Reading: भगवान पार्श्वनाथ जी का इतिहास—धार्मिक आस्था से सराबोर हुआ महमूदाबाद, भगवान पार्श्वनाथ को अर्पित हुआ

भगवान पार्श्वनाथ जी का इतिहास—धार्मिक आस्था से सराबोर हुआ महमूदाबाद, भगवान पार्श्वनाथ को अर्पित हुआ

RamParkash Vats
4 Min Read
महमूदाबाद, सीतापुर।प्रदेश राज्य चीफ ब्यूरो अनुज कुमार जैन

जैन धर्म में भगवान पार्श्वनाथ जी को 23वें तीर्थंकर के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है। जैन परंपरा के अनुसार वे भगवान महावीर स्वामी से लगभग 250 वर्ष पूर्व हुए और उन्होंने अहिंसा, सत्य, अस्तेय तथा अपरिग्रह जैसे मूल सिद्धांतों का उपदेश देकर जीव मात्र के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। ऐतिहासिक अध्ययनों में भी पार्श्वनाथ जी को प्राचीन जैन परंपरा की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शख्सियत माना गया है।

जैन ग्रंथों के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ जी का जन्म वाराणसी (काशी) में राजा अश्वसेन और रानी वामादेवी के घर हुआ था। उनका राजचिह्न सर्प माना जाता है और उनकी प्रतिमाओं में सामान्यतः उनके मस्तक के ऊपर फण फैलाए हुए सर्प का स्वरूप दिखाई देता है।

राजसी जीवन के बीच भी पार्श्वनाथ जी का मन संसार की भौतिक सुख-सुविधाओं में नहीं रमा। जैन परंपरा के अनुसार उन्होंने युवावस्था में ही वैराग्य का मार्ग अपनाया और कठोर तप एवं ध्यान के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने जन-जन को धर्म, संयम, करुणा और अहिंसा का संदेश दिया। जैन परंपरा में उनके द्वारा प्रतिपादित चार प्रमुख व्रत—अहिंसा, सत्य, अस्तेय और अपरिग्रह—विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

भगवान पार्श्वनाथ जी का जीवन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, आत्मसंयम और जीवों के प्रति करुणा का आदर्श माना जाता है। उनके उपदेशों ने उस समय के समाज में अहिंसक और संयमित जीवन-पद्धति को मजबूत किया। बाद में भगवान महावीर स्वामी ने जैन धर्म की इसी प्राचीन परंपरा को व्यापक रूप से व्यवस्थित और प्रचारित किया।

जैन परंपरा के अनुसार भगवान पार्श्वनाथ जी ने सम्मेद शिखर (समेत शिखरजी) पर निर्वाण प्राप्त किया। यह स्थान आज जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में गिना जाता है। जैन श्रद्धालुओं के लिए पार्श्वनाथ जी का निर्वाण दिवस आत्मचिंतन, संयम और मोक्षमार्ग की साधना का विशेष अवसर होता है।

धार्मिक आस्था से सराबोर हुआ महमूदाबाद, भगवान पार्श्वनाथ को अर्पित हुआ 23 किलो का निर्वाण लाडू

जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ जी के निर्वाण दिवस के अवसर पर महमूदाबाद में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। श्री विविक्ति मति माता जी ससंघ के सानिध्य में धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विधि-विधानपूर्वक भगवान पार्श्वनाथ जी की निर्वाण कांड शिखर जी की रचना के साथ 23 किलो का निर्वाण लाडू श्रद्धापूर्वक अर्पित किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान पार्श्वनाथ जी की नित्य पूजन, अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान की आराधना करते हुए निर्वाण लाडू समर्पित किया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरा परिसर भगवान पार्श्वनाथ जी की भक्ति और जयकारों से गूंज उठा।इस अवसर पर जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ जी के अहिंसा, संयम, सत्य और आत्मशुद्धि के संदेश को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

श्री विविक्ति मति माता जी ससंघ के सानिध्य में हुए इस आयोजन ने महमूदाबाद में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। समाज के लोगों ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ के सिद्धांत मानव जीवन को सत्य, अहिंसा और संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ जी के चरणों में नमन कर सभी के सुख, शांति और मंगल की कामना की।

Share This Article
Leave a comment
error: Content is protected !!