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भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति और विश्वास ने बनाया उन्हें महान भक्त : साध्वी भाग्यश्री भारती

RamParkash Vats
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नूरपुर से कांगड़ा चंबा संसदीय ब्यूरो विनय महाजन की रिपोर्ट

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के द्वारा शाहपुर, के अभिनंदन मैरिज पैलेस में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस साध्वी भाग्य भारती ने कथा के माध्यम से बताया कि शिशुपाल भगवान श्रीकृष्ण को पहचान नहीं पाया उनके सामने उपस्थित होने पर भी उनकी लीलाओं की चर्चा सुनने के बाद भी अनेकों भक्तों का उनके प्रति आदर भाव देखने सुनने के बाद भी। केवल शिशुपाल ही नहीं बल्कि उस समय के अनेकों राजा भी भगवान श्रीकृष्ण को पहचान नहीं पाये तो क्या यदि आज भगवान हमारे सामने आ जाते तो हम भगवान को पहचान लेंगे?

मारे पास भगवान को पहचानने का क्या आधार होगा क्या उनकी बाहरी वेश भूषा? यदि हम ऐसा सोचते हैं तो इसका मतलब अभी तक हमने अपने धार्मिक ग्रंथों का सही ढंग से अध्ययन ही नहीं किया। क्योंकि बाहरी वेश भूषा तो कोई भी धारण कर सकता है। इसलिए भगवान को पहचानने के लिए आवश्यकता है उस दिव्य दृष्टि की जो दिव्य दृष्टि भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध के मैदान में अर्जुन को प्रदान की थी।भक्त प्रह्लाद प्रसंग सुनाते हुए साध्वी ने बताया कि भक्त प्रह्लाद के जीवन में अनेकों ही संकट आए लेकिन वह अपने भक्ति पथ से विचलित नहीं हुए, क्योंकि उनका अपने श्री हरि पर अपने नारायण पर पूर्ण विश्वास था।

यदि हम भी चाहते हैं कि हमारा भी विश्वास भक्त प्रह्लाद की भांति हो तो हमें भी आवश्यकता है उस ईश्वर को जानने की। आगे कथा सुनाते हुए साध्वी जी ने बताया कि भक्त प्रह्लाद के भीतर जो अद्भुत भक्ती बल था उसके पीछे की कही न कही उनकी मां के द्वारा दिए गए संस्कार थे , जिसने उन्हें एक महान भक्त बना दिया। इसलिए यह एक मां पर ही निर्भर करता है कि वह अपनी संतान को किस सांचे में ढालना चाहती है, क्योंकि संस्कार देने का शुभ विचार देने का जो समय है वह बाल्यावस्था ही होती है इसलिए आप अपनी संतानों को श्रेष्ठ संस्कार दे, ताकि वह आगे चलकर एक श्रेष्ठ नागरिक बन सके। कथा के दौरान यजमान पुजन भी किया जाता है।और ज्योति जलाने की रस्म भी निभाई जाती है। कथा के उपरांत ज्योति जलाने कि रस्म में, जितेन्दर सोंधी, गोकुल सोंधी, उत्तम सिंह चंबियाल, बादल कौशिक, राहुल सोंधी, ने ज्योति प्रज्वलित की। और सभी भक्तों ने आरती कि और प्रसाद को ग्रहण किया।

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