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गांव का आसमान आज भारी है—एक पायलट गया है, पर उसकी उड़ान हमेशा अमर रहेगी।दुबई एयर शो हादसा: “देश ने एक बेहतरीन पायलट खो दिया”—शहीद विंग कमांडर नामांश स्याल को नम आंखों से अंतिम विदाई

RamParkash Vats
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पटियालकर,Kangra(शिमला) 23/11/2025 ब्यूरो चीफ विजय समयाल

दुबई एयर शो 2025 के दौरान हुए तेजस विमान हादसे में शहीद हुए विंग कमांडर नामांश स्याल की पार्थिव देह रविवार सुबह हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा ज़िले स्थित उनके पैतृक गांव पटियालकर पहुंची। गांव की मिट्टी में लौटते ही मानो पूरा क्षेत्र शोक की चादर में लिपट गया। हर ओर गम, श्रद्धांजलि और अविश्वास का मिश्रण—मानो किसी ने गांव का धड़कता दिल छीन लिया हो।शहीद के पिता जगन नाथ स्याल ने रूंधे गले से कहा, “देश ने एक बेहतरीन पायलट खोया है… और मैंने अपना जवान बेटा खो दिया है। नामांश की जिंदगी में कभी कोई पल बोरिंग नहीं रहा। वह हर प्रतियोगिता में चमकता था, हर लक्ष्य हासिल करता था।” उन्होंने बताया कि भारत सरकार और दुबई प्रशासन दोनों स्तरों पर दुर्घटना की विस्तृत जांच जारी है।

गांव में सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा। स्थानीय निवासी संदीप कुमार ने भर्राई आवाज़ में कहा, “वह हमारे छोटे भाई जैसा था… ऐसा नहीं होना चाहिए था। आखिरी बार वह तीन-चार महीने पहले गांव आया था। आज उसी गांव में उसकी अर्थी आएगी, यह कभी सोचा नहीं था।”नम आंखों से अपने सहपाठी को याद करते हुए पंकज चड्ढा, जो सैनिक स्कूल सुजानपुर टीरा में उनके साथ पढ़े थे, बोले—“हमने अपना एक हीरा खो दिया। वह हमारे स्कूल का गौरव था, हमारे सपनों की उड़ान था। आज हम उसी बेटे की अंतिम यात्रा में शामिल होने पहुंच रहे हैं।”परिवार के भीतर मातम और भी भारी है। नामांश के ताया जोगिंद्र स्याल और तायी मधु बाला का रो–रोकर बुरा हाल है। उनके अनुसार, “यह सिर्फ हमारे परिवार का नहीं, पूरे देश का नुकसान है। वह हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगा।”

नामांश का कोई सगा भाई नहीं था। उनकी चिता को मुखाग्नि उनके चचेरे भाई द्वारा दी जाएगी। उनकी पत्नी अफशां, जो स्वयं भारतीय वायुसेना में पायलट हैं, हादसे के समय कोलकाता में प्रशिक्षण पर थीं। उनके माता–पिता पिछले कई महीनों से कोयंबटूर के पास सैलूर में उनकी सात वर्षीय बेटी की देखभाल कर रहे थे।विशेष विमान से कोयंबटूर से दिल्ली और फिर गगल एयरपोर्ट तक उनका पार्थिव शरीर पहुंचाया गया। गांव की कच्ची गलियों से होकर जब एंबुलेंस गुज़री, तो हर घर का दरवाजा—हर आंख—नम थी।गांव के बुजुर्ग प्रताप चंद ने कहा, *“आज पूरा पटियालकर शोक में है। उसके पिता सेना में थे, मां गृहिणी हैं।नामांश और उसकी पत्नी दोनों ही वायुसेना में देश की सेवा कर रहे थे।”*चाचा मदन लाल ने गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “यह देश के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। वह बहुत ईमानदार, सीधा-सादा, और दिल का साफ था।”दुबई की धरती पर ड्यूटी निभाते हुए विंग कमांडर नामांश स्याल ने अपने प्राण राष्ट्र सेवा में न्योछावर कर दिए।

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