हर दावेदार अपने-अपने वोट बैंक को साधने में जुटा, चुनावी प्रचार ने पकड़ी रफ्तार; समय रहते चेहरों की खींचतान नहीं थमी तो भाजपा को नुकसान की आशंका

फतेहपुर भाजपा मंडल में ‘एक अनार, सौ बीमार’ की सियासत, टिकट के लिए करीब पांच चेहरे मैदान में
लगातार चुनावी असफलता के बीच ‘धरतीपुत्र’ की राजनीति भी बनी बड़ा सवाल, हाईकमान के सामने चुनौती—एक चेहरे पर कैसे बनेगी सहमति?
न्यूज इंडिया आजतक संसदीय क्षेत्र कांगड़ा -चंम्बा चीफ ब्यूरो विनय महाजन
नूरपुर: हिमाचल प्रदेश के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के भीतर टिकट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। भाजपा के करीब पांच प्रमुख नेता विधानसभा टिकट की दौड़ में अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए क्षेत्र में लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। कोई अपने पुराने राजनीतिक संपर्कों को मजबूत करने में जुटा है तो कोई कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच पहुंच बढ़ाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। फतेहपुर की राजनीति में इन दिनों सबसे अधिक चर्चा इसी बात की है कि भाजपा हाईकमान आखिर किस चेहरे पर भरोसा जताएगा। राजनीतिक गलियारों में मौजूदा स्थिति को ‘एक अनार, सौ बीमार’ की कहावत से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि दावेदारों की संख्या लगभग पांच बताई जा रही है, लेकिन सभी अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र में खुद को मजबूत विकल्प के तौर पर पेश करने में जुटे हैं। विधानसभा चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता ने फतेहपुर की राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है। क्षेत्र में बैठकों, जनसंपर्क, सामाजिक कार्यक्रमों और कार्यकर्ताओं से मुलाकातों का सिलसिला लगातार आगे बढ़ रहा है। यही कारण है कि भाजपा के अंदर टिकट की लड़ाई अब केवल संगठनात्मक दावेदारी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि संभावित प्रत्याशी अपने-अपने मतदाताओं और समर्थकों के बीच राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं। स्थानीय राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं के बीच समय रहते सहमति नहीं बनी तो चुनाव के नजदीक आने पर यह अंदरूनी प्रतिस्पर्धा पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है।
फतेहपुर में संगठन की एकजुटता भाजपा के लिए सबसे बड़ी परीक्षा
फतेहपुर भाजपा मंडल में टिकट के अनेक दावेदार होने की स्थिति कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के भीतर टिकट को लेकर अलग-अलग नेताओं के समर्थक अपने-अपने स्तर पर सक्रिय रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह फतेहपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं की एक बैठक भी आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जिला परिषद कांगड़ा के पूर्व उपाध्यक्ष एवं भाजपा प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक जगदेव ठाकुर ने की। बैठक में विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा की गई तथा संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने का आह्वान किया गया। बैठक में प्रदेश की कांग्रेस सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा हुई। युवाओं की ओर से सरकार के प्रति असंतोष व्यक्त किए जाने और आगामी चुनाव में भाजपा को मजबूत करने का संकल्प लेने की बात कही गई। जगदेव ठाकुर ने दावा किया कि फतेहपुर की जनता प्रदेश सरकार की नीतियों से परेशान है और 2027 में भाजपा यहां जीत का परचम लहराएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से घर-घर जाकर जनता से संपर्क करने और सरकार की कथित नाकामियों को लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया। राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो इस बैठक का संदेश केवल कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि भाजपा के अंदर संगठनात्मक एकजुटता की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण दिखाई देती है। पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि अलग-अलग दावेदारों की सक्रियता के बावजूद चुनावी समय में सभी नेता और उनके समर्थक एक ही उम्मीदवार के पीछे पूरी ताकत से खड़े हों।
‘धरतीपुत्र’ के नारे से टिकट की लड़ाई तक, भाजपा के सामने कई सवाल
फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पार्टी लंबे समय से इस सीट पर अपनी जीत दर्ज करने के लिए संघर्ष करती रही है। ऐसे में 2027 का चुनाव भाजपा के लिए केवल एक और चुनाव नहीं, बल्कि संगठन की जमीन पर अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने का अवसर भी माना जा रहा है। क्षेत्र में ‘धरतीपुत्र’ की राजनीति का मुद्दा भी समय-समय पर उठता रहा है। भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल चर्चा में रहता है कि स्थानीय चेहरे को प्राथमिकता देने की मांग और पार्टी हाईकमान की चुनावी रणनीति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा को फतेहपुर में समय रहते इस स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। यदि टिकट के दावेदारों की आपसी खींचतान चुनाव तक जारी रहती है और टिकट घोषित होने के बाद भी असंतोष दबा नहीं, तो इसका सीधा असर पार्टी के वोट बैंक और बूथ प्रबंधन पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि हाईकमान समय रहते संभावित दावेदारों के बीच संवाद स्थापित कर एक मजबूत चेहरे के पक्ष में सहमति बनाने में सफल रहता है तथा टिकट के अन्य दावेदारों को संगठन के साथ जोड़कर रखा जाता है, तो भाजपा के लिए फतेहपुर में मुकाबला मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। फिलहाल करीब पांच नेताओं की सक्रियता ने विधानसभा क्षेत्र की राजनीति को रोचक बना दिया है। हर दावेदार अपने प्रभाव क्षेत्र में राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटा है और समर्थक भी अपने-अपने नेता को टिकट का सबसे मजबूत हकदार बता रहे हैं। अब निगाहें भाजपा हाईकमान पर हैं कि वह किस चेहरे को मैदान में उतारता है। फतेहपुर में भाजपा के लिए असली परीक्षा टिकट मिलने के बाद शुरू होगी—क्या सभी दावेदार एक मंच पर आकर पार्टी प्रत्याशी के लिए काम करेंगे या ‘एक अनार, सौ बीमार’ की यह सियासत चुनावी नतीजों पर असर डालेगी, इसका जवाब 2027 का चुनाव ही देगा।

