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धारावाहिक (75) हिमाचल के स्वतंत्र सैनानी : भाग मल सौठा: हिमाचल का शेर और धामी आंदोलन के नायक

RamParkash Vats
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भारत के स्वतंत्र सैनानी भाग मल सौठा हिमाचल का शेर और धामी आंदोलन के नायक

भारत के स्वतंत्र सैनानीयों को कोटि कोटि नमन संपादक राम प्रकाश वत्स

हिमाचल प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम में भाग मल सौठा का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। वे न केवल एक साहसी नेता थे, बल्कि जन अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले सच्चे योद्धा भी थे। विशेष रूप से 1939 के धामी गोलीकांड में उनके नेतृत्व ने उन्हें इतिहास में अमर कर दिया।भाग मल सौठा का जन्म 23 सितंबर 1899 को हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले की जुब्बल तहसील के धार गाँव में हुआ। वे पेशे से सिविल इंजीनियर थे, लेकिन उनका झुकाव देशभक्ति और समाज सेवा की ओर अधिक था।
सन् 1922 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।
उन्होंने 1946 में हिमालयन हिल स्टेट्स रीजनल काउंसिल के गठन में महत्वपूर्ण योगदान दिया और बाद में 1957 में स्टेट टेरिटोरियल काउंसिल के सदस्य भी चुने गए।

धामी गोलीकांड: अन्याय के खिलाफ विद्रोह

16 जुलाई 1939 का दिन हिमाचल के इतिहास में एक काला अध्याय बन गया। धामी रियासत में उस समय शासक राणा दलीप सिंह की दमनकारी नीतियों से जनता परेशान थी। बेगार प्रथा (बिना मजदूरी के काम) और भारी करों ने लोगों का जीवन कठिन बना दिया था।

भाग मल सौठा के नेतृत्व में प्रजामंडल ने तीन मुख्य मांगें रखीं:

(1) बेगार प्रथा का अंत (2 ) करों में 50% की कमी (3) प्रजामंडल को मान्यताजब इन मांगों को ठुकरा दिया गया, तो 16 जुलाई 1939 को लगभग 1500–2000 लोगों का जत्था शिमला से धामी की ओर बढ़ा।

गोलीकांड और बलिदान

धामी सीमा के पास घणाहट्टी में भाग मल सौठा को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके गिरफ्तारी से आक्रोशित भीड़ पर राणा ने गोली चलाने का आदेश दे दिया।इस गोलीबारी में दो निहत्थे आंदोलनकारी—उमादत्त और दुर्गादास—शहीद हो गए और कई लोग घायल हुए। यह घटना हिमाचल में पहली बार थी जब जनता पर इस तरह गोली चलाई गई।

राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रभाव

इस घटना की गूंज पूरे देश में सुनाई दी। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने इसकी कड़ी निंदा की।
नेहरू ने जांच के लिए शांति स्वरूप धवन को भेजा, जबकि कांग्रेस ने लाला दुनी चंद की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई।भाग मल सौठा को गिरफ्तार कर अंबाला जेल में रखा गया, लेकिन उनके साहस और नेतृत्व ने उन्हें “हिमाचल का शेर” बना दिया।भाग मल सौठा का जीवन हमें यह सिखाता है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना ही सच्ची देशभक्ति है। उनका संघर्ष हिमाचल प्रदेश के इतिहास में स्वतंत्रता, साहस और जन अधिकारों का प्रतीक है।

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