Reading: संपादकीय-कांगड़ा घाटी रेलवे : उम्मीद की पटरी, इंतज़ार की दूरी

संपादकीय-कांगड़ा घाटी रेलवे : उम्मीद की पटरी, इंतज़ार की दूरी

RamParkash Vats
4 Min Read
Editorial Viewpoint: Brainstorming and Analysis, News India Aaj Tak. Chief Editor Ram Prakash Vats

कांगड़ा घाटी की नैरो-गेज रेलवे लाइन केवल एक यातायात साधन नहीं, बल्कि पहाड़ की स्मृतियों, रोज़गार और जीवन-रफ्तार की धड़कन है। पठानकोट से जोगिंदरनगर तक चलने वाली यह ऐतिहासिक रेल जब थमती है, तो उसका असर सिर्फ पटरियों तक सीमित नहीं रहता—दुकानदार, छात्र, कर्मचारी, किसान और पर्यटक, सभी की दिनचर्या अटक जाती है। वर्ष 2025 में भी यही तस्वीर सामने है: उम्मीद जिंदा है, लेकिन पूरी रफ्तार अभी बाकी है।
मौजूदा स्थिति साफ़ है।भारी मानसून और लगातार भूस्खलनों ने जुलाई 2025 से कांगड़ा घाटी की ट्रेन सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया। कई स्थानों पर ट्रैक, पुल और संरचनाएँ क्षतिग्रस्त हुईं। हालांकि दिसंबर 2025 की शुरुआत में उत्तरी रेलवे ने राहत की एक किरण दिखाई—बैजनाथ पपरोला से कांगड़ा और जोगिंदरनगर तक सीमित (Partial) नैरो-गेज सेवाएँ फिर से शुरू की गईं। लेकिन सच्चाई यही है कि पठानकोट से जोगिंदरनगर तक पूरी लाइन अभी भी बहाल नहीं हो पाई है।
बाधाएँ वही हैं, पर असर गहरा है।:सबसे बड़ी चुनौती प्रकृति रही है। 2025 के मानसून में कई जगह भूस्खलन और भूमि क्षरण ने पटरियों को असुरक्षित बना दिया। इसके साथ ही चक्की पुल की समस्या वर्षों से इस मार्ग की सबसे कमजोर कड़ी बनी हुई है। अगस्त 2022 में क्षतिग्रस्त हुआ यह पुल पठानकोट को कांगड़ा घाटी से जोड़ने का मुख्य आधार है। इसके बिना पूरी लाइन पर नियमित संचालन संभव नहीं। ऊपर से, यह रेलमार्ग अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ तकनीकी रूप से पुराना भी है, जिससे मरम्मत और पुनर्निर्माण में समय और संसाधन अधिक लगते हैं।
टाइमलाइन उम्मीद देती है, पर गारंटी नहीं:सूत्रों के अनुसार मार्च–अप्रैल 2025 में पुल के स्पैन कार्य और ट्रायल की योजना थी। कुछ रिपोर्टों में नवंबर 2025 तक पूरी सेवा शुरू होने की संभावना जताई गई। हकीकत यह है कि दिसंबर 2025 में आंशिक सेवाएँ तो शुरू हो गईं, लेकिन पूर्ण बहाली की कोई आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं हुई। यानी यात्रियों को अभी भी अगली सूचना का इंतज़ार करना होगा। तो पूरा ट्रैक कब चलेगा: इस सवाल का सीधा जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। रेलवे की ओर से इतना जरूर कहा गया है कि जैसे ही मरम्मत, पुल निर्माण और तकनीकी निरीक्षण पूरे होंगे, पठानकोट से जोगिंदरनगर तक पूरी सेवा बहाल की जाएगी। तब तक यात्रियों को सीमित सेवाओं और बार-बार शेड्यूल जांचने की सलाह दी जा रही है।
भविष्य की दिशा बड़ी है, पर लंबी भी।
रेलवे विभाग ने इस मार्ग को ब्रॉड-गेज में बदलने का प्रस्ताव तैयार किया है—करीब 195 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट के लिए अनुमानित लागत लगभग 30 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। यदि यह योजना स्वीकृत होती है, तो कांगड़ा घाटी की रेल कनेक्टिविटी एक नए युग में प्रवेश कर सकती है। लेकिन तब तक वर्तमान नैरो-गेज लाइन की सुरक्षा और नियमितता ही प्राथमिक ज़रूरत है।

कांगड़ा घाटी रेलवे पूरी तरह बंद नहीं है, पर पूरी तरह चालू भी नहीं। 5 दिसंबर 2025 से सीमित सेवाएँ शुरू होना राहत है, समाधान नहीं। भारी बारिश, पुल क्षति और पुरानी संरचना—ये बाधाएँ दूर होंगी, तभी यह जीवनरेखा फिर से पूरी ताकत से धड़केगी। प्रभावित लोगों के लिए सबसे ज़रूरी है सही और आधिकारिक जानकारी। इसलिए यात्रियों से अपील है कि सफ़र से पहले NTES, IRCTC या 139 के माध्यम से ताज़ा अपडेट ज़रूर जांचें। उम्मीद की पटरी बिछ चुकी है—अब इंतज़ार है, उस पर पूरी ट्रेन के दौड़ने का।

Share This Article
Leave a comment
error: Content is protected !!