नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने एक मुस्लिम यात्री का वेश धारण किया और भगत राम तलवार उनके साये की तरह हर कदम पर साथ रहे—यह दृश्य भारतीय एकता और त्याग का अनुपम उदाहरण है।

को कोटि-कोटि नमन संपादक राम प्रकाश वत्स
भारत की स्वतंत्रता की गौरवगाथा में यह प्रसंग अद्वितीय साहस, त्याग और अटूट देशभक्ति का जीवंत प्रतीक है। जनवरी 1941 की वह ऐतिहासिक घड़ी, जब सुभाष चंद्र बोस ने ब्रिटिश हुकूमत की कड़ी निगरानी को धता बताते हुए नज़रबंदी से पलायन किया, केवल एक घटना नहीं, बल्कि दासता की जंजीरों को तोड़ने की प्रबल चेतना का उद्घोष था। यह पल भारत की आज़ादी के संघर्ष में एक नए अध्याय की शुरुआत था, जिसमें हर कदम पर जोखिम था, लेकिन लक्ष्य केवल एक—मातृभूमि की स्वतंत्रता।इस महान अभियान में उनके साथ खड़े थे साहस और निष्ठा की मिसाल भगत राम तलवार, जिनका व्यक्तित्व भले ही साधारण प्रतीत होता था, पर उनके भीतर क्रांति की ज्वाला प्रज्वलित थी। जब नेताजी उनसे पहली बार मिले, तो बाहरी रूप से वे भले ही एक साधारण, दुबले-पतले व्यक्ति लगे, परंतु उनके हृदय में धधकता देशप्रेम और अदम्य साहस अंग्रेज़ी साम्राज्य को चुनौती देने के लिए पर्याप्त था। यही वह शक्ति थी, जिसने इस असंभव प्रतीत होने वाले मिशन को संभव बनाया।भगत राम तलवार उस क्रांतिकारी परंपरा के वाहक थे, जहाँ देश के लिए बलिदान ही सर्वोच्च धर्म माना जाता था। उनके परिवार की शहादत और संस्कारों ने उन्हें इस पथ पर अडिग बनाया। उनके बड़े भाई हरि किशन का बलिदान इस बात का प्रमाण था कि यह परिवार मातृभूमि के लिए सब कुछ न्योछावर करने को तत्पर था। उनके पिता लाला गुरदासमल के शब्द—“जो देश के लिए मरता है, वह अमर हो जाता है”—सिर्फ एक प्रेरणा नहीं, बल्कि उस युग की क्रांतिकारी चेतना का सार थे।नेताजी के इस गुप्त अभियान की रूपरेखा अत्यंत सूझबूझ और रणनीति से तैयार की गई थी। कीर्ति किसान पार्टी के साहसी कार्यकर्ताओं ने इस मिशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। पेशावर से लेकर अफगानिस्तान और फिर सोवियत सीमा तक की यह यात्रा केवल भौगोलिक दूरी नहीं थी, बल्कि हर मोड़ पर मौत को मात देने वाली परीक्षा थी। नेताजी ने एक मुस्लिम यात्री का वेश धारण किया और भगत राम तलवार उनके साये की तरह हर कदम पर साथ रहे—यह दृश्य भारतीय एकता और त्याग का अनुपम उदाहरण है।यह कहानी केवल एक पलायन की नहीं, बल्कि उस अदम्य संकल्प की है, जिसने भारत की स्वतंत्रता की नींव को और मजबूत किया। सुभाष चंद्र बोस और भगत राम तलवार जैसे वीरों ने यह सिद्ध कर दिया कि जब इरादे अटल हों, तो साम्राज्यवादी ताकतें भी झुकने को मजबूर हो जाती हैं। उनका यह साहसिक कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना और स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।ऐसे अमर सेनानियों को कोटि-कोटि नमन, जिनकी वीरता और बलिदान ने भारत को स्वतंत्रता का स्वर्णिम सूर्योदय दिखाया।

