दिनांक:23 मार्च 2026
ब्यूरो चीफ, शिमला विजय समयाल
हिमाचल प्रदेश के पेंशनरों में हालिया बजट को लेकर रोष और आक्रोश गहराता जा रहा है। पेंशनरों का आरोप है कि सरकार ने उनकी लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया, जिससे उन्हें संपूर्ण रूप से अनदेखा किया गया है। पेंशनर्स संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिति उन्हें स्वीकार नहीं है और इसके विरोध में प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा।
इसी क्रम में 30 मार्च को राजधानी शिमला में हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले राज्य स्तरीय विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। समिति के अनुसार प्रदेशभर के 18 संगठन इस आंदोलन में भाग लेंगे। पेंशनरों का कहना है कि हालिया बजट में उनकी लंबित वित्तीय देनदारियों पर कोई घोषणा नहीं की गई, जिससे असंतोष व्यापक रूप ले रहा है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन तथा अवकाश नकदीकरण जैसे लाभ अब तक नहीं मिले हैं। जनवरी 2022 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को छठे वेतनमान के लाभ भी लंबित हैं। इसके अतिरिक्त 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता, 44 माह के एरियर तथा लंबित मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए भी बजट में कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
पेंशनरों का कहना है कि बजट में केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के बकाया का उल्लेख किया गया, लेकिन भुगतान की समयसीमा स्पष्ट नहीं की गई। समिति ने बताया कि 5 मार्च को सुंदरनगर में आयोजित राज्य कार्यकारिणी की बैठक में निर्णय लिया गया था कि यदि बजट में लंबित देनदारियों पर घोषणा नहीं हुई तो 30 मार्च को शिमला में प्रदर्शन किया जाएगा। इसी निर्णय के तहत प्रदेशभर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। 📍
समिति ने सरकार से मांग की है कि लंबित वित्तीय लाभ, महंगाई भत्ते की किश्तें, एरियर और मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए विशेष बजट प्रावधान किया जाए। हिमाचल पथ परिवहन के पेंशनरों के लिए 70 वर्ष आयु पूर्ण करने वालों को एरियर, तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता तथा संशोधित वेतनमान के तहत 50 हजार रुपये की पहली किश्त जारी करने की मांग भी उठाई गई है। साथ ही बिजली बोर्ड में ओपीएस बहाल करने की मांग दोहराई गई।
उधर, वेतन कटौती के निर्णय पर कर्मचारी संगठनों का विरोध भी तेज हो गया है। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने ग्रुप-बी कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन का तीन प्रतिशत हिस्सा स्थगित करने के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है। संघ के राज्य अध्यक्ष अजय नेगी ने कहा कि मध्यवर्गीय कर्मचारी पहले ही ऋण, शिक्षा, चिकित्सा और बढ़ती महंगाई के दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में वेतन का हिस्सा स्थगित करना उनके मासिक बजट पर सीधा असर डालेगा।
प्रदेश सरकार के निर्णय के विरोध में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारी भी मुखर हो गए हैं। शिक्षक कल्याण संघ ने निर्णय को कर्मचारी विरोधी बताते हुए चेतावनी दी कि यदि वेतन कटौती वापस नहीं ली गई तो एक हजार से अधिक कर्मचारी आंदोलन करेंगे। महासचिव डॉ. नितिन व्यास ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच वेतन में कटौती कर्मचारियों पर दोहरी मार है और इससे मनोबल पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
कर्मचारी संगठनों ने 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता जारी करने तथा 2016 यूजीसी वेतनमान के लंबित एरियर का भुगतान करने की भी मांग उठाई है। संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है और विभिन्न कर्मचारी-पेंशनर संगठन संयुक्त रूप से संघर्ष को तेज
पेंशनरों में रोष, वेतन कटौती पर कर्मचारी संगठनों का विरोध तेज#30 मार्च को शिमला में राज्य स्तरीय धरना, लंबित देनदारियों के भुगतान की मांग
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