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नशे के खिलाफ चंबा प्रशासन सख्त, स्कूलों से बस अड्डों तक चलेगा जागरूकता अभियान@नशे की लत मौत के मुहाने तक ले जाती है, पीछे छोड़ जाती है केवल बर्बादी

RamParkash Vats
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NEWS INDIA AAJ TAK 25/05/2026/HIMACAL DESK OFFICE REPORTER

नशा केवल एक आदत नहीं, बल्कि ऐसा धीमा ज़हर है जो इंसान को धीरे-धीरे मौत के मुहाने तक पहुंचा देता है। इसकी गिरफ्त में आने वाला व्यक्ति न केवल अपनी सेहत खोता है, बल्कि परिवार, सम्मान, भविष्य और सामाजिक पहचान भी दांव पर लगा बैठता है। नशे की दलदल में फंसने के बाद पीछे केवल विनाश, आर्थिक तंगी और टूटते रिश्तों की दर्दनाक कहानी रह जाती है।आज समय की सबसे बड़ी पुकार है कि नशे के खिलाफ केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि सुनियोजित और मजबूत कार्रवाई भी हो। इसी दिशा में पुलिस अब अधिक सक्रिय, योजनाबद्ध और रणनीतिक ढंग से कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर रही है। नशा तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने, सप्लाई चैन पर रोक लगाने और युवाओं को इस दलदल से बचाने के लिए विशेष निगरानी और अभियान तेज किए जा रहे हैं।

पुलिस की “जीरो टॉलरेंस नीति” अब अपना असर दिखाती नजर आ रही है। लगातार छापेमारी, गिरफ्तारी और कानूनी शिकंजे के कारण नशा कारोबारियों में भय का माहौल बन रहा है। हालांकि यह लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज, परिवार और युवाओं की भी साझा जिम्मेदारी है। यदि समय रहते कठोर कदम और सामूहिक जागरूकता नहीं बढ़ी, तो नशा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।जिले में बढ़ते नशे के कारोबार और युवाओं में नशीले पदार्थों की बढ़ती प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने अब कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को जिला मुख्यालय में आयोजित जिला स्तरीय नार्को समन्वय समिति की बैठक में नशा तस्करी और इसके नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई। बैठक की अध्यक्षता Mukesh Repswal ने राष्ट्रीय सूचना एवं विज्ञान केंद्र (NIC) के वीडियो कॉन्फ्रेंस कक्ष में की, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।

उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज में नशा कारोबारियों और नशे को बढ़ावा देने वाले तत्वों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि नशा तस्करी, बिक्री अथवा इसके प्रसार में शामिल पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्रशासन ने इसे केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और युवा पीढ़ी के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया।बैठक के दौरान स्कूलों और कॉलेजों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। उपायुक्त ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों को चिट्टा, हेरोइन और अन्य मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों से अवगत करवाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। साथ ही युवाओं में गुटखा और खैनी जैसे तम्बाकू उत्पादों के बढ़ते सेवन पर चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित विभागों को सख्त निगरानी और कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। उन्होंने दोहराया कि प्रदेश में तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

विद्यालयों में नशा रोकथाम को लेकर विशेष व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके तहत स्कूल परिसरों में शिकायत पेटियां स्थापित की जाएंगी, विशेष नोडल अध्यापकों की नियुक्ति होगी तथा समय-समय पर विद्यार्थियों के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे, ताकि नशे के दुष्परिणामों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सके।प्रशासन ने सार्वजनिक परिवहन को भी नशा विरोधी मुहिम का हिस्सा बनाने का फैसला लिया है। Himachal Road Transport Corporation के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बस अड्डों पर डिजिटल स्क्रीन लगाकर नशा मुक्ति संदेश प्रसारित किए जाएं। इसके अलावा संवेदनशील और विशेष रूटों पर चलने वाली बसों में कैमरे स्थापित करने की योजना पर भी बल दिया गया, ताकि नशा तस्करी पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।

बैठक में जिले में संचालित स्नूकर क्लबों और इसी प्रकार के संस्थानों पर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई। उपायुक्त ने निर्देश दिए कि सभी क्लबों का नजदीकी पुलिस थाने में पंजीकरण अनिवार्य होगा और पुलिस विभाग नियमित निरीक्षण कर नियमों की अनुपालना सुनिश्चित करेगा।बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक Vijay Singh Saklani ने जिले में नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2026 में अब तक NDPS Act के तहत 43 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 15.578 किलोग्राम चरस, 371.64 ग्राम चिट्टा/हेरोइन और 2.169 किलोग्राम पॉपी प्लांट बरामद किया है। इन मामलों में कुल 64 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 44 आरोपी हिमाचल प्रदेश से जबकि 20 आरोपी बाहरी राज्यों से संबंधित हैं।

पुलिस अधीक्षक ने यह भी खुलासा किया कि नशा मामलों में संलिप्त पाए गए पांच सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। इनमें दो कर्मचारियों को निलंबित किया गया, एक कर्मचारी सेवानिवृत्त हुआ, जबकि दो को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। वर्तमान में दर्ज 43 मामलों में से 33 मामलों की जांच जारी है, जबकि 10 मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं।जिला प्रशासन और पुलिस ने साफ संकेत दिए हैं कि चंबा जिले में नशे के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। अधिकारियों का मानना है कि कानून की सख्ती के साथ-साथ जनजागरूकता और सामुदायिक सहयोग ही इस सामाजिक बुराई पर प्रभावी नियंत्रण का आधार बन सकता है।

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