सबसे बड़ा सवाल यही है—जब ग्रामीण पांच वर्षों से अपना दायित्व निभा रहे हैं, तो आखिर इस सड़क के स्थायी निर्माण की जिम्मेदारी किसकी है?

नौहराधार/संगड़ाह (SIRMOUR):विकास के दावों के बीच ग्राम पंचायत देवामानल के देवठना-नानडी गांव की करीब 900 मीटर लंबी लिंक रोड आज भी सरकारी उपेक्षा की कहानी बयां कर रही है। पिछले लगभग पांच वर्षों से ग्रामीण और नवयुवक मंडल हर वर्ष सामूहिक श्रमदान (हेला) कर सड़क को आवागमन योग्य बना रहे हैं। सवाल यह है कि जब सड़क को विभाग में शामिल किया जा चुका है, तो आखिर स्थायी निर्माण की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
नवयुवक मंडल के सोशल मीडिया प्रभारी एवं समाजसेवी कपिल शर्मा ने बताया कि सड़क की बदहाल स्थिति के कारण किसानों को अपनी उपज मुख्य सड़क तक पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बारिश के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। ऐसे में ग्रामीण हर साल अपने स्तर पर श्रमदान कर सड़क की मरम्मत करने को मजबूर हैं, ताकि खेती-बाड़ी और दैनिक आवाजाही प्रभावित न हो।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2023 में श्री रेणुका जी के विधायक विनय कुमार के प्रयासों से इस लिंक रोड को लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन शामिल कराया गया था। इसके बावजूद अब तक सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
नवयुवक मंडल के प्रधान शशि दत्त शर्मा ने कहा कि सड़क से संबंधित आवश्यक दस्तावेज शीघ्र विभाग को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ सके। उनका कहना है कि ग्रामीण अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर कार्य शुरू होते देखना चाहते हैं।
कपिल शर्मा ने कहा कि वर्षों तक इस सड़क की अनदेखी होती रही। क्षेत्र से पंचायत समिति सदस्य चुने जाने के बावजूद सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। इसका परिणाम यह है कि आज भी ग्रामीणों को अपने श्रम और संसाधनों के बल पर सड़क को चलने योग्य बनाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने नई पंचायत के जनप्रतिनिधियों, लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस महत्वपूर्ण लिंक रोड के निर्माण को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि किसानों और स्थानीय लोगों को हर वर्ष श्रमदान करने की मजबूरी से स्थायी राहत मिल सके।

