क्राइम रिपोर्ट – न्यूज इंडिया आजतक
पूर्व विधायक बंबर ठाकुर गोलीकांड में बिलासपुर पुलिस की बड़ी कामयाबी, फरारी के नेटवर्क की भी होगी जांच
बिलासपुर/झज्जर,SCB VIJAY SAMYAL
करीब दो महीने तक पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार घूम रहा पूर्व विधायक बंबर ठाकुर गोलीकांड का मुख्य आरोपी आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया। बिलासपुर पुलिस की विशेष टीम ने हरियाणा के झज्जर जिले में योजनाबद्ध दबिश देकर मुख्य शूटर अजय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की गिरफ्तारी को बिलासपुर पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।पुलिस के अनुसार अजय कुमार हरियाणा के झज्जर जिले के गोयला ताला गांव का निवासी है और पूर्व विधायक बंबर ठाकुर पर हुई फायरिंग का मुख्य शूटर तथा नामजद आरोपी है। उसके खिलाफ थाना सदर बिलासपुर में मामला दर्ज है।
पुलिस हिरासत से फरार होकर बना था चुनौती
जानकारी के अनुसार, 14 मई 2026 को पुलिस आरोपी को हरियाणा की अदालत में पेशी के लिए लेकर गई थी। पेशी के बाद बिलासपुर लौटते समय आरोपी पुलिस टीम को चकमा देकर हिरासत से फरार हो गया था। इस घटना ने पुलिस व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए थे और आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गई थी।
तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र से मिली सफलता
आरोपी की तलाश के लिए बिलासपुर पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। टीम ने हरियाणा सहित कई स्थानों पर लगातार तकनीकी सर्विलांस, मोबाइल लोकेशन, मानवीय सूचना तंत्र और गुप्त नेटवर्क के माध्यम से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी। आखिरकार झज्जर क्षेत्र में उसके छिपे होने की सटीक सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
अब खुलेगा फरारी का पूरा राज
पुलिस अब आरोपी को ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी कर बिलासपुर लाएगी, जहां उसे न्यायालय में पेश किया जाएगा। पूछताछ के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि फरारी के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में रहा, किसने उसे शरण दी और उसकी मदद करने वाले कौन-कौन लोग थे। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की भी परत-दर-परत जांच करेंगी।
एसपी का बयान
बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि विशेष टीम लगातार आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी। तकनीकी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर की गई योजनाबद्ध कार्रवाई के बाद आरोपी को झज्जर से गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में आगे की पूछताछ जारी रहेगी।
क्राइम विश्लेषण:
इस गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संगीन अपराधों में फरार आरोपी चाहे कितनी भी दूर क्यों न भाग जाए, आधुनिक तकनीक, मुखबिर तंत्र और सतत पुलिस कार्रवाई के सामने उसकी गिरफ्तारी केवल समय का प्रश्न रह जाती है। अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि फरारी के दौरान आरोपी को संरक्षण किसने दिया और क्या इस पूरे प्रकरण में कोई बड़ा आपराधिक नेटवर्क भी सक्रिय था।

