भारत के स्वतंत्र सैनानीयों को कोटि-कोटि नमन संपादक राम प्रकाश बत्स

भारत की स्वतंत्रता कोई एक दिन में मिली उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के अनथक परिश्रम, त्याग और संघर्ष का परिणाम है जिन्होंने हर बाधा को पार करते हुए अंग्रेजों के दमनकारी कुचक्रों को सहा और अंततः देश को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे ही महान राष्ट्रनायकों में पंडित मदन मोहन मालवीय का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है।
1861 में प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में जन्मे पंडित मदन मोहन मालवीय एक महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और समाज सुधारक थे। उनकी राष्ट्रसेवा और उच्च आदर्शों से प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने उन्हें “महामना” की उपाधि दी। उन्होंने 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की स्थापना की, जो आज एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में गिना जाता है और भारतीय शिक्षा जगत का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

मालवीय जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में रहे और चार बार कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। नरम दल के प्रमुख नेता के रूप में उन्होंने संवैधानिक और शांतिपूर्ण मार्ग से देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। 1922 के चौरी-चौरा कांड के बाद जब अनेक क्रांतिकारियों को फांसी की सजा सुनाई गई, तब मालवीय जी ने अदालत में उनका मुकदमा लड़कर 150 से अधिक लोगों की फांसी रुकवाकर मानवता और न्याय का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।

पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने ‘अभ्युदय’, ‘मर्यादा’ और अंग्रेजी पत्र ‘लीडर’ का संपादन कर जनजागरण का कार्य किया। समाज सुधार के क्षेत्र में उन्होंने छुआछूत जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और दलित समाज के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास किए। ‘सत्यमेव जयते’ जैसे प्रेरणादायी संदेश को लोकप्रिय बनाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

पंडित मदन मोहन मालवीय का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, शिक्षा और समाज सुधार को समर्पित रहा। हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए उन्होंने जीवन के अंतिम क्षण तक कार्य किया। उनके महान योगदान को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने 24 दिसंबर 2014 को उन्हें मरणोपरांत “भारत रत्न” से सम्मानित किया।
निस्संदेह, पंडित मदन मोहन मालवीय उन महान स्वतंत्रता सेनानियों में थे जिनके त्याग, संघर्ष और दूरदर्शिता ने भारत की स्वतंत्रता और राष्ट्र निर्माण की नींव को मजबूत किया। उनका जीवन आज भी देशभक्ति, सेवा और समर्पण की प्रेरणा देता है

