीय संवाद, पानी पिलाकर जाना हालचाल
न्यूज इंडिया आजतक संसदीय क्षेत्र कांगड़ा -चंम्बा चीफ ब्यूरो विनय महाजन
नूरपुर। पुलिस की वर्दी अक्सर कानून-व्यवस्था, अनुशासन और जिम्मेदारी की पहचान मानी जाती है, लेकिन जब यही वर्दी मानवता और संवेदनशीलता का परिचय देती है तो उसका प्रभाव लोगों के दिलों पर लंबे समय तक रहता है। ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य पुलिस जिला नूरपुर की एसपी इल्मा अफरोज के व्यवहार में देखने को मिला।
हाल ही में थाना कोटला के नए भवन के उद्घाटन समारोह के संपन्न होने के बाद एसपी इल्मा अफरोज ने औपचारिक प्रोटोकॉल से अलग हटकर एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ कुछ समय बिताया। उन्होंने बुजुर्ग का हालचाल जाना, उन्हें पानी पिलाया और काफी देर तक सहज भाव से बातचीत की। इस दौरान उनके व्यवहार में न तो किसी बड़े अधिकारी का औपचारिक अंदाज नजर आया और न ही पद का कोई अहसास। वह एक सामान्य नागरिक की तरह बुजुर्ग के साथ आत्मीयता से बातचीत करती दिखाई दीं।
इस मुलाकात का सबसे भावुक पहलू उस समय सामने आया, जब बातचीत समाप्त होने के बाद बुजुर्ग व्यक्ति ने वहां मौजूद लोगों से मासूमियत से पूछा कि “ये पुलिस वाले कौन थे?” जब उन्हें बताया गया कि उनके साथ बातचीत करने वाली अधिकारी नूरपुर जिला की पुलिस अधीक्षक इल्मा अफरोज थीं, तो बुजुर्ग हैरान रह गए।
बुजुर्ग का कहना था कि इतने बड़े पद पर होने के बावजूद एसपी का व्यवहार इतना सहज और अपनापन भरा था कि उन्हें यह महसूस ही नहीं हुआ कि वह जिले की वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से बातचीत कर रहे हैं।
एसपी इल्मा अफरोज का यह व्यवहार इस बात का संदेश देता है कि पुलिसिंग केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर, बुजुर्ग और जरूरतमंद वर्ग के प्रति संवेदनशीलता भी उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। किसी बुजुर्ग को सम्मान देना, उसकी बात सुनना और जरूरत के समय उसके साथ कुछ पल खड़े होना भी समाजसेवा का ही एक रूप है।
क्षेत्र के लोगों ने एसपी इल्मा अफरोज के इस मानवीय व्यवहार की सराहना करते हुए कहा कि अधिकारी का असली कद केवल उसके पद से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और आम आदमी के प्रति संवेदनशीलता से दिखाई देता है। लोगों का कहना है कि पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी वरिष्ठ नागरिकों के प्रति इसी प्रकार सम्मान और संवेदना का व्यवहार अपनाएं तो पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता और मजबूत हो सकता है।
कोटला में सामने आया यह छोटा-सा मानवीय प्रसंग यह संदेश जरूर छोड़ गया कि वर्दी की असली गरिमा तब और बढ़ जाती है, जब उसके पीछे एक संवेदनशील इंसान दिखाई देता है।

