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विशेष चर्चा :स्मार्ट मीटर एक आधुनिक तकनीक लेकिन जनता को पहले जानकारी देना अनिवार्य, विरोध फैली भ्रांतियां को लेकर,

RamParkash Vats
9 Min Read
Editorial thinking, brainstorming and analysis Editor Ram Prakash Vats

स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर सरकार और बिजली विभाग की मंशा भले ही उपभोक्ता हित में रही हो, लेकिन इसे लागू करने से पहले आम जनता को जागृत करने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए। किसी भी नई तकनीक की सफलता केवल उसके तकनीकी लाभों पर नहीं, बल्कि जनता की समझ और भरोसे पर भी निर्भर करती है।

स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इनमें प्रीपेड विकल्प के माध्यम से बिजली बिल पर नियंत्रण, रियल-टाइम खपत की जानकारी, प्रति यूनिट 25 पैसे की छूट तथा ₹2000 से अधिक बैलेंस रखने पर ब्याज जैसी योजनाएँ शामिल हैं। ये सभी लाभ उपभोक्ता को ऊर्जा बचत, पारदर्शिता और आर्थिक सुविधा प्रदान करने वाले हैं।लेकिन दुर्भाग्यवश, इन फायदों की जानकारी समय रहते लोगों तक नहीं पहुंचाई गई। न तो व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया और न ही गांवों, कस्बों और शहरी क्षेत्रों में संवाद की कोई ठोस व्यवस्था की गई। नतीजतन, स्मार्ट मीटर को लेकर शंकाएँ, अफवाहें और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई, जिसने विरोध का रूप ले लिया।

यदि सरकार और विभाग ने पहले चरण में जनसभाओं, मीडिया अभियानों, स्थानीय प्रतिनिधियों और उपभोक्ता बैठकों के माध्यम से स्मार्ट मीटर के लाभों को सरल भाषा में समझाया होता, तो स्थिति अलग हो सकती थी। लोगों को यह भरोसा दिलाना ज़रूरी था कि यह योजना उनके हित में है, न कि केवल राजस्व बढ़ाने का माध्यम।आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार और बिजली विभाग संवाद की कमी को स्वीकार करें और भरोसे की पुनर्स्थापना के लिए पारदर्शी और संवेदनशील पहल करें। तकनीक तभी सार्थक है जब जनता उसे समझे और अपनाए—स्मार्ट मीटर का भविष्य भी इसी पर निर्भर करता है।

स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम और भय, कई क्षेत्रों में विरोध तेज

राज्य के विभिन्न शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट बिजली मीटरों की जबरन स्थापना को लेकर उपभोक्ताओं में भारी असमंजस, डर और तकनीकी आशंकाएँ देखी जा रही हैं। बढ़ते बिजली बिल, प्रीपेड व्यवस्था में स्वतः बिजली कटौती और मीटर की कार्यप्रणाली को लेकर संदेह के चलते लोगों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर महिला मंडलों, ग्रामीण निवासियों और सामाजिक संगठनों ने धरना-प्रदर्शन कर स्मार्ट मीटर हटाने और पुराने मीटर पुनः लगाने की मांग उठाई है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल अचानक कई गुना बढ़ गए हैं। उपभोक्ताओं को आशंका है कि नए मीटर पुराने मीटरों की तुलना में तेज चलते हैं और गलत रीडिंग के कारण उन्हें अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। विभाग की ओर से इस बढ़ोतरी को लेकर कोई स्पष्ट और संतोषजनक जानकारी नहीं दी जा रही, जिससे लोगों का अविश्वास और गहरा होता जा रहा है।स्मार्ट मीटरों में लागू की जा रही प्रीपेड प्रणाली भी विरोध का बड़ा कारण बन रही है। ग्रामीण क्षेत्रों और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं का कहना है कि मोबाइल रिचार्ज की तरह बिजली रिचार्ज की व्यवस्था व्यवहारिक नहीं है। शेष राशि समाप्त होते ही बिजली की आपूर्ति तुरंत बंद हो जाने का डर बना रहता है, जिससे विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तकनीकी खराबी की स्थिति में मीटर बदलने या मरम्मत का खर्च उपभोक्ताओं पर डाले जाने की आशंका भी लोगों को परेशान कर रही है। इसके साथ ही, स्मार्ट मीटर के सेंट्रल सिस्टम से जुड़े होने के कारण दूर से बिजली काटे जाने या रीडिंग में मनमानी किए जाने का डर भी उपभोक्ताओं के बीच चर्चा का विषय है।लोगों का यह भी आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगाने से पहले उन्हें न तो पर्याप्त सूचना दी गई और न ही इसकी शर्तों व तकनीकी पहलुओं को समझाया गया। डेटा गोपनीयता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में कई उपभोक्ताओं को स्मार्टफोन, डिजिटल भुगतान और तकनीकी प्रक्रियाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी समस्याएँ और बढ़ गई हैं।

