सदस्यता अभियान और संगठन विस्तार के जरिए 2027 की जमीन तैयार करने में जुटी आम आदमी पार्टी, लेकिन सवाल—क्या हिमाचल की जनता तीसरे विकल्प को स्वीकार करेगी?
ज्वाली विधानसभा क्षेत्र में आम आदमी पार्टी की राजनीतिक सक्रियता को केवल एक संगठनात्मक बैठक मानना हिमाचल की बदलती सियासी बिसात को नजरअंदाज करना होगा। प्रदेश प्रभारी ऋतुराज गोविंद की मौजूदगी, नए पदाधिकारियों की नियुक्तियां और सदस्यता अभियान की शुरुआत इस बात का संकेत है कि आप 2027 के विधानसभा चुनाव से काफी पहले अपना संगठन खड़ा करने की कोशिश में जुट गई है।आप की ओर से हिमाचल की सभी 68 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का संकेत भी दिया जा चुका है। ऐसे में ज्वाली में पार्टी की दस्तक का सीधा राजनीतिक अर्थ है—कांग्रेस और भाजपा के बीच मौजूद राजनीतिक मुकाबले में अपनी जगह तलाशना।
लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल आप से ज्यादा हिमाचल की जनता से जुड़ा है—क्या हिमाचल का मतदाता तीसरे विकल्प को स्वीकार करने के लिए तैयार है?इतिहास बताता है कि हिमाचल की राजनीति मुख्य रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच सत्ता परिवर्तन के इर्द-गिर्द घूमती रही है। समय-समय पर तीसरी राजनीतिक ताकतों ने मैदान में उतरकर विकल्प बनने का दावा जरूर किया, लेकिन वे प्रदेश की सत्ता के समीकरण को स्थायी रूप से बदलने में सफल नहीं हो सकीं। इसलिए आम आदमी पार्टी के सामने सबसे पहली चुनौती यही है कि वह हिमाचल की इसी राजनीतिक परंपरा को कैसे तोड़ती है।
तीसरे विकल्प का नारा आसान, जमीन बनाना मुश्किल—-आप का दावा है कि कांग्रेस और भाजपा से अलग जनता को नई राजनीति का विकल्प चाहिए। यह दावा सुनने में आकर्षक जरूर है, लेकिन चुनावी राजनीति केवल नारों से नहीं चलती।तीसरा विकल्प बनने के लिए पार्टी को बूथ स्तर तक संगठन, पंचायत स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता, मजबूत स्थानीय नेतृत्व और लगातार जनता के बीच मौजूदगी साबित करनी होगी।ज्वाली में पदाधिकारियों की नियुक्ति निश्चित रूप से संगठन विस्तार की दिशा में एक कदम है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब पार्टी गांव-गांव जाकर यह बताए कि वह कांग्रेस और भाजपा से अलग क्या देने वाली है।हिमाचल का मतदाता राजनीतिक रूप से काफी सजग माना जाता है। वह केवल दिल्ली या दूसरे राज्यों में किसी पार्टी के प्रदर्शन के आधार पर विधानसभा चुनाव में फैसला नहीं करता। स्थानीय उम्मीदवार, व्यक्तिगत संपर्क, क्षेत्रीय मुद्दे और लंबे समय से बने राजनीतिक संबंध भी यहां चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं।
2022 का प्रदर्शन आप के सामने सबसे बड़ी चुनौती—आम आदमी पार्टी के सामने अपने पिछले हिमाचल चुनावी प्रदर्शन का सवाल भी खड़ा रहेगा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने बड़े दावों के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन वह विधानसभा में अपना खाता नहीं खोल सकी।अब 2027 से पहले संगठन विस्तार उसी राजनीतिक कमजोरी को दूर करने का प्रयास माना जा सकता है।लेकिन पांच साल का अंतराल केवल संगठन बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होता। पार्टी को यह भी साबित करना होगा कि उसके पास हिमाचल के लिए कोई ऐसा स्थानीय राजनीतिक मॉडल है, जिसे मतदाता कांग्रेस और भाजपा के विकल्प के रूप में स्वीकार कर सके।
ज्वाली में स्थानीय चेहरा निर्णायक होगा—ज्वाली में आप की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा उसके संभावित उम्मीदवार के चयन से भी होगी।यदि पार्टी ऐसा स्थानीय चेहरा सामने लाती है जिसकी क्षेत्र में व्यक्तिगत पकड़ हो, जो युवाओं, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों को जोड़ सके और कांग्रेस-भाजपा दोनों से नाराज मतदाताओं को अपने पक्ष में खींच सके, तभी तीसरे विकल्प की संभावना मजबूत होगी।इसके विपरीत यदि संगठन केवल बाहरी राजनीतिक प्रभाव या बड़े नेताओं के दौरों तक सीमित रहा, तो सदस्यता के आंकड़े चुनावी वोट में बदलना कठिन हो सकता है।
कांग्रेस-भाजपा के लिए भी संकेत—आप की सक्रियता को कांग्रेस और भाजपा किस रूप में लेती हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। यदि आप युवाओं, बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास के मुद्दों को आक्रामक ढंग से उठाती है, तो वह सत्ता विरोधी मतों में हिस्सेदारी मांग सकती है।लेकिन दूसरी ओर यह भी संभव है कि तीसरे विकल्प के रूप में उसकी मौजूदगी कांग्रेस या भाजपा के बजाय केवल असंतुष्ट छोटे हिस्से के मतदाताओं तक सीमित रह जाए।यही वह बिंदु है जहां “तीसरा विकल्प”और“विजयीविकल्प”अलग-अलगहोजातेहैं।किसी पार्टी का चुनाव में मौजूद होना और किसी विधानसभा सीट पर जीत की स्थिति में पहुंचना दो अलग बातें हैं।
हिमाचल की जनता का फैसला सबसे बड़ा—आप के लिए ज्वाली और हिमाचल का रास्ता आसान नहीं है। पार्टी के सामने कांग्रेस और भाजपा जैसे स्थापित राजनीतिक संगठनों की मजबूत जमीनी संरचना है। इसके अलावा हिमाचल के मतदाताओं के सामने एक और सवाल होगा—क्या वे सत्ता के लिए स्थापित दो ध्रुवों के बीच तीसरे विकल्प को मौका देंगे?यही वजह है कि आप का 2027 अभियान केवल संगठन विस्तार का अभियान नहीं होगा, बल्कि हिमाचल की उस राजनीतिक मानसिकता को बदलने की कोशिश भी होगी, जिसमें जनता लंबे समय से कांग्रेस और भाजपा के बीच सत्ता का फैसला करती आई है।फिलहाल ज्वाली में आप ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। अब उसे यह साबित करना है कि वह केवल “तीसरे विकल्प”कानारादेनेनहीं, बल्कि हिमाचल की राजनीति में तीसरी ताकत बनने की वास्तविक क्षमता लेकर मैदान में उतरी है।क्योंकि हिमाचल की जनता ने अतीत में कई तीसरे विकल्पों को आजमाया और नकारा है। ऐसे में आप के सामने सबसे कठिन सवाल यही रहेगा—क्या वह हिमाचल के मतदाता को यह विश्वास दिला पाएगी कि इस बार तीसरा विकल्प केवल विकल्प नहीं, बल्कि सत्ता का दावेदार है?2027 का चुनाव इसका जवाब देगा। अभी ज्वाली में बिछी सियासी बिसात पर पहली चाल चली गई है।

