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सामाजिक अन्याय, विशेषकर छुआछूत और जातिगत भेदभाव, हमारे समाज की पुरानी लेकिन गहरी जड़ें हैं जिन्हें उखाड़ फेंकना आसान नहीं।

RamParkash Vats
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संपादक राम प्रकाश वत्स Mob:-88947-23376

हिमाचल प्रदेश से आई यह खबर कि राज्य में छुआछूत की घटनाओं में कमी आई है, न केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि है, बल्कि समाज की चेतना में आए संवेदनशील परिवर्तन का प्रतीक भी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, राज्य में 11 वर्षों के बाद सामाजिक न्याय से जुड़ी राज्य-स्तरीय निगरानी समिति की बैठक आयोजित हुई — यह स्वयं में एक ऐतिहासिक कदम है। यह दर्शाता है कि सरकार अब केवल नीतियों के स्तर पर नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और नैतिक दायित्व के स्तर पर भी परिवर्तन लाने की दिशा में सक्रिय है।

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