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दिल्ली दरबार में हिमाचल का वित्तीय मंथन, केंद्र से उदार सहयोग की दरकार

RamParkash Vats
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नई दिल्ली में वीरवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से शिष्टाचार भेंट कर हिमाचल प्रदेश की बिगड़ती वित्तीय सेहत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। इस मुलाकात को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पहाड़ी राज्य हिमाचल को केंद्र के विशेष सहयोग के बिना आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर पाना कठिन होता जा रहा है।मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को 16वें वित्त आयोग को सौंपे गए ज्ञापन और अतिरिक्त ज्ञापन की जानकारी देते हुए राजस्व घाटा अनुदान को न्यूनतम 10 हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तय करने की मांग रखी। उन्होंने दो टूक कहा कि वित्त आयोग के अवार्ड पीरियड में राज्यों के राजस्व और व्यय का आकलन कागजी नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत के अनुरूप होना चाहिए।

बैठक में मुख्यमंत्री सुक्खू ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग से ‘ग्रीन फंड’ गठित करने की जोरदार पैरवी की। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि इस फंड में हर साल 50 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान हो, क्योंकि पर्वतीय राज्य देश की ‘ग्रीन फ्रंटियर्स’ हैं और पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी इन्हीं पर है। साथ ही उन्होंने होरिजेंटल डिवोल्यूशन के लिए राज्य द्वारा सुझाए गए संशोधित फार्मूले की जानकारी देते हुए वन क्षेत्र और वनों पर आधारित पारिस्थितिकी को प्रमुख मानदंड बनाने की मांग की। हिमाच्छादित और शीत मरुस्थलीय क्षेत्रों को भी घने व मध्यम घने वनों की श्रेणी में शामिल करने का आग्रह किया गया।मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन के मुद्दे पर भी केंद्र का ध्यान खींचते हुए कहा कि 15वें वित्त आयोग द्वारा विकसित आपदा जोखिम सूचकांक (डीआरआई) हिमालयी राज्यों की वास्तविक परिस्थितियों को नहीं दर्शाता। उन्होंने कहा कि बार-बार प्राकृतिक आपदाओं से जूझने के बावजूद हिमाचल को अपेक्षित राहत संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में पहाड़ी राज्यों के लिए अलग डीआरआई और पृथक आवंटन अनिवार्य है।

बैठक के अंत में मुख्यमंत्री सुक्खू ने राजस्व घाटा अनुदान में पिछले वर्षों में आई भारी कटौती का हवाला देते हुए राज्य की वित्तीय क्षमता पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव को रेखांकित किया और जीएसडीपी का अतिरिक्त दो प्रतिशत उधार लेने की अनुमति देने की मांग रखी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, सचिव राकेश कंवर सहित प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।राजनीतिक हलकों में इस भेंट को हिमाचल के वित्तीय अधिकारों की नई लड़ाई की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां सुक्खू सरकार केंद्र से ठोस सहयोग की उम्मीद लगाए बैठी है।

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