इस मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च 2026 को होगी।
INDIA OFFICE DESK/ 29 JAN /2026/ SANPADAN RAM PARKASH VATS: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा बनाए गए नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगला आदेश आने तक वर्ष 2012 के UGC रेगुलेशन ही लागू रहेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च 2026 को होगी।इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने नए नियमों की संवैधानिक वैधता और उनके संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।
कोर्ट की टिप्पणी: “क्या हम पीछे की ओर जा रहे हैं?”—-सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की कि आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी समाज पूरी तरह जातिगत विभाजन से मुक्त नहीं हो पाया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या नए UGC नियम समाज को आगे ले जाने के बजाय पीछे की ओर धकेलने का काम करेंगे। अदालत का प्रथम दृष्टया मत है कि इन नियमों का दुरुपयोग होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए फिलहाल इन्हें लागू करना उचित नहीं होगा।
याचिकाकर्ता की दलीलें—UGC के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस करते हुए अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि रेगुलेशन के सेक्शन 3(c) में “भेदभाव” की जो परिभाषा दी गई है, वह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत प्रदत्त समानता के अधिकार के अनुरूप नहीं है। उनका कहना था कि संविधान सभी नागरिकों को समान संरक्षण देता है, जबकि UGC के नियम कुछ सीमित वर्गों तक ही संरक्षण को केंद्रित करते हैं, जिससे सामाजिक तनाव और वैमनस्य बढ़ सकता है।
छात्रों के साथ भेदभाव पर सवाल—प्रधान न्यायाधीश ने प्रश्न उठाया कि यदि दक्षिण भारत का कोई छात्र उत्तर भारत के विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान भेदभाव का शिकार होता है, तो क्या नया UGC नियम उसे प्रभावी न्याय दिला पाएगा? इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि जन्मस्थान या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव से निपटने के लिए पहले से ही अन्य कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
रैगिंग प्रावधान हटाने पर चिंता–याचिकाकर्ता की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि नए नियमों में रैगिंग से संबंधित स्पष्ट प्रावधान क्यों हटाए गए हैं। उनका तर्क था कि इससे छात्रों को संरक्षण मिलने के बजाय उन्हें संभावित अपराधी की तरह देखने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। इस पर CJI ने दो टूक कहा कि कानून समाज को जोड़ने वाले होने चाहिए, न कि भय और विभाजन पैदा करने वाले।
सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश—1 UGC के नए नियमों पर तत्काल प्रभाव से रोक 2 वर्ष 2012 के UGC रेगुलेशन लागू रहेंगे केंद्र सरकार को संकेत कि नियमों का पुनः मसौदा तैयार किया जाए 3 मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को 3 सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश उच्च शिक्षा व्यवस्था में नियम निर्माण के दौरान संवैधानिक मूल्यों, समानता और सामाजिक समरसता के महत्व को रेखांकित करता है।

