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साइबर क्राइम इकाइयों की स्थापना

RamParkash Vats
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गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार

                                                   भारत में साइबर अपराधों की तेजी से बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों दोनों स्तरों पर संरचनात्मक सुधार किए जा रहे हैं। संविधान के सातवें शेड्यूल के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘पब्लिक ऑर्डर’ राज्य का विषय है, इसलिए अपराधों की रोकथाम, जांच और अभियोजन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों की है। इसी क्रम में राज्य सरकारें साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन स्थापित कर रही हैं। केंद्र सरकार इन प्रयासों को वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन के माध्यम से मजबूत बनाती है, ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता आधुनिक डिजिटल अपराधों से निपटने में और अधिक प्रभावी हो सके।

                                                  पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) हर वर्ष देशभर में साइबर सेल और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों से संबंधित आंकड़े प्रकाशित करता है। इसकी 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों की संख्या 169 से बढ़कर 459 हो गई है, जो इस क्षेत्र में बढ़ते सरकारी फोकस को दर्शाता है। राज्यों—जैसे गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और बिहार—में इस अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। ये आंकड़े तेजी से डिजिटल होते समाज में साइबर सुरक्षा ढांचे के विकास की अनिवार्यता को स्पष्ट करते हैं।

                                                  साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की स्थापना की है, जो राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई का प्रमुख केंद्र है। I4C के तहत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) शुरू किया गया है, जो नागरिकों को सभी प्रकार के साइबर अपराधों की ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है। वित्तीय धोखाधड़ी को तुरंत रोकने के लिए CFCFRMS प्रणाली और हेल्पलाइन 1930 भी शुरू की गई है। इसके अलावा, बैंकों, भुगतान एग्रीगेटरों, टेलीकॉम कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ एक आधुनिक Cyber Fraud Mitigation Centre संचालित है, जिससे त्वरित कार्रवाई और बेहतर समन्वय संभव हुआ है।

                                                       राष्ट्रीय समन्वय को और सुदृढ़ बनाने के लिए देशभर में सात जॉइंट साइबर कोऑर्डिनेशन टीमें (JCCTs) गठित की गई हैं, जो साइबर अपराध हॉटस्पॉट्स में बहु-राज्यीय ऑपरेशनों का संचालन करती हैं। Samanvaya Platform नामक MIS प्रणाली राज्यों के बीच डेटा शेयरिंग तथा अपराधियों के नेटवर्क की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके ‘Pratibimb’ मॉड्यूल की मदद से साइबर अपराधियों के अंतरराज्यीय कनेक्शन और उनके ऑपरेशन पैटर्न को मानचित्र पर आसानी से देखा जा सकता है। अब तक इस प्लेटफॉर्म की सहायता से 16,840 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी और 1,05,129 साइबर जांच सहायता अनुरोध पूरे किए जा चुके हैं। कई राज्यों ने I4C की तर्ज पर S4C केंद्र भी स्थापित कर दिए हैं, जिससे राज्य और केंद्र के बीच वास्तविक समय में सूचना साझा करना बेहद सहज हो गया है।

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