नूरपुर से कांगड़ा चंबा संसदीय ब्यूरो विनय महाजन
नूरपुर प्रेस क्लब में समाजसेवक अखिल बख्शी, पुत्र स्वर्गीय रंजीत बख्शी, पूर्व विधायक नूरपुर, की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने क्षेत्र की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अखिल बख्शी ने अपने सामाजिक जीवन और राजनीतिक सफर की पृष्ठभूमि साझा करते हुए नूरपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने का संकेत दिया।
अखिल बख्शी का राजनीतिक आधार केवल परिवार की विरासत तक सीमित नहीं माना जा सकता। उन्होंने रेलवे की नौकरी छोड़कर समाजसेवा का रास्ता अपनाया और बाद में लोगों के आग्रह पर राजनीति में कदम रखने की बात कही। यही पहल अब नूरपुर की आगामी राजनीतिक दिशा को लेकर नए समीकरणों की चर्चा पैदा कर रही है।
उनके चुनाव लड़ने के संकेत को कांग्रेस और भाजपा, दोनों के संभावित राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे किस राजनीतिक दल के मंच से चुनावी मैदान में उतरेंगे या स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करेंगे। लेकिन इतना जरूर है कि उनकी सक्रियता से दोनों प्रमुख दलों के संभावित प्रत्याशियों और स्थानीय नेताओं के बीच राजनीतिक मंथन तेज हो सकता है।
नूरपुर की राजनीति में पारिवारिक राजनीतिक विरासत, व्यक्तिगत जनसंपर्क और सामाजिक छवि हमेशा महत्वपूर्ण कारक रहे हैं। ऐसे में अखिल बख्शी यदि चुनावी मैदान में उतरते हैं तो मुकाबला केवल दलों के बीच नहीं, बल्कि विरासत, जनसेवा और नए राजनीतिक विकल्प के बीच भी दिखाई दे सकता है।
प्रेस क्लब में उनके वक्तव्य के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अखिल बख्शी का यह संकेत आने वाले विधानसभा चुनाव में नूरपुर के राजनीतिक समीकरणों को वास्तव में बदल पाएगा। फिलहाल उनके बयान ने क्षेत्र की सियासत में हलचल जरूर पैदा कर दी है।

