भारत का विभाजन 14-15अगस्त 1947 को हुआ था ।ब्रिटिश संसद द्वारा पारित भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत ब्रिटिश शासन ने भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र देशों में विभाजित कर दिया गया । विभाजन के मुख्य कारणों में ” फूट डालो राज करो” की नीति, द्विराष्ट्र सिद्धांत व साम्प्रदायिक दंगे प्रमुख रूप से शामिल रहे । जून 1947में लार्ड माउण्टबेटेन ने बंटवारे की रूपरेखा प्रस्तुत की थी जिसमें सर सिरिल रेडक्लिफ द्वारा भारत और पाकिस्तान के मध्य एक सीमा रेखा तय करने वाली “रेडक्लिफ रेखा ” खीची गई ।

भारत का विभाजन विश्व की सबसे बडी “मानव विस्थापन “की दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी ।भारत में 14 अगस्त को विभाजन के दौरान लोगो के संघर्ष और बलिदान की स्मृति में मनाया जाने वाला एक” वार्षिक स्मृति दिवस “है जो 1947 को विभाजन के दौरान पीड़ितो और लोगों के कष्टों की याद दिलाता है ।यह दिन विभाजन के दौरान भारतीयों को हुई पीडा व विभाजन में असंख्य परिवार विस्थापित हुए और लोगों ने अपनी जान गंवाई थी ।यह दिवस आज के दिन ठीक 5 वर्षं पूर्व प्रथम बार 14 अगस्त 2021में प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद मनाया गया था । इस दिवस को मनाने के पीछे प्रमुख तारतम्य व उद्देश्य रहा कि भारतीयों को सामाजिक विभाजन , असामंजस्य को दूर करने ,राष्ट्रीय एकता व सामाजिक सद्भाव और मानव सशक्तीकरण की भावना को और मजबूत करने की आवश्यकता की याद दिलाता है । विभीषिका का तात्पर्य – भय, भयानक स्थिति या आतंक का त्रास होता है एक ऐसा दृश्य जो मन में गहरा भाव या डर उत्पन्न कर दे ।आज विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर हम सभी उन लाखो लोगो को श्रद्धांजलि देते है जिन्होंने इतिहास के सबसे क्रूर प्रकरण के दौरान अमानवीय पीडाओं का सामना किया और बेघर हो गये थे । अपने इतिहास को स्मृति में धारण कर उससे सीख लेकर ही एक राष्ट्र अपने मजबूत भविष्य का निर्माण कर सकता है और एक विश्व शक्ति के रूप में उभर सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के इस सार्थंक प्रयास से उक्त दिवस को मनाने की परम्परा राष्ट्र निर्माण की ओर उठाया गया एक मजबूत कदम है ।
डाॅ कौशलेन्द्र प्रताप मिश्र

