देश है तो धर्म है, देश है तो हम हैं—यह पंक्ति केवल भावनात्मक नारा नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक चेतना का सार है। नववर्ष के अवसर पर जब हम नए संकल्प लेते हैं, तब सबसे बड़ा संकल्प अपने देश के प्रति सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव और जिम्मेदारी का होना चाहिए। देश सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध होगा तभी हमारे व्यक्तिगत सपने भी साकार होंगे।

भारत की आत्मा विविधता में एकता है। यहां धर्म, भाषा, संस्कृति और परंपराओं की बहुलता है, लेकिन इन सबके ऊपर राष्ट्र है। राष्ट्र के प्रति निष्ठा का अर्थ किसी एक विचार या वर्ग के प्रति आग्रह नहीं, बल्कि सभी के प्रति सद्भाव और समावेशी सोच है। नववर्ष हमें यह याद दिलाता है कि नकारात्मकता, विभाजन और द्वेष से आगे बढ़कर संवाद, सहयोग और संवेदनशीलता को अपनाया जाए।
आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक जनस्वास्थ्य है। महामारी के अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास का आधार है। भारत में स्वास्थ्य राजनीति पर अक्सर आरोप-प्रत्यारोप हावी रहते हैं, परंतु अब समय है कि स्वास्थ्य को राजनीति से ऊपर रखकर देखा जाए। अस्पताल, डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य अवसंरचना—ये सभी राष्ट्र निर्माण के स्तंभ हैं।
स्वास्थ्य के मुद्दे पर राजनीति का उद्देश्य टकराव नहीं, नीति और समाधान होना चाहिए। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना, ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचाना, पोषण और स्वच्छता पर निवेश बढ़ाना—ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां दलगत मतभेदों से ऊपर उठकर काम करना आवश्यक है। नववर्ष पर यह संकल्प जरूरी है कि स्वास्थ्य को चुनावी एजेंडे की वस्तु नहीं, बल्कि जनकल्याण की प्राथमिकता बनाया जाए।
देश की खुशहाली केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं मापी जा सकती। खुशहाली का अर्थ है—स्वस्थ नागरिक, सुरक्षित परिवार, शिक्षित युवा और भरोसेमंद संस्थाएं। जब नागरिक स्वस्थ होते हैं, तब उनकी उत्पादकता बढ़ती है, समाज में सकारात्मकता आती है और राष्ट्र प्रगति की राह पर आगे बढ़ता है। इसलिए स्वास्थ्य में निवेश दरअसल भविष्य में निवेश है।
नववर्ष पर लोगों का देश के प्रति संकल्प भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अधिकारों के साथ कर्तव्यों का संतुलन ही लोकतंत्र को मजबूत करता है। करों का ईमानदारी से भुगतान, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, कानून का सम्मान, स्वच्छता का पालन और दूसरों के प्रति सहानुभूति—ये छोटे-छोटे कदम मिलकर बड़े परिवर्तन लाते हैं। देश के प्रति प्रेम केवल शब्दों से नहीं, आचरण से प्रकट होता है।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार समाज के हर स्तर पर होना चाहिए। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक, भाषा संयमित और उद्देश्यपूर्ण हो। आलोचना आवश्यक है, परंतु वह रचनात्मक हो; असहमति हो, परंतु शत्रुता नहीं। यही सद्भाव भारत की शक्ति है और यही उसकी पहचान।
नववर्ष हमें अवसर देता है कि हम व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दें। देश है तो धर्म है, देश है तो हम हैं—इस भाव के साथ यदि हम स्वास्थ्य, सद्भाव और संकल्प को अपना मार्गदर्शक बनाएं, तो भारत न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि सामाजिक और नैतिक रूप से भी सशक्त बनेगा। यही नववर्ष का सच्चा संदेश है—स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत और एकजुट भारत।