इन सभी कारणों से जनता में असंतोष लगातार बढ़ रहा है और कई स्थानों पर पुरानी बिजली मीटरों को ही दोबारा लगाने की मांग जोर पकड़ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब तक उनकी शंकाओं का समाधान और पारदर्शी जानकारी नहीं दी जाती, तब तक स्मार्ट मीटरों का विरोध जारी रहेगा।

स्मार्ट मीटर लगवाने से क्या होंगे फायदे और क्या हैं चुनौतियां?

बिजली व्यवस्था को पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में स्मार्ट मीटर को एक बड़ा कदम माना जा रहा है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ता अपनी बिजली खपत को रियल टाइम में देख सकेंगे, जिससे न केवल बिजली की बर्बादी पर रोक लगेगी बल्कि बिल को बेहतर ढंग से मैनेज करना भी संभव होगा।अब तक कई बार बिजली बिल अनुमानित रीडिंग के आधार पर बनाए जाते थे, जिससे उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती थी। स्मार्ट मीटर लगने के बाद वास्तविक खपत के आधार पर ही बिल बनेगा, जिससे बिल में गड़बड़ी और शिकायतों की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।

स्मार्ट मीटर की एक अहम विशेषता यह है कि यह बिजली चोरी के प्रयासों को पहचानने में सक्षम है। इससे विभाग को बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, उपभोक्ता घर बैठे मोबाइल फोन की तरह अपने स्मार्ट मीटर को रिचार्ज कर सकेंगे और बिल जमा कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।इन मीटरों में लोड मैनेजमेंट की सुविधा भी उपलब्ध होगी। तय सीमा से अधिक बिजली खपत होने पर उपभोक्ता को अलर्ट मिलेगा और जरूरत पड़ने पर बिजली सप्लाई अस्थायी रूप से बंद भी की जा सकती है। स्मार्ट मीटर रियल टाइम मॉनिटरिंग के जरिए यह सुनिश्चित करेगा कि तय लोड से अधिक बिजली का उपयोग न हो। यही नहीं, बिजली बोर्ड के फीडरों पर भी स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, जिससे पूरी प्रणाली पर निगरानी संभव होगी।

पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से उपभोक्ता एक मोबाइल ऐप पर शेष बैलेंस, बिजली की खपत, रिचार्ज और ट्रांजेक्शन से जुड़ी तमाम जानकारियां देख सकेंगे। विभाग के अनुसार, शुरुआत में यह मीटर पोस्टपेड मोड में रहेंगे, लेकिन आने वाले समय में इन्हें पूरी तरह प्रीपेड सिस्टम से जोड़ा जाएगा।हालांकि, देश के कुछ अन्य इलाकों से स्मार्ट मीटर के बाद अधिक बिल आने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसके अलावा, तकनीकी खामी आने पर समस्या के समाधान में देरी की आशंका भी जताई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग इस आधुनिक तकनीक के अनुरूप अपने पुराने कर्मचारियों को पूरी तरह प्रशिक्षित कर पाएगा।

कुल मिलाकर, स्मार्ट मीटर जहां एक ओर बिजली चोरी पर लगाम, पारदर्शिता और बेहतर बिल प्रबंधन का दावा करते हैं, वहीं दूसरी ओर इनके सफल क्रियान्वयन के लिए तकनीकी दक्षता, उपभोक्ता जागरूकता और मजबूत शिकायत निवारण व्यवस्था का होना भी उतना ही जरूरी है।

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