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धारावाहिक (65)झंडा सत्याग्रह में तिरंगा फहराते शहीद हुए वीर गुलाब सिंह लोधी, अदम्य साहस ने स्वतंत्रता संग्राम में अमर गाथा लिखी

RamParkash Vats
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भारत के स्वतंत्र सैनानी वीर गुलाब सिंह लोधी को कोटि -कोटि नमन/वीर गुलाब सिंह लोधी अमर रहें!
भारत माता की जय!

NEWS INDIA AAJ TAK EDITOR RAM PARKASH VATS

स्वतंत्रता संग्राम के रणबांकुरों की परम्परा में जब त्याग, बलिदान और मातृभूमि के लिए प्राण न्यौछावर करने की गाथाएँ लिखी जाती हैं, तब उनमें एक अमर नाम उभरकर सामने आता है — ठाकुर गुलाब सिंह लोधी। उनका जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस युग की ज्वाला था जिसमें देशभक्ति रक्त बनकर नसों में दौड़ती थी और तिरंगा सम्मान का प्रतीक था। सन 1903 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के ग्राम चन्दीकाखेड़ा (फतेहपुर चैरासी) में एक राजपूत किसान परिवार में जन्मे गुलाब सिंह लोधी बचपन से ही स्वाभिमानी, साहसी और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे। उनके पिता ठाकुर श्रीराम रतनसिंह लोधी प्रतिष्ठित जमींदार थे, परंतु गुलाब सिंह ने आराम का जीवन नहीं, बल्कि संघर्ष का मार्ग चुना। देश गुलाम था, और उनके भीतर आजादी की आग धधक रही थी।जब देश में झंडा सत्याग्रह आन्दोलन की लहर उठी, तब हजारों सत्याग्रही तिरंगा फहराने के लिए आगे बढ़े। अंग्रेजी हुकूमत ने दमन का सहारा लिया और कई जत्थों को खदेड़ दिया गया। परंतु वीर गुलाब सिंह लोधी पीछे हटने वालों में से नहीं थे। वे चतुराई से सैनिकों की नजरों से बचते हुए लखनऊ के अमीनाबाद पार्क में घुस गये। उनके हाथ में बैलों को हांकने वाला पैना था, जिसमें उन्होंने कपड़ों में छिपाकर रखा तिरंगा लगा लिया।

क्षण भर में वे एक पेड़ पर चढ़ गए और ऊँची आवाज में गूंज उठा —
“तिरंगे झंडे की जय!”
“महात्मा गांधी की जय!”
“भारत माता की जय!”

उनके स्वर से अमीनाबाद पार्क गूंज उठा। हजारों लोग एक साथ गरज पड़े। वातावरण देशभक्ति से भर गया। ऐसा लगा मानो गुलाम भारत की आत्मा बोल उठी हो। 🇮🇳✨

परंतु अंग्रेजी हुकूमत इस साहस को सहन न कर सकी। आदेश हुआ — “गोली चलाओ!”
धांय-धांय… गोलियाँ चलीं और वीर गुलाब सिंह लोधी के शरीर को चीरती हुई निकल गईं। घायल होकर वे पेड़ से नीचे गिरे। रक्त से लथपथ वह धरती पर ऐसे लेटे थे, मानो भारत माता की गोद में विश्राम कर रहे हों। 23 अगस्त 1935 को उन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इतिहास में अमर स्थान प्राप्त कर लिया। 🕊️उनके बलिदान के बाद अमीनाबाद पार्क “झंडेवाला पार्क” के नाम से प्रसिद्ध हुआ और आज भी वह स्थान उनके अदम्य साहस का स्मारक बनकर खड़ा है। गुलाब सिंह लोधी ने सिद्ध कर दिया कि तिरंगे की शान के लिए प्राण देना ही सच्ची देशभक्ति है।स्वतंत्रता संग्राम के इस क्रांतिवीर का जीवन हमें सिखाता है कि आजादी केवल शब्द नहीं, बल्कि बलिदानों की तपती भट्टी से निकला हुआ अमूल्य वरदान है। उनका नाम भारतीय इतिहास में उस दीपक की तरह है जो आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम की राह दिखाता रहेगा।

वीर गुलाब सिंह लोधी अमर रहें!
भारत माता की जय!

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